हेल्दी प्रेगनेंसी डाइट, खासकर शाकाहारी महिलाओं के लिए
एक न्यूट्रिशनिस्ट द्वारा शाकाहार के फायदे और नुकसानों की पुष्टि
बर्फ़ जैसे ठंडे पानी को चीरते हुए एक ओलंपियन का तैर कर निकल जाना, एक गर्भवती महिला की तुलना में सिर्फ एक स्तर ज्यादा कठिन है। अपने अंदर पल रहे एक अन्य जीव के लिए तीन लंबे महीनों तक उबकाइयों से कड़ा मुकाबला, अप्रत्याशित मिजाज, खाने-पीने, साँस लेने और छोड़ने तक के यह “जादुई” अनुभव प्रेगनेंसी का एक अहम् हिस्सा है। लेकिन बहुत कम ऐसा होता है, कि शेफ वनिका चौधरी जैसे कुछ योद्धा इन तीव्र थकान से घिरे पलों और अनुचित भोजन संबंधी तृष्णाओं से बच के (उनके पौधों पर आधारित हेल्दी प्रेगनेंसी डाइट की मदद द्वारा) बिना किसी क्षति उभर के बाहर आते हैं।

चौधरी दावा करती हैं कि उन्हें इस दौरान कभी खाने की कोई अनुचित तलब नहीं हुई। उनका लाइफस्टाइल और भोजन संबंधी आदतें अपेक्षाकृत अपरिवर्तित रहीं (उन्होंने सिर्फ अपनी डाइट में ऑर्गेनिक अंडे शामिल किए)। चौधरी, जो मुंबई के एक लोकप्रिय ऑर्गेनिक रेस्तरां ‘सीक्वेल’ की संस्थापक भी हैं, कहती हैं, “पौधों पर आधारित होने का सम्बन्ध डाइट से कम और लाइफस्टाइल से ज्यादा है। जितना आप इसे डाइट के रूप में वर्गीकृत करते हैं, उतना ही ज्यादा आप वजन कम करने के जाल में फंसते जाते हैं और भोजन के साथ एक नकारात्मक संबंध बना लेते हैं।” एक प्रमाणित योग प्रशिक्षक होने के साथ-साथ, चौधरी पूरी मुंबई के लिए हेल्दी को स्वादिष्ट बनाने में भी सफल रही हैं।
वनिका चौधरी की यह गाइड, उन सभी प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए है जो टॉक्सिन पदार्थों को बाहर कर अपनी डाइट को शुद्ध करना चाहती हैं।
हेल्दी प्रेगनेंसी डाइट, खासकर शाकाहारी महिलाओं के लिए
टॉक्सिन पदार्थों को दूर रखें
अपने खाने की आदतों को बदलना इतना आसान नहीं है। और यदि आप प्रेग्नेंट हो, तो आपके शरीर में कई बदलाव हो रहे होते हैं और जब आपका बेबी आपके ब्लैडर पर दबाव बना रहा होता है, ऐसे में आपको सिर्फ एक कटोरी आइसक्रीम के साथ हॉट फ़ज की तलब लगती है। इस स्थिति में, आप यह कैसे सुनिश्चित कर सकते हैं कि हेल्दी प्रेगनेंसी डाइट की ओर आपका परिवर्तन सुचारू हो और यह आपकी दुनिया को उल्टा-पुल्टा न कर दे? भर-भर के फल और सब्जियां खाना सबसे आम जवाब है, लेकिन इनके साथ कीटनाशक का जोखिम भी आता है। “अपने पहले ट्राइमेस्टर में प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए, कीटनाशकों के संपर्क से बचने या उसे सीमित करने के लिए काफी प्रयास किए जाने चाहिए। प्रेगनेंसी के इस प्रारंभिक चरण के दौरान, एक बच्चे के प्रमुख अंग विकसित होते हैं और वह इन केमिकल्स के प्रति अतिसंवेदनशील होते हैं जो स्थायी दोष पैदा कर सकते हैं,” लाइफस्टाइल और वेट मैनेजमेंट स्पेशलिस्ट, डॉ विशाखा शिवदासानी कहती हैं। चौधरी ने हमें कीटनाशकों से बचते हुए हेल्दी भोजन के लिए चीट शीट दी – द डर्टी डज़न और क्लीन फिफ्टीन।
द डर्टी डज़न लिस्ट में ऐसे फल और सब्जियां (आमतौर पर पतले छिलके वाले) शामिल हैं जो टॉक्सिन पदार्थों और कीटनाशकों को अधिकतम मात्रा में अवशोषित करते हैं, और उन्हें ऑर्गेनिक विकल्पों के साथ बदलना चाहिए। “शुरू करने वालों के लिए या जिन्हें रातों-रात ऑर्गेनिक लाइफस्टाइल अपनाना मुश्किल लगता है, स्वयं को डर्टी डज़न से दूर करना एक आसान परिवर्तन है। चौधरी कहती हैं, “यह हेल्दी खान-पान की दिशा में वास्तव में पहला प्रभावी कदम है।”

साल 2019 के लिए, पर्यावरणीय कार्य समूह (EWG) द्वारा प्रस्तावित डर्टी डज़न संस्करण में स्ट्रॉबेरी का नाम सबसे ऊपर है। इस लिस्ट में पालक, केल, शफ्तालू , सेब, अंगूर, आड़ू, चेरी, नाशपाती, टमाटर, सेलेरी और आलू भी शामिल हैं। तेज़ मिर्च का भी एक विशेष उल्लेख है।

क्लीन फिफ्टीन, जो स्पेक्ट्रम के दूसरे छोर पर हैं, टॉक्सिन पदार्थों को बहुत कम मात्रा में अवशोषित करते हैं। सभी एवोकाडो-टोस्ट प्रेमियों के लिए एक अच्छी खबर है, साल 2019 के लिए, पर्यावरणीय कार्य समूह (EWG) द्वारा प्रस्तावित क्लीन फिफ्टीन सूची में इस सब्जी का नाम सबसे ऊपर है। इसके बाद स्वीट कॉर्न, अनानास, जमे हुए मीठे मटर, प्याज, पपीता, बैंगन, शतावरी, कीवी, गोभी, फूलगोभी, कैंटालूप, ब्रोकोली, मशरूम और खरबूजा है।
हालांकि यह लिस्ट व्यापक रूप से अपनाई गई हैं, फिर भी डॉ शिवदासानी महिलाओं को एक हेल्दी प्रेगनेंसी डाइट बनाते समय सरल सावधानियां बरतने की सलाह देती हैं, “हाल ही में एक रिसर्च में पाया गया है, कि कम से कम 30 सेकंड तक सादे नल के पानी के नीचे फल और सब्जियां धोने की प्रक्रिया, 12 पहचाने कीटनाशकों में से नौ के अवशेषों को काफी हद तक कम कर देती है।”
पशु-उत्पाद – क्या खाएं और क्या न खाएं
चौधरी कहती हैं, “पोल्ट्री और डेयरी आमतौर पर एलर्जी के लिए सबसे आम ट्रिगर हैं, और इसका कारण उत्पादन की मात्रा बढ़ाने के लिए इन जानवरों को इंजेक्ट किये जाने वाले हार्मोन हैं।” पशु उत्पादों को बंद करने की दिशा में, डेयरी के उपयोग को कम करना, आपका पहला कदम हो सकता है। इसके कुछ विकल्प – नट मिल्क, ओट्स मिल्क और राइस मिल्क हो सकते हैं। “मैं सोया मिल्क के एस्ट्रोजन प्रभाव के कारण प्रेगनेंसी में इसके उपयोग की सलाह नहीं देती,” डॉ शिवदासानी समझाती हैं।
डेयरी, मांस और हार्मोन-मुक्त उत्पाद, इन सभी के लिए स्थायी और नैतिक स्रोत चुनना, अपने आप को ऑर्गेनिक डाइट में आसानी से ढालने का एक और तरीका है। शेफ वनिका बताती हैं, “ऑर्गेनिक का मतलब हमेशा हार्मोन-मुक्त नहीं होता है।”

हालांकि, पोल्ट्री के सभी रूपों को आहार में से हटा देना सबसे अच्छा विचार नहीं हो सकता है। डॉ शिवदासानी कहती हैं, “अंडे प्रोटीन का सबसे अच्छा प्राकृतिक स्रोत हैं।” चौधरी ने अपनी प्रेगनेंसी के दौरान अंडे को अपने आहार में शामिल करने की बात कबूल की – “मैंने पहले कभी अंडे नहीं खाए थे, लेकिन अब खाती हूं – टॉक्सिन पदार्थों से बचने के लिए ऑर्गेनिक अंडे।”
चौधरी पारा-युक्त मछली की किस्मों से भी दूर रहने की सलाह देती हैं। इनमें स्वोर्डफ़िश, शार्क, किंग मैकेरल और टाइलफ़िश शामिल हैं।
अपने ग्रॉसरी लिस्ट से प्रोसेस्ड फ़ूड हटा दें
प्रेग्नेंट हों या नहीं, रिफाइंड या प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों से बचाव हमेशा एक अच्छा विचार है। चौधरी बताती हैं, “प्रोसेस्ड कार्ब्स और रिफाइंड शुगर आपके शरीर में इंसुलिन की लहर को बढ़ाते हैं और इस वजह से आपको हमेशा भूख लगती रहती हैं और आप ज़रूरत से ज्यादा खाने लगते हैं।”
अपनी ग्रॉसरी लिस्ट में से रिफाइंड शुगर जैसे कृत्रिम मिठास प्रदान करने वाले उत्पादों को हटाना शुरू करें। चौधरी सुझाव देती हैं कि शुगर के प्राकृतिक स्वरुप जैसे शहद, मेपल सिरप और नारियल शुगर को अपनाएं। “हालांकि, यदि आप डायबिटिक हैं, तो यह सबसे अच्छा विचार नहीं है,” वह कहती हैं। लेकिन आधी रात को होने वाली चॉकलेट की तलब का क्या करें? अपनी हेल्दी प्रेगनेंसी डाइट के लिए बिना इमल्सीफायर और प्रेज़रवेटिव वाली एक ऑर्गेनिक डार्क चॉकलेट ब्रांड ढूंढें, और आप आगे बढ़ने के लिए पूर्णतया तैयार हैं।

रिफाइंड आटा एक अत्यधिक उपयोग में लिया जाने वाला इंग्रीडिएंट है जिससे बचना चाहिए। रिफाइंड आटे की जगह कुट्टू का आटा, स्वदेशी बाजरा, रागी, नचनी, सिंघाड़े का आटा, क्विनोआ और अनपॉलिश्ड चावल शामिल करें। वेजिटेबल ऑइल, जिनका उपयोग किसी को भी नहीं करना चाहिए, उनकी जगह एंटीऑक्सिडेंट से भरपूर A2 देसी गाय का घी, कोकोनट ऑइल, ऑलिव ऑइल, हेम्प सीड ऑइल और एवोकाडो ऑइल का इस्तेमाल करना चाहिए।
पौधों पर आधारित डाइट से होने वाली कमियों को दूर करने के लिए विकल्प
चौधरी मानती हैं, “इस बात से कोई इंकार नहीं है कि पौधों पर आधारित डाइट से शरीर में कुछ कमियां हो सकती हैं। डॉ शिवदासानी कहती हैं, “अगर सही प्रकार से ध्यान नहीं रखा जाए, तो पौधों पर आधारित डाइट से शरीर में विटामिन बी और प्रोटीन की कमी हो सकती है। एक पेशेवर चिकित्सक होने के नाते, मैं अपने रोगियों को पौधों पर आधारित डाइट नहीं सुझाऊंगी। उनमें से अधिकांश रोगी, आयरन और (विटामिन) बी 12 की कमी के कारण थकान और बाल झड़ने जैसी समस्याओं के साथ आते हैं और उन्हें ताउम्र इन सप्लीमेंट्स की आवश्यकता होती है।” हरी पत्तेदार सब्जियां, नट्स, बीज और साबुत अनाज खाने से इन कमियों को रोका जा सकता है।

पौधों पर आधारित आहार का पालन करने वाले लोगों में फॉलिक एसिड की कमी बहुत आम है। चौधरी कहती हैं, “लेकिन ऐसे खाद्य समूह हैं जिन्हें फॉलिक एसिड के स्तर में सुधार के लिए आपके आहार में शामिल किया जा सकता है।” वह हरी पत्तेदार सब्जियां, बीन्स, और खट्टे फल खाने की सलाह देती हैं।
चौधरी यह भी उल्लेख करती हैं कि अपनी हेल्दी प्रेगनेंसी डाइट बनाते समय, अनुकूल खाद्य समूहों को एक साथ खाने का ध्यान रखना कितना महत्वपूर्ण है। “उदाहरण के लिए, कैल्शियम और आयरन अगर एक साथ खाए जाएं तो आयरन का अवशोषण कम हो जाता है,” वह समझाती हैं।
अपने आहार में तिल, बादाम, सस्टेनेबल डेयरी, और टोफू को शामिल करने से कैल्शियम की कमी को पूरा किया जा सकता है।
लेबल रीडिंग को अपनी आदत में शामिल करें
चौधरी कहती हैं, “अगर सिर्फ एक चीज हो जो मुझे लोगों को बतानी हो, तो वह यह होगी कि कृपया कुछ भी खरीदने से पहले भोजनसामग्री के पीछे दिए लेबल को अवश्य पढ़ें। सचेत रहें कि आप अपने शरीर में क्या डाल रहे हैं – इमल्सीफायर और प्रिजरवेटिव से लेकर विभिन्न प्रकार की शुगर।”

फार्म ऑइल या वेजिटेबल ऑइल, चीनी के अप्राकृतिक रूप, कृत्रिम रंग, प्रिजरवेटिव, इमल्सीफायर, कृत्रिम फ्लेवर, एमएसजी, अल्कोहॉल, बिना पाश्चराइज्ड किया हुआ दूध और अंडे, यह कुछ ध्यान रखने योग्य भयसूचक चिन्ह हैं। “कई रूपों में छिपी हुई शुगर से सावधान रहें – एक ही के लिए 56 अलग-अलग नाम हैं। इनसे जेस्टेशनल डायबिटीज हो सकती है, जो एक बहुत ही सामान्य घटना है। नमक के लिए भी वही नियम लागू होता है। उच्च सोडियम खाद्य पदार्थों से सावधान रहें क्योंकि वे प्रेगनेंसी के दौरान हाइपरटेंशन का कारण बन सकते हैं,” डॉ शिवदासानी सचेत करते हुए कहती हैं।

