आयुर्वेदिक बस्ती ट्रीटमेंट ने मुझे 3 दिन में 2 किलो हल्का कर दिया
यह मुश्किल था, थोड़ा शर्मनाक भी था, पर अंत में इस तकलीफ को सहन करना पूरी तरह योग्य था
ऐसा लग रहा था जैसे इमरजेंसी में सब खाली करने की होड़ सी लगी थी। अमेज़न की ब्लैक फ्राईडे सेल की तरह — कुछ भी नहीं बचना चाहिए!
फ़र्क सिर्फ इतना था कि कार्ट में कुछ डालने की बजाय, टॉयलेट सीट पर डगमगाते हुए, मैं बार-बार अपने अपने उन फैसलों पर पछता रही थी जिनकी वजह से 600 ml आयुर्वेद का महान ज्ञान, मेरे भीतर से ऐसे टेक्टॉनिक फोर्स से बाहर निकल रहा था, जिससे शायद कभी हिमालय पर्वत का निर्माण हुआ होगा।
इससे कुछ मिनट पहले, मैं निर्वस्त्र एक अंधेरे कमरे में, एक अजनबी के साथ बतिया रही थी। बस कैथेटर, रबर के दस्ताने, और कुछ उबली हुई जड़ी-बूटियों की तीव्र गंध को हटा दें तो बाकी सब कुछ सुनने में काफ़ी सेक्सी लगता है ना। अब, जब मेरा शरीर, मेरी इन वर्षों पुरानी खान-पान की गलत आदतों को झटके से बाहर निकाल फेंक रहा है, तब मैं उन्हें सुधारने का ख़ुद से मन ही मन वादा कर रही हूँ।
25 मिनट के बाद, मुझे लगा कि अब मेरे लिए इस टॉयलेट सीट के सिंहासन से उतरकर, घर की राह पकड़ना सुरक्षित होगा। सफ़ाई अभियान अब खत्म हो गया है। टैक्सी में बैठते ही मुझे इस बात का अहसास हो गया कि यह सिर्फ मेरा भ्रम था। शायद मर्फी ने भी अपना सिद्धांत प्रतिपादित करने से पहले, आयुर्वेदिक बस्ती ट्रीटमेंट लिया होगा, क्योंकि हर वो चीज जो गलत हो सकती थी, वह इस वक़्त मानो मुझसे बदला ले रही थी।
मैं पसीने से तर-बतर थी। सांस लेना मुश्किल हो रहा था। मैंने टैक्सी वाले से इतनी तेजी से टैक्सी भगाने को कहा जैसे यमराज पीछा कर रहा हो। गाड़ी के ब्रेक की चीखों के साथ हम सीधे घर के दरवाजे पर रुके, और मैं 3-3 सीढ़ियां फलांघते हुए, ऐसे दौड़ी जैसे टॉयलेट सीट मेरी फिनिशिंग लाइन हो। अगर यह ओलंपिक होता तो मैंने उसैन बोल्ट को धूल चटा दी होती।
मेरे पास इतना भी समय नहीं था कि मैं सामने का दरवाजा बंद करती!
ऐसा क्या है जो आपको बस्ती की ओर आकर्षित करता है?
आयुर्वेद के अनुसार, बस्ती अधिकतर बीमारियों के लिए एक प्रमुख इलाज है – जैसे कॉन्स्टिपेशन और एलर्जी से लेकर स्किन इन्फ्लेमेशन और अत्यधिक थकान। यह बीमारियां तब होती हैं, जब शरीर में विद्यमान तीनों दोषों — वात (नर्वस सिस्टम), पित्त (डाइजेशन और मेटाबॉलिक एनर्जी) तथा कफ़ (फ़िजियोलॉजिकल स्ट्रक्चर) में असंतुलन पैदा हो जाता है।
मेरी नाड़ी देखते हुए, आयुर्वेदिक डॉक्टर ने कहा कि मेरे मुख्य रूप से पित्त-संरचना वाले शरीर में, वात का असंतुलन हो गया है और यही मेरे शरीर में विद्यमान गुप्त, मांस पेशियों के दर्द, जोड़ों के दर्द, बढ़े हुए रोसैशिया और सोरायसिस का कारण है।
एक टिपिकल आयुर्वेदिक बस्ती पद्धति में मात्रा या अनुवासन बस्ती (ऑइल-बेस्ड आयुर्वेदिक मिक्सचर जिसे ऐनस (anus) के द्वारा बड़ी इंटेस्टाइन, छोटी इंटेस्टाइन तथा कॉलन को लुब्रिकेट करने के लिए डाला जाता है) और निरूहा या कडा बस्ती दोनों शामिल हैं, जिसमें गाढ़ी जड़ी-बूटियों से बने मिक्सचर का एक हैवी डोज़ आपको निश्चय ही सबसे निकट के बाथरूम की ओर भागने को मजबूर कर देगा।
“आयुर्वेदिक एनिमा में, हम किसी तरह की मशीन या बनावटी दबाव का प्रयोग नहीं करते तथा आपके कॉलन को ही यह तय करने देते हैं कि वह अपने अंदर कितना ले सकता है,” डिंपल गौथम स्पष्ट करती हैं, जो कि आयुर्वेदिक रिसर्च तथा प्राणा हेल्थकेयर सेंटर की फाउंडर हैं।
अनुवासन बस्ती में तेल को शरीर के अंदर बना रहने दिया जाता है ताकि वह शरीर के उत्सर्जक अंगों (excretory organs) को लुब्रिकेट कर आपके कुरकुरे की लत के परिणाम स्वरूप जमा अवशेषों को, वहां से बेघर कर सके। “यह 12 घंटे तक अंदर रहना चाहिए, लेकिन जिन लोगों को गैस की तकलीफ़ है, वे इसे मुश्किल से 15 मिनट तक शरीर के अंदर रख पाते हैं, क्योंकि गैस इसे बाहर धकेल देती है,” गौथम कहती हैं, “दूसरी ओर ऐसे मरीज़ जिनके आंतरिक अंग अत्यधिक सूखे हैं या जो बहुत सिगरेट पीते हैं, हमने पाया कि वह सारा तेल अवशोषित कर लेते हैं। उनके आंतरिक अंग तो इस चिकनाई के लिए हमारे शुक्रगुज़ार होते हैं।”
अनुवासन के बाद, और अधिक आक्रामक निरूहा बस्ती ट्रीटमेंट दिए जाने पर, तुरंत वजन कम हो जाना, इन्फ्लेमेशन, जोड़ों के दर्द और लिवर की चर्बी में कमी, यहाँ तक कि किडनी स्टोन्स और पेट के कीड़ों का बाहर निकल जाना आदि, परिणाम मिलते हैं। इस पूरी प्रक्रिया में मैंने 72 घंटे में 2 किलो वजन कम किया, मेरा रोसैशिया चला गया और मेरा जोड़ों का दर्द भी गायब हो गया।
गौथम आगे कहती हैं, “कुछ लोग एक दिन में 1 किलो वजन कम करते हैं और फिर करते ही जाते हैं, क्योंकि हमने उनके शरीर के करीब 25 फीट लंबे ड्रेनेज सिस्टम की सफ़ाई कर दी है। हमारे ऐसे भी मरीज रहे हैं, जिन्होंने महीने भर में करीब 9 किलो वजन कम किया।” कई मॉडर्न स्टडीज़ भी जोड़ों के दर्द, ब्लोटिंग, कोलेस्ट्रॉल के लेवल तथा मेन्टल हेल्थ पर बस्ती ट्रीटमेंट के सकारात्मक प्रभावों की पुष्टि करती हैं।
किस तरह के लोग आयुर्वेदिक बस्ती ट्रीटमेंट ले सकते हैं?
सबसे पहले एक सर्टिफाइड आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह लें। वैसे तो लगभग हर कोई इसे ले सकता है, लेकिन प्रेग्नेंट औरतों, हार्ट पेशेंट तथा 80 से ऊपर की आयु के सीनियर सिटिज़न को इसे न लेने की सलाह दी जाती है। यदि आप मिर्गी, फ़िशर्स और डायरिया से पीड़ित हैं, तो आप इसे न लें।
इस ट्रीटमेंट को कितनी बार लेना चाहिए?
यदि आपको कोई गंभीर बीमारी नहीं है, तो यह ट्रीटमेंट साल में एक बार ही काफ़ी है। मोटापे से ग्रस्त व्यक्तियों को 40 दिन का होलिस्टिक डिटॉक्स करने की सलाह दी जाती है। गौथम इसे एक ‘तुरत-फ़ुरत वजन घटाओ’ वाली रणनीति समझने की भूल न करने के बारे में सचेत करती हैं। वे कहती हैं, “आप आयुर्वेदिक बस्ती को ख़ुद अपने आप के लिए निर्धारित नहीं कर सकते, न ही आप इसे बहुत ज्यादा कर सकते हैं। यह एक तरह का व्यायाम है। जिस तरह आप 24 घंटे में एक बार तीव्र व्यायाम कर सकते हो, लेकिन फिर आपको अपने शरीर को पुनः रिकवर करने के लिए आराम देना चाहिए अन्यथा आपकी तकलीफें बढ़ सकती हैं।”
आयुर्वेदिक बस्ती के लिए किस प्रकार की तैयारी करनी चाहिए?
यदि आपको किसी प्रकार का इंफेक्शन है, ज़ुखाम या खांसी है, या आप किसी अस्वच्छ स्थान पर हैं, तो आपको कुछ दिन के लिए रुक जाना चाहिए। पीरियड्स के दौरान भी इसका प्रयोग न करें क्योंकि आपका शरीर पहले से ही एक नेचुरल क्लींजिंग प्रोसेस से गुज़र रहा होता है। अत्यधिक हवादार स्थान, तेज धूप तथा अत्यधिक मेलजोल और तीव्र व्यायाम से बचें। रात का खाना 7 बजे से पहले और हल्का खाएं जैसे मूंग दाल खिचड़ी, और जल्दी सोने चले जाएं।
गौथम कहती हैं, “वैसे तो आप काम कर सकते हैं, लेकिन अच्छा होगा कि आप काम बंद कर दें। अपने अधिक काम और तनाव से थके हुए शरीर के लिए इसे एक मेन्टल, इमोशनल और फिज़िकल रिट्रीट समझें।”
आयुर्वेदिक बस्ती ट्रीटमेंट के लोकप्रिय केंद्र
- प्राणा हेल्थकेयर सेंटर, मुंबई
- पेरुंबईल आयुर्वेदा मना, केरल
- आयुर्नवा, दिल्ली
- आयुस्य आयुर्वेदा, कोलकाता
