सेक्स पर वार्तालाप: उचित ज्ञानवर्धक मौकों की तलाश करें
अपने बच्चों से सच छुपाने से अचानक दिल का दौरा पड़ सकता है
घंटी का बजना अभी रूका भी नहीं था कि रोहन दरवाजे की ओर दौड़ा। उसकी मम्मी उसके इस उतावलेपन पर हंस पड़ीं, लेकिन जैसे ही वो डिलीवरी मैन को पैसे देकर मुड़ीं, उनके तो चेहरे का रंग ही उड़ गया। रोहन अख़बार में लिपटे उस पैकेट को अपने हाथ में पकड़े हुए, बड़ी उत्सुकता से देख रहा था। वह यह जानना चाहता था कि यह उपहार क्या है और किसके लिए है। “ये केवल नैपकिन हैं,” वो धीरे से बोलीं।
रोहन ने आव देखा ना ताव, झट से अखबार फाड़ कर पैकेट को खोल डाला, “ये तो नैपकिन नहीं लगते मम्मी, क्या ये पार्टी टिशूज जैसे कुछ हैं?” उसकी संकोचित मम्मी ने जल्दी से उन्हें रोहन के हाथ से झपट कर बाथरूम कैबिनेट में छुपाते हुए कहा, “हाँ, हाँ, ये विशेष अवसरों पर इस्तेमाल किए जाने वाले नैपकिंस हैं।”
एक हफ्ते बाद, जब वह मेहमानों के लिए नाश्ते से भरी ट्रे लिए लिविंग रूम में घुसीं, उन्होंने रोहन को नाश्ते की प्लेट के साथ-साथ वे “विशेष अवसर के लिए” रखे गए नैपकिंस भी बांटते हुए पाया।
वैधानिक चेतावनी:अपने बच्चों से सच छुपाना कभी-कभी आपके लिए हृदयाघात का कारण भी बन सकता है।
आज के वातावरण में, बहुत सी ऐसी जानकारियां बच्चों के आगे अनायास ही खुली हुई हैं जिन्हें जानना उनकी आयु के उपयुक्त नहीं है। आप ख़ुद भले ही एक जागरूक माता-पिता हो सकते हैं, आप उन्हें वयस्क फिल्मों से दूर रख सकते हैं, कुछ खास टीवी चैनल्स पर चाइल्ड लॉक लगा सकते हैं, और उनके कंप्यूटर और मोबाइल पर फिल्टर लगा सकते हैं – लेकिन क्या आप उनके मित्रों के मोबाइल पर किसी भी तरह का नियंत्रण रख सकते हैं?
तो, वह जो कुछ भी देखते और सुनते हैं, उसके प्रभाव को कम करने के लिए अगला सबसे उचित कदम क्या है? उत्तर बहुत सरल है – ज्ञानवर्धक मौकों की तलाश द्वारा वार्तालाप!
कैसे ज्ञानवर्धक मौकों की मदद से टैबू तोड़े
अपने बच्चों से, उनके वातावरण में जो भी हो रहा है, उसके बारे में बात कीजिए। उनकी तरफ से प्रश्नों की प्रतीक्षा किए बिना, स्वयं ही सही मौका ढूंढकर संवेदनशील विषयों के बारे में वार्तालाप शुरू कीजिए। टीवी पर चल रहे सैनिटरी नैपकिन का कोई विज्ञापन, या केमिस्ट द्वारा अखबार में लपेट कर दिया गया सैनिटरी नैपकिंस का पैकेट भी, पीरियड्स के बारे में बात शुरू करने का अच्छा मौका हो सकता है। उन्हें समझाइए कि पीरियड्स क्या होते हैं, साथ ही इस अवसर पर उन्हें यह बताना भी न भूलिए कि किस तरह पीरियड्स को अवांछित शर्मिंदगी के साथ जोड़े जाने के कारण उसे अखबार में लपेट कर दिया जाता है। टीवी पर चल रहा एक किस्सिंग सीन बच्चे से प्यार, शारीरिक रूप, उसकी सीमाएं, यहां तक कि उससे जुड़ी सहमति, इत्यादि के विषय में उसकी आयु अनुरूप, बात करने का सही मौका हो सकता है।
यदि कभी किसी गर्भवती महिला से मिलने का अवसर मिले, तो वह भी बातचीत शुरू करने का अच्छा ज्ञानवर्धक मौका है। अपने बच्चे से पूछिए कि क्या तुम्हें पता है कि इस महिला का पेट इतना बड़ा क्यों है, और फिर इस विषय में बात को आगे बढ़ाएं। करीब-करीब सभी बच्चे बहुत छोटी उम्र में ही यह, या इससे मिलता-जुलता, प्रश्न पूछते हैं कि – ‘बच्चा पेट में पहुंचता कैसे है?’ इस प्रश्न से बचने की कोशिश ना करें, ना ही परेशान हों कि अब आपको बच्चे को संपूर्ण यौन-प्रक्रिया के बारे में बताना पड़ेगा। इसकी कोई जरूरत नहीं है। एक छोटे बच्चे की जिज्ञासा को शांत करने के लिए उसे केवल इतना बताना ही पर्याप्त होगा कि बच्चा मां के शरीर में एक छोटे से सेल द्वारा पैदा होता है। अगर बच्चे थोड़े बड़े हों, तो उन्हें बताएं कि मां के शरीर में एक छोटा सा सेल ‘ओवा’ या ‘एग’, और पिता के शरीर में ‘स्पर्म’ सेल होता है। जब यह दोनों सेल मिलते हैं, तब बच्चा बनता है। जैसे-जैसे बच्चा उम्र में बढ़े, उसको और जानकारी देते जाएं।
हमारे अंदर आत्मविश्वास का अभाव, हमें सेक्स संबंधी किसी भी विषय पर बात शुरू करने से रोकता है। हम डरते हैं की न जाने बच्चों के कैसे-कैसे प्रश्नों का सामना करना पड़े, और क्या पता हम उनका जवाब देने में सक्षम होंगे की नहीं। याद रखने योग्य महत्वपूर्ण बात यह है, कि बच्चे एक छोटे से सीधे-सादे उत्तर से संतुष्ट हो जाते हैं – उन्हें लंबे-चौड़े विश्लेषणों की आवश्यकता नहीं होती। दूसरी बात, हर मुश्किल प्रश्न का एक सरल उत्तर होता है; आपको स्वयं को केवल इस बात के लिए तैयार करना है कि ‘कोई भी प्रश्न टैबू नहीं’ है, और तब आपको बच्चे की उम्र के अनुसार उसके प्रश्नों का सही और सरल उत्तर मिल जाएगा।
“मम्मा, स्ट्रौबरी फ्लेवर वाला कंडोम क्या होता है?” आपके अभ्यास के लिए यह एक प्रश्न है – चलिए इसका उत्तर देने के लिए तैयार हो जाइए!
अंजू किश एक सेक्स एजुकेटर हैं और अनटैबू की संस्थापक भी हैं
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