क्या बालों की पूर्णतः प्राकृतिक देखभाल वास्तव में काम करती है?
एक अत्यंत ही असहनीय दुविधा-पूर्ण स्थिति है अपने बालों अथवा मित्रों में से किसी एक को चुनना!
मेरे बाल बिलकुल एक दिन पुरानी ‘फ्रेंच फ्राइज’ जैसे निर्जीव और रूखे प्रतीत हो रहे हैं। इनके अत्यधिक घुंघराले-पन से मुझे हमेशा जैसे एक हीनता का अनुभव होता है। उचित प्राकृतिक देखभाल न की जाने पर, बालों के दोमुँहें सिरे आपको ऐसा अहसास करातें हैं जैसे वह तलाकशुदा माता पिता की औलाद हों और मानो आप ही उनके अलग होने की वजह हों।
मेरी मां के बाल एकदम रस्सी की तरह मोटे और सीधे हैं, इसलिए अपने घुंघराले बालों के लिए जो भी सुझाव मिले, वह मुझे मेरे पिता से मिले, जो खुद अब पूर्णतया गंजे हो चुके हैं। कभी भी बालों की देखभाल का सही तरीका न सीख पाने के कारण, मैंने अपने बालों को करीब पांच बार रासायनिक तत्वों की मदद से सीधा तो करवा लिया पर इस प्रयास में उन्हें पूरी तरह बर्बाद कर दिया। साथ ही कंडीशनर का इतना उपयोग किया की एक छोटा रेगिस्तान भी हरा-भरा हो जाता।
केमिकल्स से हुए नुकसान की भरपाई की कोशिश में, प्रायश्चित करते हुए, मैंने अपने बालों की पूर्णतः प्राकृतिक देखभाल के लिए, सिर्फ प्राकृतिक वस्तुओं को अपनाने का निर्णय लिया। केवल ‘पैराबेन्स’ और ‘सल्फेट्स’ ही नहीं, बल्कि बोतल के पीछे लिखे वह सब नाम त्याग दिए, जिनका उच्चारण भी मेरे बस के बाहर था।

शुरुआत प्राकृतिक ‘कोल्ड प्रेस्ड’ (कम तापमान में दबाया हुए) नारियल तेल से हुई। फिर अगला कदम था, उसे धोने के लिए किसी उचित वस्तु की तलाश। इस खोज के दौरान, एक ऐसी कंपनी का पता लगा, जो सूखे शिकाकाई पाउडर को एक भूरे रंग की थैली में बेचती थी। अब किसी कंडीशनर की ज़रूरत नहीं रही- सो, अपव्यय भी कम हो गया। बस मैं अभी तक, अपने ‘मोरक्कन ऑयल सिरम’ (Moroccan Oil Serum) का उपयोग करना नहीं छोड़ पाई हूं। तेल ने अपना काम अच्छे से किया, लेकिन गाढ़ा होने के कारण, इसे धोने के प्रयास में शिकाकाई के अत्यधिक उपयोग से मेरे बाल बहुत रूखे हो गए। हालाँकि, इसने मेरे बालों की प्राकृतिक चमक को बढ़ाया और साथ ही मेरे बालों का झड़ना तुरंत कम हो गया।
प्राकृतिक वस्तुओं के अपने पहले सफल प्रयोग के बाद, मुझे जैसे इनकी लत ही लग गयी। शिकाकाई बनाने वाली वही कंपनी बहुत सारे पदार्थों को मिलाकर एक ‘प्राकृतिक प्रोटीन हेयर पैक’ भी बनाती है, जिसका प्रमुख तत्व मेथी है। यह ‘हेयर पैक’, दही और शहद के साथ मिलाकर लगाने के बाद, शिकाकाई से धोने पर, बहुत ही प्रभावकारी सिद्ध हुआ, और तब पहली बार ऐसा हुआ कि पार्लर वाली दीदी ने भी मुझे ‘हेयर स्पा’ पर पैसे खर्च न करने के लिये शर्मिंदा नहीं किया।

मुझे आसमान से जमीन पर उतारने के लिए, मेरे भाई का यह कहना ही काफी था कि, तुम ऐसे महक रही हो जैसे तेल में गरम मसाले का तड़का लगाया हो। कमरे में कदम रखते ही मुझे लोगो की, मुझमें से आ रही तेज गंध से जुडी शिकायतों का सामना करना पड़ने लगा। बालों की पूर्णतः प्राकृतिक देखभाल के लिए, थोड़े त्याग के साथ-साथ मोटी चमड़ी की भी सख्त आवश्यकता होती है।
गूगल किया तो यह आश्वासन मिला कि केले, अंडे, मेयोनीज़, अवाकाडो और दही भी मेथी मिश्रण जैसे ही परिणाम दे सकते हैं। अवाकाडो ने मेरे बालों में जान तो डाली पर साथ ही मेरी जेब भी ढीली कर दी, और तो और यह भी समझ आ गया कि कच्चे अंडे को बालों में लगाकर गर्म पानी से धोए जाने पर, इनकी बालों मे ही भुर्जी बन जाने की पूरी सम्भावना है।
मैंने भृंगादि तेल का भी प्रयोग कर के देखा, जो कि नारियल तेल से हल्का है और बालों की जड़ों के छिद्रों पर नहीं जमता। यद्यपि, इनका परिणाम गुणवत्ता में, मेरे मेथी पैक के ज़रा भी निकट नहीं था, फिर भी इतना फायदा तो हुआ कि मेरे दोस्तों, बॉयफ्रेंड और संबंधियों ने, आखिरकार मुझे फिर से अपना लिया।
सब कुछ सुचारू रूप से चल रहा था, कि तभी एक सुबह उठने पर मैंने अपनी आंखों को सूजे हुए पाया। पता लगा कि मैं शिकाकाई से थोड़ी एलर्जिक हो गई हूं, तो अब वह विकल्प भी मेरे पास बाकी नहीं रहा।
जब तक मुझे मेरे बालों की देखभाल के लिए एक ऐसा सही प्रोडक्ट या रूटीन नहीं मिल जाता, जो मेरे सपनो के राजकुमार को, मेथी की दुर्गन्ध से व्याकुल हुए बिना मेरे करीब लाने में मदद कर सके, तब तक के लिए मैंने एक देखभाल का तरीका खोज लिया है।
तपते गर्म महीनों में या अत्यधिक मानसिक तनाव के समय, जब सिर के बजाय घर की नाली में ज्यादा बाल दिखाई देने लगें, मेयोनीज़ या अवाकाडो बालों के लिए बहुत अच्छे हैं। भृंगादि तेल को रात भर बालों में लगाकर रखना, अथवा स्विमिंग से पूर्व इस्तेमाल करना और तत्पश्चात बायोटिक (Biotique) या कामा आयुर्वेद (Kama Ayurveda) के शैंपू से धो लेना भी फायदा करता है। मैंने ‘मैकाडेमिया नट कंडीशनर’ (Macadamia nut conditioner) भी इस्तेमाल किया जो हालांकि बहुत महंगा है परन्तु वास्तव में वह, पूरी तरह, पैसा वसूल सिद्ध हुआ।

मौसम के अनुरूप देखभाल का तरीका भी बदलता है और अवाकाडो की कीमतें भी! मैंने सुना था कि, आप के बाल जैसे भी हों, आपको उन्हें पसंद करना चाहिए – और मैं भी अब ये सीख रही हूं। अपने बालों पर केमिकल्स के प्रयोग का पुराना अनुभव अच्छा नहीं था, इसलिए मेरी पूरी कोशिश रहती है की मेरे बालों को कभी भी फिर उस स्थिति का सामना न करना पड़े। लेकिन जब तक मेरे बाल खुद को विभिन्न मौसमों के अनुसार ढालना नहीं सीख जाते, तब तक इन के लिए प्राकृतिक मसालों और बूटियों की एक स्वस्थ ख़ुराक तो तैयार रखनी ही चाहिए ना!

