पिज़्ज़ा पार्टी से लेकर चिल-आउट ज़ोन तक - क्या यह ऑफिस हाउस वर्क भी महिलाएं संभाल रही हैं?
ऑफिस हाउस वर्क, प्रोफेशनल ग्रोथ और बेझिझक ना कहने पर, महिलाओं के विचार
“कुछ समय पहले, मुझे एक अवसर के लिए ग्रीटिंग कार्ड बनाने के लिए कहा गया क्योंकि यह काम ना जाने कब से पड़ा हुआ था और ख़त्म ही नहीं हो रहा था। ढेर सारे अन्य काम होने के बावजूद भी मुझे यह करने के लिए मजबूर किया गया। मेरे सब्र का बांध टूट गया, और मुझे लगा कह दूं, “यह अभी ही करना जरूरी क्यों है? मैं नहीं कर सकती, मुझे माफ़ करो,” लगभग एक दशक से काम कर रहीं, मुंबई स्थित कंटेंट मैनेजर सुहासिनी, ने अपनी पुरानी जॉब पर हुई यह घटना हमारे साथ शेयर की। शिविशा*, जो बेंगलुरु में एक अर्ली-स्टेज वेंचर कैपिटल फण्ड में काम करती हैं और उन्हें भी 10 साल से अधिक का अनुभव है, का भी ऐसा ही कुछ कहना है, “मुझे चिल-आउट ज़ोन डिज़ाइन और सुपरवाइज़ करना पड़ा, और तो और कटलरी भी खरीदनी पड़ी। यह मुझसे मेरे रेग्युलर वर्किंग ऑवर्स के दौरान कराया गया और इस कारण मेरा काम प्रभावित हुआ, मेरे लिए यह बहुत ही कष्टदायक था।” ऐसा पहले भी सुना हुआ सा लगता है ना? इन महिलाओं से ऑफिस में भी हाउस वर्क (घरेलू काम) कराया गया, जो नॉन-प्रोमोटेबल टास्क माने जाते हैं, कारण मुख्यतः क्योंकि वे महिलाएं थीं।
फोर्ब्स.कॉम के एक आर्टिकल में ऐसी ही कुछ स्टडीज़ का उल्लेख किया गया है जिनके अनुसार, ऐसे कामों को कराने के लिए महिलाओं को संपर्क करने की संभावना ज्यादा होती है। ‘द नो क्लब: पुटिंग ए स्टॉप टू वूमेंस डेड-एंड वर्क’ नामक एक पुस्तक में इस प्रैक्टिस पर गहराई से प्रकाश डाला गया है। इसमें इस विषय को एक्स्प्लोर किया गया है कि कैसे लगभग सभी इंडस्ट्रीज़ में महिलाओं पर ‘नॉन-प्रोमोटेबल वर्क’ का अतिरिक्त बोझ डाला जाता है, और वे किस तरह इन परिस्थितियों में भी एक समान स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सकती हैं।
हम सबने यह सहा है या इसके बारे में सुना है। उत्साहपूर्वक कई दिवाली पार्टियां प्लान की होंगी, तो बिना उत्साह के ऑफ-साइट लर्निंग के पीपीटी बनाए होंगे, कमिटियों में शामिल हुए होंगे, इत्यादि। यहां हम इसी विषय को एक्स्प्लोर कर रहे हैं कि क्या महिलाओं को ऑफिस हाउस वर्क ज्यादा मिलता है, वे कैसे ना कह सकती हैं और इस एक्स्ट्रा काम को वो सबकी नज़रों में कैसे ला सकती हैं।
इनविज़िबल टास्क (अदृश्य काम) क्या होते हैं और क्या महिलाओं को ऑफिस हाउस वर्क ज्यादा मिलता है?
इनविज़िबल टास्क या अदृश्य काम, लॉजिस्टिक सम्बंधित काम, ऑफिस हाउस वर्क – वे छोटे-मोटे फ़ालतू काम, कुछ एडमिनिस्ट्रेटिव काम या कुछ ऐसे काम जो ये निर्धारित करते हैं कि वर्कप्लेस का चक्का चलता रहे। इनमें हर वह काम शामिल होता है जो आमतौर पर अनदेखा या नज़रअंदाज़ किया जाता है और जिनके लिए कोई पैसा नहीं मिलता और न ही ये कंपनी रेवेन्यू या पर्सनल करियर गोल में किसी तरह से सहायक होते हैं।
वसुधा आहूजा, एक करियर ट्रांज़िशन कोच हैं, जिनका लक्ष्य है बिगिनर्स और मिड-करियर प्रोफेशनल्स को उनकी वर्क लाइफ के साथ एक हैल्थी रिलेशनशिप विकसित करने में मदद करना। वह बताती हैं, “विज़िबल टास्क वे होती हैं जो आपके प्रोजेक्ट हेतु आपको सौंपी जाती हैं और जिनका नतीजा उल्लेखनीय होता है। इनविज़िबल टास्क भले ही प्रोजेक्ट से सीधे नहीं जुड़ी हुई हो, लेकिन फिर भी उसमें प्रयास, इमोशनल और मेंटल बैंडविड्थ की आवश्यकता होती है (कार्यक्रमों का आयोजन करना, कॉफी कॉर्नर को स्टॉक करना, इन्वेंट्री करना, नोट्स लेना)।
अब किसी को तो यह करना ही होगा। पुराने जमाने में, पुरुषों का मुख्य काम पैसा कमाना होता था, और महिलाओं के हिस्से में घर संभालने की जिम्मेदारी आती थी। हालांकि अब हम प्रगति कर रहे हैं, गार्जियन के एक आर्टिकल के अनुसार अभी भी वर्कप्लेस में ये जेंडर सम्बंधित पक्षपात जारी है। हार्वर्ड बिजनेस रिव्यू के अनुसार, पुरुषों की तुलना में, महिलाओं को 44% अधिक बार इनविज़िबल टास्कों को वॉलंटियर करने के लिए कहा जाता है।
हालांकि ग्लोबल डेटा इस ओर इशारा करता है कि महिलाएं ऑफिस हाउस वर्क की जिम्मेदारी ज्यादा उठा रही हैं, लेकिन इंडियन वर्कफोर्स के आंकड़े ना के बराबर उपलब्ध हैं। अनौपचारिक चर्चाओं के दौरान इस बात की वास्तविकता सामने आती है, लेकिन लोग खुल कर इस पक्षपात को स्वीकार करने से हिचकिचाते हैं।
ऑफिस हाउस वर्क जूनियर और सीनियर मैनेजमेंट को अलग-अलग तरह से कैसे प्रभावित करता है
सुहासिनी और *शिविशा दोनों मानती हैं कि जूनियर होने के नाते, उन्हें इसे मुस्कुराते हुए सहन करना पड़ा था। वे नहीं चाहती थीं कि वर्कप्लेस पर लोग उनकी निंदा करे या यह सोचें कि वे अपना काम अच्छे से नहीं संभाल पा रही हैं।
लेकिन जैसे-जैसे वे करियर में आगे बढ़ती गईं, इन नॉन-प्रोमोटेबल टास्कों के बढ़ते मानसिक बोझ ने उन्हें इसे हैंडल करने के लिए अपना तरीका बदलने के लिए मजबूर कर दिया। यानी, उन्होंने ना कहना सीख लिया, और अन्य महिलाओं को भी ऐसा करने में मदद की, और इनविज़िबल वर्क को ऐसे प्रस्तुत करना शुरू किया जैसे वो दूसरे स्किल निखारने का एक जरिया हों।
सीनियर मैनेजमेंट के रूप में, सुहासिनी की पॉलिसी में ‘अपने से ऊपर वाले लोगों को भी काम सौंपना’ शामिल है, ”मैं सुनिश्चित करती हूं कि लॉजिस्टिक कार्य सबमें समान रूप से बांटा जाए। और मेरी टीम मुझे भी काम दे सकती है।”
वर्कफोर्स में महिलाएं इनविज़िबल वर्क और इसको ना कहने के बारे में कैसा महसूस करती हैं
- अपनी भावनाओं को समझना: जब आप एक प्रोफेशनल के रूप में काम पर जाते हैं तो आहूजा कहती हैं कि जो भी आप महसूस करते हैं उन भावनाओं का सामना करना, आपका सबसे पहला कदम होना चाहिए।
– अत्यधिक लॉजिस्टिक कार्य मिलने से होने वाली एंग्जायटी से निपटना: आपको अपनी क्षमता और सीमाओं का पता होना चाहिए, और इसके लिए लॉजिस्टिक टास्कों को लेने से पहले अपनी बैंडविड्थ का आकलन करें कि क्या आप वाकई इन्हें हैंडल करने के लिए तैयार हैं। प्राथमिकता के अनुसार काम करें, अपने कामों की एक लिस्ट बनाएं, जरूरी और गैर-जरूरी कामों को छांटें ताकि सही समय पर उन्हें पूरा कर सकें।
– इन कार्यों को करने में असमर्थ होने के कारण अपराध बोध से जूझना: आहूजा कहती हैं, खुद के प्रति थोड़ी सहानुभूति दिखाएं। उनका कहना है, “आपकी प्रोफेशनल लाइफ कोई स्प्रिंट दौड़ नहीं बल्कि एक मैराथन है। समझने की कोशिश करें कि क्या संभव है और क्या नहीं।” अपराध बोध के बजाय समाधान पर ध्यान दें।
– ना कहने से डरना: यदि आप चिंतित हैं कि आपको ऐसे व्यक्ति के रूप में टाइपकास्ट कर दिया जाएगा जो ‘टीम प्लेयर नहीं है’ और ‘वर्कलोड हैंडल करने में असमर्थ है’, तो इसका समाधान है खुद को दबंग बनाना। दिल्ली की रूपा रमानी, जिन्हें स्पोर्ट्स एडिटर के रूप में 18 साल से अधिक का अनुभव है, कहती हैं, “वर्कप्लेस पर पुरुषों की तुलना में महिलाओं के केरैक्टर को आमतौर से दो दर्जों में तौला जाता है – या तो बहुत अधिक आज्ञाकारी होना या बहुत अधिक आत्मविश्वासी जो अपनी बात को खुलकर कहने में बिलकुल नहीं हिचकिचाते। आप आत्मविश्वासी बनें। हर बात का अनुपालन करने से आपको भले ही ज्यादा लोग पसंद कर सकते हैं, लेकिन खुद को दृढ़ और आत्मविश्वास के साथ प्रस्तुत करना आपको एक बेहतर प्रोफेशनल बनाएगा।”
इसकी शुरुआत अपनी सीमाओं को पहचानने और उनका सम्मान करने से होती है – और नॉन-प्रोमोटेबल टास्कों को मना करते समय दृढ़ रहना चाहिए। - अपनी सीमाएं खुलकर सामने रखें: सुहासिनी बताती हैं, “जब तक आप अपने मन की बात नहीं कहेंगें, या समाधान ढूंढने की कोशिश नहीं करेंगे, तब तक इस समस्या का हल नहीं मिलेगा। या तो आपका बॉस आपकी सीमाओं को समझते हुए आपकी मदद कर सकता है, या उन्हें नज़रअंदाज़ करते हुए आपको ऐसे काम करने पर मजबूर कर सकता है। ऐसे में आप समझ सकते हैं कि यह वर्कप्लेस आपके लिए सही है या नहीं।”
- वर्किंग ऑवर्स के दौरान ‘ऑफिस हाउस वर्क’ करना: *शिविशा कहती हैं, ”मैं कभी भी ऑफिस टाइम के बाद एडमिन वर्क निपटाने के लिए नहीं रुकती थी। जब मुझसे पूछा गया कि मैंने दूसरे काम क्यों नहीं किए, तो मैंने कहना शुरू किया, ‘मेरे पास बहुत काम है। आप ही बताइए कि अपनी टास्क लिस्ट में से कौन सा काम नजरअंदाज करके मैं इस काम को प्राथमिकता दूं?’ ऐसा करने से दूसरों को मेरा दृष्टिकोण समझने में मदद मिली।
- एक बीच का रास्ता निकालना ताकि आपकी अहमियत भी बनी रहे और बार-बार इंकार भी ना करना पड़े: आहूजा बताती हैं कि यदि कार्य स्पष्ट नहीं हों तो अपने बॉस/एचआर से, जिसके दायरे में यह आता है, उन पर स्पष्टता प्राप्त करें।
हर एक्स्ट्रा काम और उसके लिए किये गए अनुरोध का आकलन करें कि वह आपके वर्कलोड को कैसे प्रभावित करेगा। फिर तय करें कि आप यह कर सकते हैं या नहीं। नज़र रखें कि किस तरह का कार्य बार-बार दिया जा रहा है और कौन दे रहा है – यदि यह एक पैटर्न है, तो उन्हें ऑफिशियली अपने जॉब का हिस्सा बनाने के लिए कहें और उसके लिए मेहनताना मांगें या फिर डेसिग्नेशन बदलने का प्रस्ताव रखें। यदि आपके सीनियर आपकी मनाही या प्रस्ताव से सहमत नहीं हैं, तो समझौते पर बातचीत करें – एक कार्य के बदले में दूसरा कार्य करने का सुझाव दें, या किसी और का नाम सुझाएं जो आपके स्थान पर इसे कर सके।
याद रखें कि अपनी साख बनाने के लिए कुछ कार्यों को स्वीकार करने से आपको नेटवर्क और अच्छे संबंध बनाने में मदद मिलती है। - शालीन और प्रभावशाली तरीके से ना कहना: आहूजा की चीटशीट, उन नर्वस नीनाओं के लिए जो सही शब्द नहीं ढूंढ पा रही हैं:
- पॉज़िटिव नोट पर शुरुआत करें, अवसर के लिए धन्यवाद दें और कार्य के महत्व को स्वीकारें।
- स्पष्ट रूप से, अपने वर्तमान वर्कलोड की परिस्थिति और उससे जुड़ी प्राथमिकताएं बताएं।
- टास्क को करने की अपनी अनिच्छा को कूटनीतिक रूप से व्यक्त करें, कि कैसे आप इस समय इसे अपने शेड्यूल में नहीं जोड़ सकते।
- अन्य समाधान और विकल्प पेश करें।
- आर्गेनाईज़ेशन में योगदान देने के आश्वासन के साथ, इस कार्य को करने में अपनी असमर्थता को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करें और बैंडविड्थ होने पर आने वाले किसी अन्य कार्य को करने की तत्परता को दोहराएं। ऐसा इसलिए है ताकि आपका इनकार भी सुनिश्चित हो जाए और बात भी पॉज़िटिव नोट पर ख़त्म हो।
इनविज़िबल टास्कों का अधिकतम लाभ उठाना और उन्हें विज़िबल टास्कों में बदलना
हालांकि कई बार ऐसा लगता है कि ऑफिस हाउस वर्क के कोई प्रोफेशनल लाभ नहीं होते हैं। ऐसा नहीं है, सुहासिनी को इनसे पारस्परिक संबंध बनाने में फायदा हुआ और *शिविशा को अपने जॉब में नई होने के बावजूद साख बनाने में मदद मिली।
आप वह व्यक्ति बन जाते हैं जो “एक ऐसे व्यक्ति को जानता है जो मदद कर सकता है”, जो, हमारी जुगाड़ू दुनिया में, बहुत महत्वपूर्ण है।
आहूजा एक दिलचस्प नज़रिया प्रस्तुत करती हैं। कई बार ये लॉजिस्टिक टास्क आपको ऐसे कामों से परिचित करा सकते हैं जो आपको आपके वर्तमान कामों से ज्यादा खुशी देते हैं, या आपको पूरी तरह से अलग किसी प्रोफेशन के लिए मनी मैनेजमेंट, क्रिएटिव थिंकिंग, डिस्प्यूट रिसोल्यूशन या कम्युनिकेशन जैसे नए स्किल सिखाते हैं।
प्रैक्टिकल तौर पर, वह बताती हैं कि इनविज़िबल टास्कों को विज़िबल टास्कों में कैसे बदला जाए, “यदि आप इन्वेंट्री मैनेज करते हैं, तो वर्तमान प्रोसेस को डॉक्युमेंट करें और एक एसओपी (स्टैण्डर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर) बनाएं। सुधार के क्षेत्रों को हाइलाइट करें और सुधार के लिए नए प्रस्ताव बनाएं। नए सिस्टम को लागू करना शुरू करें और अन्य विभागों में भी इसके उपयोग का सुझाव दें।”
*प्राइवेसी बनाए रखने के लिए नाम बदला गया है
