सेविंग्स सीरीज़: रिटायरमेंट प्लानिंग
आरामदायक जीवन के लिए एक चीट-शीट
एक बैकयार्ड जहां से समुद्र तट दिखता हो, मखमली ब्लॉक-प्रिंट वाले बेड लिनेन और मार्वल कॉमिक यूनिवर्स के पात्रों के नामों वाले हरे-भरे पौधे – यह सभी बातें मेरी “रिटायरमेंट मस्ट-हैव” नामक इच्छा सूची में शामिल थीं। पिंटरेस्ट के हर स्क्रॉल के साथ यह लिस्ट बढ़ती गई, लेकिन वयस्कता में प्रवेश और उसके बाद की जीवन की कड़वी वास्तविकताओं का सामना करने के बाद, आखिरकार इस लिस्ट को पुनः तैयार करना पड़ा, “LOL”।
ऐश्वर्य और आराम की ज़िंदगी के साथ रिटायर होना कुछ ही लोगों को नसीब होता है। इकनॉमिक टाइम्स में प्रकाशित एक सर्वे के अनुसार, भारत में 76% ‘कामकाजी उम्र के लोग’ एक आरामदेह रिटायरमेंट की आशा रखते हैं, लेकिन उनमें से केवल 33% ही ऐसे हैं जो इसके लिए पैसा अलग से बचाकर रखते हैं।
हमने ITC के रिटायर्ड एग्ज़ीक्यूटिव वॉइस प्रेसिडेंट, अनिल शर्मा से रिटायरमेंट की प्लानिंग हेतु एक ऐसा फूल प्रूफ प्लान बनाने का आग्रह किया, जिस पर आप बेपरवाह होकर कभी भी अमल करना शुरू कर सकते हैं।
रिटायरमेंट की प्लानिंग कैसे शुरू करें
20 वर्षीय उम्र में: बेबी स्टेप
जिस तरह २० के आसपास की आयु में, युवा अपने मेटाबोलिज्म की परवाह नहीं करते, उसी तरह वे अपने फाइनेंस की भी उपेक्षा करते हैं। शर्मा के अनुसार, जल्द शुरुआत के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं है। “मैं और मेरी पत्नी दोनों काम कर रहे थे, तो हमने तय किया कि हम एक की आय को इन्वेस्टमेंट में डालेंगे और दूसरे की आय से अपने रोजमर्रा के खर्चे संभालेंगे।”
आप 500 रूपए की छोटी रकम से भी बचत करना शुरू कर सकते हैं। शर्मा यह भी सलाह देते हैं कि आप सब कुछ खर्च करने से पहले कुछ बचत करें — “मेरे द्वारा पढ़ी गई सभी पुस्तकें कहती हैं कि खर्च करना और फिर बचाना, यह मनुष्य की स्वाभाविक प्रवृत्ति है। मगर, एक उत्तम रिटायरमेंट प्लान के लिए आपको इस प्रक्रिया को उल्टा कर देना चाहिए।” तो, जब अगली बार आपको वेतन मिले, ‘ज़ारा’ की एक और जोड़ी हील खरीदने से बेहतर होगा कि आप उसका एक हिस्सा अपनी रिटायरमेंट विश लिस्ट के लिए अलग रख दें।
अपने फाइनेंस को व्यवस्थित करने के लिए किसी फाइनेंशियल एडवाइज़र या वेल्थ प्लानर की सहायता लें। बचत कैसे करें और कहां निवेश करें, से लेकर दूसरे फाइनेंस सम्बंधित महत्वपूर्ण निर्णय लेने में यह फाइनेंशियल एडवाइजर आपकी (वित्तीय अयोग्यता वाली) सिंड्रेला के लिए ‘फेयरी गॉड मदर’ साबित होगा।
30 वर्षीय उम्र में: सक्रिय हो जाएं
शर्मा कहते हैं, “ना तो मेरा फाइनेंस का कोई बैकग्राउंड था, और ना ही मुझे नंबरों की बहुत समझ थी, पर रिटायरमेंट की प्लानिंग के दौरान कुछ भी मुझे जानकारी प्राप्त करने के लिए पढ़ने से नहीं रोक पाया। शुरुआत उबाऊ थी, लेकिन आखिरकार मैंने इतना सीखा, कि मेरा यह पढ़ना सार्थक हो गया।” बेंजामिन ग्राहम की द इंटेलीजेंट इन्वेस्टर , फ़िलिप फ़िशर की कॉमन स्टॉक्स एंड अनकॉमन प्रॉफिट्स और जॉन सी बोगले की लिटिल बुक ऑफ कॉमन सेंस इन्वेस्टिंग शर्मा की पसंदीदा किताबें हैं।
अपने इन्वेस्टमेंट बजट की प्लानिंग करते समय, शर्मा ‘सिक्स फोल्ड रूल’ का सुझाव रखते हैं: निवेश की शुरुआत करने से पहले, अपने औसत मासिक खर्च से कम से कम 6 गुना अधिक राशि की बचत करें। उदाहरण के लिए, अगर आप हर माह औसतन 10 हजार खर्च करते हैं, तो आदर्श स्थिति यह होगी कि आप कम से कम 60 हजार अलग बचा कर रख दें।
अपने कर्जों से मुक्त हों, क्रेडिट कार्ड से छुटकारा पाएं, और अपनी सेविंग्स को एक ही स्थान पर न कर, अलग-अलग फैला दें। शर्मा के अनुसार “कर्ज एक नाला है। जब मुझे अपनी रिटायरमेंट के लाभ मिले, सबसे पहले मैंने अपने कर्जों से मुक्ति पाई। इस प्रकार मैंने सेविंग से मिलने वाले लाभों के बदले, पहले सुरक्षा को चुना।”
रिस्क कम करने की एक और ट्रिक है- विविधता! आप अपनी सेविंग्स का एक छोटा हिस्सा कुछ संभावित रिस्की निवेशों में डाल सकते हैं, लेकिन अपनी अधिकतम सेविंग आपको लॉन्ग टर्म रिटर्न्स में ही डालनी चाहिए।
40 वर्षीय उम्र में: देर से आए दुरुस्त आए
कुछ देर से समझ आने में कोई बड़ी बात नहीं, यदि आप बाद में निश्चित रूप से सभी निर्णय सही रूप में ले पा रहे हों। शर्मा कहते हैं, “संभल कर चलें क्योंकि जो दांव पर लगा है, वह आपका रिटायरमेंट फंड है नाकि लगातार होती रहने वाली नगद आय।”
शर्मा यह भी सलाह देते हैं कि ऐसे लोग का एक समूह बनायें, जो आप जैसी ही स्थिति में हों, जिनके साथ आप विचार-विमर्श कर सकें। उन लोगों की पहचान करें, जो भरोसेमंद हैं और उन विषयों से अच्छी तरह वाकिफ हैं, जिन पर आपकी पकड़ कुछ ढीली है। अलग-अलग दृष्टिकोण उस विषय को स्पष्ट रूप से समझने में मदद करते हैं, जिसमें आप अब प्रवेश करने जा रहे हैं।
रिटायरमेंट प्लानिंग का एक अन्य तरीका, अपने-आप से यह सादा-सा प्रश्न पूछना है- “क्या मुझे वास्तव में इस चीज की आवश्यकता है?” आवेश में आकर खरीदारी करने और फालतू खर्चों से बचें। बचत करना, यदि निवेश से अधिक महत्वपूर्ण नहीं है, तो उससे कम भी नहीं है।
शर्मा के अनुसार अपने रिटायरमेंट प्लानिंग का गोल्डन रूल है, “छोटे-छोटे लेकिन मजबूत कदम उठाओ।”
