लॉकडाउन के दौरान फूड सेफ्टी: क्या मुझे पैकेज्ड फूड और वेजीज़ को सैनिटाइज़ करना चाहिए?
एक्सपर्ट्स के अनुसार क्या करें और क्या ना करें
पहले कभी हमने इतनी बारीकी से इस बात पर ध्यान नहीं दिया होगा कि हम दिन भर में क्या-क्या छूते हैं। लेकिन जबसे यह लॉकडाउन घोषित हुआ है, धीरे-धीरे सामने आ रही जानकारी (सच्ची और फ़र्ज़ी दोनों ही) के चलते, पर्सनल हाइजीन और दूसरी चीज़ों को लेकर मन में इतने सवाल उठने लगे हैं कि आखिर हमें क्या करना चाहिए और क्या नहीं। सबसे ज़्यादा उत्सुकता फूड सेफ्टी को लेकर होती है।
इस समय अपने हर निर्णय पर सवाल उठाना, एक तरह से वाजिब भी है क्योंकि अभी तक भी हम COVID-19 को पूरी तरह से समझ नहीं पाए हैं। यह खुद को सुरक्षित रखने की हमारी कोशिश ही है जिसने हमें घर में बांध कर रखा है, और हम सिर्फ आवश्यक सामान खरीदने के लिए बाहर निकलते हैं।
क्या होगा, अगर वह ‘आवश्यक सामान’ भी दूषित हो? मुझे क्या पता कि कौन इन प्रोडक्ट्स को हैंडल करता होगा, या कितने लोगों ने इसे छुआ होगा।
क्या पता, मेरे हाथ में जो ये इंस्टेंट मैगी नूडल का पैकेट है, इस पर कोई छींका या खांसा होगा? क्या मैगी, मेरा पहला प्यार, कभी पलटकर मुझ पर ऐसा वार कर सकती है?

ड्रामा एक तरफ, लेकिन जब हमारे आसपास इतनी गलत जानकारियां फैली हुई है तो फूड सेफ्टी पर उठते यह विचार तो नेचुरल हैं।
फूड सेफ्टी और ग्रोसरी शॉपिंग के लिए इन बातों पर अमल करें
क्या मुझे फल और सब्ज़ियां साबुन से धोनी चाहिए?
बचपन में, मैं मां को कई बार ताज़े फल और सब्ज़ियों को, स्टोर करने से पहले, मनमोहक गुलाबी पानी में डुबोते देखा करती थी। बाद में समझ आया कि जिसे मैं ‘गुलाबी’ पानी कहती थी, वह वास्तव में पोटैशियम परमैगनेट सोल्युशन था।
फोर्टिस मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट, नई दिल्ली, के डॉ प्रवीण गुप्ता इस बात से सहमत हैं कि इस समय में भी ये सोल्युशन हमारे फल और सब्ज़ियों को जर्म-फ्री रखने के लिए प्रभावी हो सकता है। एक्सपर्ट्स के अनुसार, फल और सब्ज़ियों को साबुन से कतई नहीं धोना चाहिए।
वॉकहार्ट हॉस्पिटल के इंटरनल मेडिसिन एक्सपर्ट एंड डायबिटीज स्पेशलिस्ट, डॉ जिनेन्द्र जैन कहते हैं, “फलों और सब्ज़ियों की सफाई को लेकर सोसाइटी में बहुत सी वाजिब चिंताएं हैं। सेंटर फॉर डिजीज़ कंट्रोल (सीडीसी) के अनुसार, फूड प्रोडक्ट्स के जरिए, COVID-19 वायरस के फैलने का अभी तक कोई सबूत नहीं मिला है। पर हमें उन्हें फिर भी अच्छे से धोना चाहिए, जैसा हम आज तक करते आए हैं।”

उनका सुझाव है कि इन्हें बहते पानी के नीचे 20-30 सेकंड तक धोना चाहिए और फिर किसी साफ़ कपड़े या पेपर टॉवल से पौंछ कर सूखा लेना चाहिए।
वह बताते हैं, “साबुन या डिटर्जेंट का उपयोग करने की कोई प्रस्तावना नहीं है। बल्कि, यह तो हानिकारक हो सकता है क्योंकि कुछ फूड आइटम इन डिटर्जेंट्स को सोख सकते हैं।”
रटगर्स यूनिवर्सिटी से एक माइक्रोबायोलॉजिस्ट और फूड सेफ्टी एक्सपर्ट, डोनाल्ड शेफ़नर कहते हैं कि साबुन पेट के अंदर चले जाने से उल्टी और दस्त हो सकते हैं।
अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल, मुंबई की क्लीनिकल न्यूट्रिशनिस्ट और डायटीशियन, जीनल पटेल ने 1/2 कप सफ़ेद विनेगर और दो कप पानी का इस्तेमाल करके हमें इन्हें धोने का एक दूसरा तरीका सिखाया। “इस सोल्युशन में सब्ज़ियों को पांच मिनट तक भिगोएं, और फिर साफ़ पानी से धो लें।”
उनका सुझाव है कि अगर बहुत मोटे छिलके वाली सब्ज़ी है तो आप वेजिटेबल ब्रश से थोड़ा घिस कर भी उसे साफ़ कर सकते हैं।
क्या मुझे पैकेज्ड फूड को डिसइंफेक्ट करना चाहिए?
आपने लम्बी लाइन में लगकर, जैसे-तैसे आटा, दाल, कुछ वाई वाई पैकेट्स, और किस्मत अच्छी थी जो टूना के टिंस भी उठा लिए।
फिर अचानक याद आया कि एक आर्टिकल में वायरस के विभिन्न सतहों पर अलग-अलग टाइम तक एक्टिव रहने के बारे में पढ़ा था। डर के मारे मन किया कि इन सब चीज़ों को एक बाल्टी फिनाइल के पानी में डुबो दूं।
घबराइए मत।
पटेल का सुझाव है कि ‘कैन, टिन, बॉटल्स और पैकेट्स वाले आइटम्स’ को स्टोर करने से पहले उन्हें धोना या पोंछ लेना चाहिए ताकि जो भी वायरस उन पर मौजूद हों, कुछ हद तक साफ़ हो जाएं। या फिर, आप डिस्पोजेबल पैकेट्स के आइटम्स को निकालकर कंटेनर्स में स्टोर कर लें।
वह कहती हैं, “नयी रिसर्च के अनुसार, आप ‘स्टेराइल तकनीक’ का भी प्रयोग कर सकते हैं जिसमें अगर आप ग्रोसरी को घर के बाहर या स्टोरेज एरिया में 72 घंटे तक छोड़ दें तो वायरस अपनेआप निष्क्रिय हो जाएगा।”
हां, यह ध्यान रखें कि यह तरीका केवल नॉन-पेरिशेबल आइटम्स के लिए उपयुक्त है।

जैन और शेफ़नर का यह मानना है कि चीज़ों को पैकेट्स से बाहर निकालने और कुछ भी खाने से पहले, अच्छे से हाथों को धोना (फिर भले ही वह सैंडपेपर में ही क्यों न बदल जाएं) ही सबसे कारगर उपाय है।
“खाना पकाते समय और बर्तनों का इस्तेमाल करने के दौरान भी हमें हर थोड़ी में हाथ धोते रहने चाहिए। और सबसे ज़्यादा ज़रूरी है, खाने से पहले हमेशा अच्छे से हाथ धोना, चाहे पेंडेमिक हो या ना हो,” जैन कहते हैं।
किचन को सैनिटाइज़ करें और सब्ज़ियों, ब्रेड, मीट और फिश वगैरह के लिए अलग-अलग चोप्पिंग बोर्ड का इस्तेमाल करें।
पटेल कहते हैं कि कुछ मूल बातों का पालन करते रहें – फ्रिज, सिंक और काउंटर को साफ रखें, जैसा आप हमेशा से करते रहे हैं। “काउंटर टॉप को नियमित रूप से साफ़ करना न भूलें, जिन सतहों पर आप बाज़ार से लाए ग्रोसरी बैग्स रखते हैं, उन्हें अच्छे से सैनिटाइज़ करें।”
ऐसे कौनसे फ़ूड प्रोडक्ट्स हैं जिनसे हमें बचना चाहिए?
ऐसी कोई स्टडी नहीं है जो ये साबित करती है कि खाने की किसी भी चीज़ से यह वायरस फैलता है।
वेंडरबिल्ट यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन के इंफेक्शियस डिसीसेज़ डिपार्टमेंट से डॉ विलियम शेफ़नर समझाते हैं कि अगर कोई आपकी बटर पाव भाजी की प्लेट पर छींक या खांस भी दे, तो कुछ नहीं होगा क्योंकि खाना गले से होकर आपके शरीर में पहुंचता है।
दूसरी तरफ, वायरस आपकी नाक के अंदरूनी सेल्स पर अपनी पकड़ बनाता है, “खाना नाक के अंदर से नहीं जाता,” वह समझाते हैं। “अगर वायरस आपके गेस्ट्रोइंटेस्टिनल ट्रैक्ट में पहुंच भी जाए, तो आपके पेट में बनने वाले एसिड्स उसे ख़त्म कर देंगे।”
क्या मेरा रियूसेबल क्लॉथ बैग वायरस पकड़ सकता है?
प्लास्टिक बैग्स फिर से मार्किट में दिखने शुरू हो गए हैं क्योंकि इस समय दुनिया के कई शहरों और राज्यों ने सिंगल-यूज़ प्लास्टिक बैन को हटा दिया है। इसकी वजह है कि रियूसेबल ग्रोसरी बैग्स के जरिए वायरस को फैलने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, इस तरह के ट्रांसमिशन का कोई सबूत नहीं है, लेकिन प्लास्टिक और कार्डबोर्ड जैसे मैटेरियल पर इस वायरस के लाइफ स्पैन का विश्लेषण हो चुका है, तो दुकानों पर मिल रहे प्लास्टिक बैग्स से भी सावधान रहने की ज़रुरत है।

इस स्टडी ने कॉटन या जूट जैसे मैटेरियल से बने रियूसेबल बैग्स पर नज़र नहीं डाली है।
इसलिए एक्सपर्ट्स की सलाह है कि हर इस्तेमाल के बाद अपने रियूसेबल बैग को अच्छे से धोएं और सुखाएं। किसी भी दूकान पर जाने से पहले और वापस आने के बाद और अपनी ग्रोसरी को स्टोर करने के बाद अपने हाथ ज़रूर धोएं।
क्या होम डिलीवरी सेफ है?
हां। कई ई-कॉमर्स, रेस्टोरेंट्स और डिलीवरी पार्टनर्स ने फूड सेफ्टी रेकमेंडेशन्स का पालन करते हुए नो-कांटेक्ट डिलीवरी ऑप्शंस शुरू किये हैं। आपके डिलीवरी आइटम्स किसी बाहरी लोकेशन तक लाकर छोड़ दिए जाते हैं, जहां से आप उन्हें पिक-अप कर सकते हैं।
हालांकि, फूड के जरिए इस वायरस के ट्रांसमिशन का अभी तक कोई सबूत नहीं मिला है, लेकिन पैकेट्स पर यह 9 दिन तक जिंदा रह सकता है। इसलिए, खाने की चीज़ों को सफाई से कंटेनर्स और पैकेट्स से बाहर निकाल कर, इन पैकेट्स को तुरंत फेंक देना चाहिए। सभी फूड आइटम्स को अपने घर के डिब्बों में स्टोर कर लें और इसके बाद अपने हाथों को 20-30 सेकंड तक ज़रूर धोएं।
अपने अपार्टमेंट से पिक-अप स्पॉट तक जाकर वापस आने के दौरान और सामान उठाने के बाद अपने चेहरे को बिलकुल ना छुएं। यह बहुत हद तक संभव है कि आप सार्वजनिक सतहें जैसे हैंडरेल्स, लिफ्ट के बटन, डोर हैंडल, यहां तक की पैसों से भी इस वायरस को पकड़ सकते हैं।
जहां तक पके हुए खाने का सवाल है, अगर डिलीवरी करने वाला रेस्टोरेंट हाइजीनिक है, तो बीमार पड़ने की सम्भावना काफी कम है (कम से कम COVID-19 से)।
और हां, इन्हें अच्छी टिप देना ज़रूर याद रखें। यह वह एसेंशियल सर्विस प्रोवाइडर्स हैं जो अपनी ज़िंदगी को खतरे में डाल कर हमारी ज़रूरतों को पूरा करने में जुटे हैं ताकि हमारी ज़िन्दगी आसान बन सके।

