बॉयफ्रेंड से भले ही धोखा मिला लेकिन उस 'दूसरी' औरत से मिल कर मेरी जिंदगी संवर गई
उसकी मदद से मैं बाल-बाल बच गई
मैं टैक्सी में बैठकर एयरपोर्ट जा रही थी, एक ऐसी अनजान औरत के बुलावे पर, जिससे मिलने और बात करने के बाद मुझे पूरी उम्मीद थी कि मेरा दिल चकनाचूर हो जाएगा। उसके बारे में मुझे बस इतनी जानकारी थी कि वह बेंगलुरु से है और अपने किसी रिश्तेदार की सगाई के लिए मुंबई आई है। और यह भी कि वह उसी आदमी के साथ रिलेशनशिप में थी जो मेरे माता-पिता से मिलना चाह रहा था। एक घंटे की कॉल और मैसेज पर उससे हुई बातचीत के दौरान, और उसके द्वारा शेयर किये कुछ सबूतों के आधार पर, मुझे पता चला कि मेरा बॉयफ्रेंड, जो दो साल से मेरे साथ रिलेशनशिप में था, मुझे धोखा दे रहा है। कॉल ख़त्म होने के आधे घंटे के भीतर ही, मैं उससे मिलने के लिए निकल पड़ी। ना मैं रोई, ना ही मुझे गुस्सा आया, बस एक अजीब सी शांत मनःस्थिति थी, जबकि यह सब जानने के बाद मुझे तितर-बितर हो जाना चाहिए था। मैं बस इतना चाहती थी कि मुझे जल्दी से जल्दी उससे मिलकर पूरी कहानी जाननी है।
मैं कबीर* से 2020 के अंत में एक डेटिंग ऐप पर मिली थी और पहली मुलाकात में ही हम दोनों क्लिक कर गए थे। हमारी रेड वाइन सांगरिआ में डूबी हुई डेट नाइट्स बिलकुल परफेक्ट होती थी जिनमें बहुत सारा हंसी-मजाक होता और तारीफों के ऐसे पुल बंधते थे जो कौनसी महिला नहीं सुनना चाहेगी। वह मुंबई में पला-बढ़ा था, लेकिन काम के लिए अमेरिका चला गया था। जब हम मिले, तो वह अपनी फैमिली से मिलने आया हुआ था। शुरुआत में, मैं किसी ऐसे व्यक्ति से रिश्ता बढ़ाने में झिझक महसूस कर रही थी जो इतना दूर रहता हो, लेकिन फिर मैंने इसे एक मौका देने का निर्णय लिया। उन छह हफ्तों के दौरान, जब वह यहां रहा, हमने एक साथ बहुत समय बिताया। उसके न्यू जर्सी लौटने के बाद भी हमारी रोज़ होने वाली बातों का सिलसिला जारी रहा और कुछ महीनों बाद, हमने खुद को एक लॉन्ग डिस्टेंस रिलेशनशिप में पाया।
हम हर रात घंटों बातें करते थे, अपने दिन की हर छोटी-बड़ी बात शेयर करते थे। हम दोनों एक दूसरे की फैमिली और फ्रेंड्स को बिना मिले भी काफी अच्छी तरह जानने लगे थे। अलग-अलग टाइम ज़ोन होने के बावजूद, एकसाथ समय बिताने के लिए, हमने ना जाने कितनी बार अपनी रातों की नींद का त्याग किया होगा। कभी-कभी तो, मैं चलती कॉल के दौरान सो जाती, और वह बस वहीं बैठा मुझे निहारता रहता था। दिवाली, बर्थडे, न्यू ईयर ईव, वैलेंटाइन डे, हम सब कुछ एक साथ, ऑनलाइन, मनाते थे। वह मुझे फूल और ड्रेसेस भेजता था; मैं उसे शर्ट और उसका पसंदीदा ब्लूबेरी चीज़केक भेजती थी। वैसे तो हमारे झगड़े बहुत कम होते थे, लेकिन जब भी हुए, तो हम दोनों ने मिलकर उन्हें सुलझाने के लिए प्रयास किये।
वह बहुत सीधा-साधा सा इंसान था। सादे बाल, सबसे सच्ची मुस्कान, और न्यूट्रल रंगों से भरी अलमारी। उसका पसंदीदा टाइम पास? रिसर्च – फिर चाहे वह ऑफिस चेयर हों, पानी की बोतलें, नए गैजेट, या अन्य अजीबोगरीब चीजें – वह हर चीज के बारे में गहनता से पढ़ना चाहता था। मुझे उसकी इस आदत पर बड़ा प्यार आता था। इतने प्यारे इंसान पर मैं कैसे भरोसा नहीं करती जो मेरा इतना ख्याल रखता था और केवल उन चीजों में दिलचस्पी रखता था, जो एक अच्छे आदमी की पहचान थी। कौन सोच सकता था कि वह किसी को धोखा भी दे सकता है।
सब कुछ ठीक चल रहा था, जब तक कि उसने हमारी शादी के बारे में बात करना शुरू नहीं कर दिया।
नवंबर 2022 में, उसने मुझे अपनी मां से औपचारिक रूप से मिलवाना चाहा (मैं दो साल पहले उनसे थोड़ी देर के लिए मिली थी, जब मैं कबीर को छोड़ने के लिए एयरपोर्ट गई थी, और उसका परिवार भी वहां मौजूद था)। एक वीडियो कॉल के जरिए हमारा परिचय करवाकर वह कॉल से निकल गया ताकि हम स्वाभाविक रूप से बातचीत कर सकें और एक-दूसरे को जान सकें। इस मुलाकात के दौरान ही मुझे एहसास हुआ कि उसके परिवार के खुले विचारों वाला होने के बारे में उसकी सारी कहानियां झूठी थीं, या शायद वह एक भ्रम में जी रहा था।
कॉल के बाद, कबीर की मां ने उससे कहा कि मैं प्यारी हूं, लेकिन “बहुत मॉडर्न” हूं। वह मुझसे उम्मीद कर रही थीं कि मैं पैसा कमाने के लिए नौकरी भी करूं और साथ थी उनके राजा बेटे (आखिर भारतीय पुरुषों को बढ़ा होने में इतनी मुश्किल क्यों होती है) की आवभगत में हर रोज़ छप्पन भोग भी बनाऊं। उन्होंने मेरे परिवार के बारे में पूछताछ की, कि क्या हम काफी करीब हैं और क्या मेरे चाचा-चाची मेरे पल-पल की खबर रखते हैं। इस बातचीत के दौरान मुझे चारों ओर रेड फ्लैग दिखाई दे रहे थे। जब मैंने कबीर को इस बारे में बताया, तो उसने मेरी आलोचना की। जबकि उसने मुझे भरोसा दिलाया था कि अगर मुझे उसके परिवार के साथ कभी कोई समस्या आती है, तो वह खुले दिमाग से सही-गलत का फैसला करेगा और आवश्यकता पड़ने पर मेरा समर्थन करने में पीछे नहीं हटेगा। मैंने उस पर भरोसा किया था, लेकिन मुझे ऐसा लगा जैसे मेरे साथ धोखा हुआ हो। मैं उसी समय इस रिश्ते को खत्म करना चाहती थी, लेकिन उसने चीजों को बेहतर बनाने के लिए थोड़ा समय और मांगा। उसने कहा कि वह इसे हैंडल कर लेगा, और एक बार फिर, मैंने उस पर विश्वास किया।
इस वाकिये के बाद हमारा रिश्ता पहले जैसा नहीं रहा और मुझे उसके व्यवहार में मेरे प्रति एक निश्चित बदलाव महसूस हो रहा था। जैसे, अक्सर देर रात तक बात करने के बाद वह मुझे कहता कि वह सोने जा रहा है, लेकिन उसके व्हाट्सएप स्टेटस पर वह हमारे बात करने के काफी देर बाद भी ऑनलाइन दिखता था। जब मैं उससे सवाल करती, तो वह कहता कि वह अपनी मां से बात कर रहा था। वह आदमी जो पहले अपनी मां से मुश्किल से हफ़्ते में एक बार बात करता था, अचानक उन्हें हर रोज़ मैसेज करने लगा था। कभी-कभी मुझे शक होता कि वह झूठ बोल रहा है, मुझे धोखा दे रहा है, लेकिन वह बातों को घुमाफिरा कर इस बात पर ज़ोर देता कि मैं बहुत ज़्यादा सोच रही हूं।
और अब जब में एयरपोर्ट जा रही थी, ये सारी कड़ियां मुझे आपस में जुड़ती नज़र आ रही थीं। उसकी बातें जो सरासर झूठ थी, उसकी चालाकियां और विश्वासघात।
मार्च 2023 में, वह कुछ हफ़्तों के लिए अपने परिवार से मिलने मुंबई आया, लेकिन उससे भी जरूरी, मुझसे मिलने के लिए, या शायद यह भी मेरा भ्रम था। उसने मुझे भरोसा दिलाया कि यदि हम साथ में ज़्यादा समय बिताएंगे तो हमारा रिश्ता और भी मज़बूत होगा। मैं उलझन में थी – समझ नहीं पा रही थी कि मुझे रिश्ता तोड़ देना चाहिए या एक और मौका देना चाहिए। क्या दो साल में इतने प्यार और धैर्य के साथ बनाए इस रिश्ते को, एक छोटे सी बाधा के कारण तोड़ देना सही है, या ऐसा करके मैं एक बहुत बड़ी बाधा से बच सकती हूं? बिना किसी वास्तविक तथ्य के, मैं यह तय नहीं कर पा रही थी। जब तक कि उस ‘दूसरी’ औरत ने मुझे ढूंढ नहीं लिया।
इसकी शुरुआत इंस्टाग्राम पर आए एक मैसेज से हुई। कुछ ही समय पहले अचानक मन किया तो मैंने अपनी प्रोफ़ाइल को पब्लिक कर दिया, कबीर मुझे ऐसा करने के लिए हमेशा हतोत्साहित करता था क्योंकि उसका मानना था कि यह सुरक्षित नहीं है। पब्लिक करने के कुछ ही मिनट बाद, मुझे एक लड़की का डीएम मिला जिसने दावा किया कि वह मेरे बॉयफ्रेंड के बारे में कुछ जानती है, और वह हम दोनों को एकसाथ धोखा दे रहा है। पहले तो मुझे लगा कि कोई मेरे साथ मज़ाक कर रहा है तो मैंने नज़रअंदाज़ कर दिया। लेकिन फिर उसने उसका नाम बताया, और फिर उनके सेक्सटिंग और वीडियो कॉल के स्क्रीनशॉट आए।
वह मज़ाक नहीं था। वह सब कुछ असली था।
धोखा-धड़ी के शिकार
स्नेहा* दिखने में एक दुबली-पतली महिला थी, और उसने फूलों वाली एक मिडी स्कर्ट पहनी थी, जो उसके सांवले रंग पर बहुत अच्छी रही थी। मिलते ही हम एक दूसरे से गले मिले और फिर हम मुंबई एयरपोर्ट पर द बीयर कैफ़े में जाकर बैठे। उसने बताया कि वह मुझसे मिलने से झिझक रही थी, उसे डर था कि मैं उस पर नाराज़ हूंगी या उसका तिरस्कार करूंगी। लेकिन आखिरकार, उसने डरने के बजाय सत्य को चुना।
उसने मुझे बताया कि वे फरवरी 2023 में एक मैट्रिमोनियल ऐप के जरिए मिले थे (हां, यह सुनकर मैं भी दंग रह गई थी), जहां उनके प्रोफाइल मैच हुए और बातचीत शुरू हुई। फिर कई वीडियो कॉल और ढेर सारी सेक्षुअल फ्लर्टिंग के बाद, उनकी बातें ग्राफ़िक सेक्स्ट के चरम पर पहुंच चुकी थी, जो उसने मुझे दिखाईं और दुर्भाग्य से मुझे वह सब देखना पड़ा।
उनकी मुलाक़ात के एक महीने बाद, स्नेहा को पहला खटका तब हुआ जब वह मुंबई आई, और शहर में होने के बावज़ूद वह उससे नहीं मिला। उसने मुझे बताया कि कैसे वह उसे तब तक टालता रहा जब तक कि उसके वापस बेंगलुरु लौटने का समय नहीं आ गया। हमने बहुत सी बातें की, उसकी बुराइयां की, उसे गालियां दी, इस दौरान उसके कहे ना जाने कितने झूठ सामने आए, और सच कहूं तो, उस पल में, अपनी मन की भड़ास निकाल कर बेहद सुकून मिला, बहुत मज़ा आया। लेकिन मैं फिर भी निर्धारित नहीं कर पा रही थी कि मुझे खुश होना चाहिए या दुखी, जैसे जब आप कहीं फिसल जाते हैं और पहले हंसी आती है, लेकिन दर्द का एहसास बाद में होता है।
आमना-सामना
स्नेहा* से मिलने के बाद खुद को रोक पाना मेरे लिए नामुकिन हो गया था। उसी रात, सुबह 4 बजे, मैं कबीर के घर गई और उसे घर से बाहर आने के लिए मैसेज किया। मैंने उससे बिलकुल सीधी बात की, ना रोई, ना चिल्लाई, ना फ़िल्मी स्टाइल में उसके मुंह पर पानी का गिलास फेंका (हालांकि मन तो मेरा बहुत था), और ना ही उसकी धोखाधड़ी के सबूत पेश किए। उस पल, मुझे जो सही लगा मैंने वही किया।
मैंने उससे कहा कि मुझे सब पता चल चुका है। वह तब तक इनकार करता रहा जब तक मैंने उन खास बातों का जिक्र नहीं छेड़ा जो उसने स्न्नेहा को मैसेज में लिखी थीं। फिर बहाने शुरू हो गए। उसने बताया कि उसकी मां ने उसे एक मैट्रिमोनियल ऐप जॉइन करने के लिए मजबूर किया था और वह उससे शादी नहीं करने वाला था, वह बस बातों में बह गया—यह सब बस “टाइमपास” था।
उसकी ऐसी बातों से मुझे गुस्सा तो बहुत आया, लेकिन मैं उस पर चिल्लाना, उसे अपमानित करना या उसे कोसना नहीं चाहती थी। मैंने बस शांति से उसे बताया कि उसने क्या किया है—कैसे उसने एक ऐसे रिश्ते को बर्बाद कर दिया जो सार्थक हो सकता था। कैसे उसने मुझे खो दिया।
वो रोया। गिड़गिड़ाया। उसने हर चालाकी, हर तरकीब आजमाई, जिसमें दो साल पुराने हमारे रिश्ते को तोड़ने का इल्ज़ाम भी मुझ पर लगाया। एक पल के लिए तो मैं भी उसके झांसे में आ गई और सोचा कि उसे माफ़ कर दूं और रिश्ता न तोडूं। लेकिन अगले ही पल मैंने खुद से पूछा कि क्या वो मेरे भरोसे के लायक है। क्या वो एक दिन बोर होकर फिर किसी और औरत में दिलचस्पी नहीं दिखाने लगेगा, दोबारा मुझे धोखा नहीं देगा? उसने महीनों तक इतनी कुशलता से झूठ बोला। क्या उससे ईमानदारी की उम्मीद की जा सकती है, ना जाने उसने और कितने झूठ बोले होंगें? और सबसे ज़रूरी बात, क्या मैं ऐसे आदमी से शादी करना चाहती थी जो मेरे हक़ में खड़ा नहीं होगा, मेरा साथ नहीं देगा? क्या मैं उसकी मां को अपनी सास बनाना चाहती थी जो उसे दूसरी औरतों से मिलने-जुलने के लिए प्रोत्साहित करती थी, वो भी तब जब वो मुझसे डेटिंग कर रहा था? नहीं।
मैं बहुत निराश थी, लेकिन यह सब मैं किसी बदले की भावना के साथ नहीं कर रही थी। मैं बस एक अंतिम बार उसे वह सब फिर से याद दिलाना चाहती थी – हमारा प्यार, साथ में बुनी ढेर सारी यादें, साथ में बिताई ज़िंदगी। और मुझे अहसास भी नहीं हुआ कि कब मेरे आंसू बहने शुरू हो गए। और, मैं फूट-फूट कर रोने लगी। आपको भले ही सुनने में अजीब लगेगा, लेकिन उस पल में, मैं केवल इतना चाहती थी कि वो मुझे गले लगाए, और उसने वैसा ही किया। मुझे नहीं पता कि मैं ऐसा क्यों चाहती थी? यह सबसे तकलीफदेह था, उसी इंसान से आहत होना जो आपको सबसे ज़्यादा सुकून पहुंचाता था। वहीं सीढ़ियों पर बैठ के, एक आखिरी बार उसे गले लगाकर मैं खूब रोई, और उसे किस भी किया —ऐसे व्यक्ति से, जिसने हाल ही मैं धोखा खाया हो, इस तरह के व्यवहार की उम्मीद नहीं की जाती, हैं ना।
लेकिन यह उसके लिए नहीं था। यह मेरे लिए था। यह मेरे लिए इस रिश्ते का समापन था। मेरा गुड बाय। और इसके बाद मैं वहां से निकल गई।
जिंदगी में आगे बढ़ना
मैंने दो साल तक उसके मुंबई आने का इंतज़ार किया ताकि हम साथ में एक मज़ेदार डेट प्लान कर सकें, जैसे वीकेंड पर कहीं घूमने जाना, बॉलीवुड गानों पर डांस नाईट, और भी ना जाने क्या-क्या। सालों की डेट्स, जिन्हें मैं कुछ हफ़्तों में समेटने का सपना देखती थी। लेकिन इससे पहले कि मैं उसके साथ ऐसा कुछ कर पाती, मुझे पता चला कि वो आदमी मुझे धोखा दे रहा है। अब सोचती हूं तो लगता है अच्छा ही हुआ कि मैंने उसके साथ वो यादें नहीं बनाईं। लेकिन, ब्रेकअप के बाद, अपने दोस्तों के सपोर्ट से, मैंने तय किया कि मैं हर एक डेट पर जाउंगी, फर्क सिर्फ इतना होगा कि इस बार मैं अपनी गर्लफ्रेंड्स के साथ जाउंगी। हम डांस नाइट्स पर गए, गोवा जाकर आए, और मुझे खूब मज़ा आया।
जिंदगी में आगे बढ़ना उतना मुश्किल नहीं था जितना मैंने सोचा था। मैं समझ चुकी थी कि महीनों से धीरे-धीरे इससे उबरने की मेरी कोशिश का यह आखिरी पड़ाव था।
मामला शांत हो जाने के बाद भी मैं और स्नेहा कुछ महीनों तक संपर्क में रहे, मानों उसके विश्वासघात ने हम दोनों को एक नए रिश्ते में बांध दिया था। उसने बताया कि वह अक्सर उसे एक ट्रॉफी की तरह प्रस्तुत करता था, और यह सुनकर मेरा आत्मविश्वास डगमगाने लगा, कि क्या मैं उसे अनाकर्षक लगने लगी थी। वह सफल थी, आत्मविश्वासी थी, और तो और, एरियल योगा भी करती थी। क्या यही वजह थी कि वह उसकी तरफ आकर्षित हो गया था? धोखा मिलने के बाद इंसान इसी तरह के मानसिक चक्रव्यूह में फंस जाता है। यह आपके आत्मविश्वास पर ऐसी चोट करता है जिसकी आपने कभी उम्मीद भी नहीं की होती। “क्या बात कर रही हो? तुम आकर्षक हो, दयालु हो, और तुम एक अद्भुत महिला हो। वही तुम्हारे लायक नहीं था।” स्नेहा मेरा मनोबल बढ़ाने के लिए मुझे बार-बार यही समझाती।
एक साल तक, कबीर मुझे माफ़ीनामों के साथ फूल भेजता रहा। मैं उन्हें नज़रअंदाज़ करती रही। फिर एक दिन, मैंने बस यह कहने के लिए उसे अपने फ़ोन पर अनब्लॉक किया कि, “अब बस करो।” उसने मुझसे यह जरूर पूछा कि मैं इतनी आसानी से आगे कैसे आगे बढ़ गई (ओह, कितनी हिम्मत?), लेकिन फिर उसके फूल और कार्ड्स आने बंद हो गए। और आखिरकार मैं हील हो पाई।
उस साल जून में, मेरी मुलाक़ात किसी और से हुई, जिससे मैंने शादी करने का फैसला किया, एक ऐसा शख़्स जो मुझे बहुत खुश रखता है। शुरुआती दिनों में, उसने मेरे साथ बहुत धैर्य रखा, खासकर तब, जब कबीर से धोखा मिलने के बाद मुझे लोगों पर विश्वास करने में तकलीफ होने लगी थी। उसके माता-पिता से मिलने से पहले मैं बहुत डरी हुई थी। क्या होगा अगर उन्हें भी मैं पसंद नहीं आई? लेकिन वो मुझे शांत करता, मुझे यकीन दिलाता कि वो मुझसे प्यार करेंगे। और उन्होंने किया भी। सब कुछ बहुत अच्छा रहा। पिछले साल हमारी शादी हुई, और आज, वो कहता है कि मैं उसके माता-पिता की लाडली बन गई हूं। अब, जब मैं पीछे मुड़कर देखती हूं, तो मुझे लगता है कि मैं बाल-बाल बच गई।
कभी-कभी, सबसे प्रभावशाली चीज़ जो आप कर सकते हैं, वह है उस सीट को खाली छोड़ देना। इंतज़ार कीजिए। इसे किसी ऐसे व्यक्ति की नज़र में आने दीजिए जो सचमुच आपके बगल में बैठने के योग्य है।
*अनुरोध पर सभी नाम बदल दिए गए हैं
