क्या भारतीय कपल्स सेक्सलेस मैरिज रुपी महामारी का सामना कर रहे हैं?
दूसरे कपल के लिए जो नार्मल है, वह आपके लिए भी काम करे, यह जरूरी नहीं है
पूरे देश में एक नई लहर के बारे में अफवाहें फैल रही हैं – लोगों में सेक्स संबंधी इच्छाएं घटती जा रहीं हैं और अपने पार्टनर से उनका सेक्षुअल कनेक्शन कटता जा रहा है। हमारा ट्वीक इंस्टाग्राम पेज अक्सर उन कपल्स की कहानियों से भरा होता है, जो एक ही छत के नीचे रहने के बावजूद भी एक दूसरे से इमोशनली और फिज़िकली दूर हैं। एक परेशान रीडर ने मैसेज किया, “अगर मैं बार-बार सेक्स की शुरुआत करने की कोशिश करूंगी तो क्या वह मुझे चरित्रहीन समझेगा?” जबकि दूसरे कई रीडर्स अपनी अधूरी इच्छाओं और भावनात्मक रूप से अनुपलब्ध पार्टनर्स के बारे में शिकायत करते हैं। इसने हमें यह सवाल करने पर मजबूर कर दिया: क्या भारतीय कपल्स सेक्सलेस मैरिज रुपी महामारी का सामना कर रहे हैं, या हम किसी और जटिल मुद्दे की ऊपरी सतह को खरोंच रहे हैं?
समाज में तेजी से बढ़ती आधुनिकता के साथ आगे बढ़ने के लिए, और साथ ही अपने सांस्कृतिक, धार्मिक और सामाजिक रीति-रिवाजों और मानदंडों को पकड़कर रखने के दबाव में, हमें लगा कि हमें सेक्सलेस मैरिज जैसे महत्वपूर्ण विषय पर और गहराई से जानकारी हासिल करनी चाहिए। इस बारे में बात करने के लिए हमें आर्ट्स-बेस्ड सेक्स और ट्रॉमा साइकोथेरेपिस्ट, एड्यूकेटर नेहा भट्ट से बेहतर कोई नहीं लगा जो बेस्टसेलर किताब ‘अनअशेम्ड: नोट्स फ्रॉम द डायरी ऑफ ए सेक्स थेरेपिस्ट’ की लेखिका हैं। आप उन्हें उनके इंस्टाग्राम उपनाम, इंडियन सेक्स थेरेपिस्ट से ज्यादा अच्छे से पहचान सकते हैं। भट्ट को भारतीय कपल्स को काउंसलिंग करने का बहुत व्यापक अनुभव है जो संस्कृति और सामाजिक दबावों से जूझ रहे होते हैं। इसलिए भारत में बढ़ रहे सेक्सलेस मैरिज के संकट पर उनका परामर्श काफी अमूल्य है।
शहरी जीवन और बढ़ती दूरियां
भट्ट बताती हैं, ”केवल भारत ही सेक्षुअल एक्टिविटी में गिरावट अनुभव नहीं कर रहा है। यह एक ग्लोबल ट्रेंड है, लेकिन हमारे अनूठे सांस्कृतिक और सामाजिक दबावों के कारण भारत में सेक्सलेस मैरिज का आंकड़ा तेजी से बढ़ता जा रहा है।” आज के भारत में, शहरी जीवन से जूझते कपल्स को ऑफिस के लंबे वर्किंग ऑवर्स, तनावपूर्ण ट्रैवेलिंग और अनगिनत डिजिटल डिस्ट्रेक्शनों का सामना करना पड़ता है। यही कारण हैं जो कपल्स की बची-खुची एनर्जी और टाइम भी खा जाते हैं, जो शायद वे एक दूसरे के लिए निकाल सकते थे। और ऊपर से उसमें जॉइंट फैमिली में बच्चे, इन-लॉज़ और आये दिन बिन बुलाए मेहमानों की रेलपेल जोड़ दें तो फिर तो क्या कहने।
भारतीय संदर्भ में: नई संस्कृति को अपनाना भी है और इसपर मतभेद भी हैं
भट्ट ने हमारे समाज की प्रकृति को बहुत घाघ और स्पष्ट शब्दों में प्रस्तुत किया है। “हमने पश्चिम सभ्यता से बहुत कुछ अपनाया है, जिसमें सेक्षुअल लिबरेशन भी शामिल है। सोशल मीडिया भले ही इन विचारों और अपेक्षाओं से भरा है, लेकिन फिर भी उनमें और हमारी सामाजिक वास्तविकता में बहुत मतभेद हैं।

भट्ट का कहना हैं, “हमारा समाज धीरे-धीरे स्वरुप बदल रहा है, इसलिए हमें इस बात को मान कर चलना होगा कि हम पश्चिम की तरह स्थिर नहीं हैं। जेंडर, शादी, पैसा, यहां तक कि सेक्स – हर चीज़ पर सवाल किया जाता है।”
शुरुआत में बेडरूम में हो रही रोज़ की आतिशबाजी, हमारे यहां समय बीतने के साथ, कपड़े धोने, मम्मी जी के पैर दबाने और ज़ूम कालों के बीच झूलते हुए सप्ताह में एक या दो बार तक ही सीमित रह जाती है। लेकिन ऐसा नहीं है कि यह कोई बुरी बात है।
शादीशुदा लोग वास्तव में कितना सेक्स करते हैं?
हम अपने दादा-दादी और माता-पिता की जेनेरशन से काफी आगे निकल चुके हैं, जहां सेक्स मुख्यतः अपनी नस्ल को आगे बढ़ाने का एक जरिया था। ख़ास तौर पर औरतों को जो डिक्शनरी थमाई जाती थी, उसमें प्लेज़र जैसे शब्द का कोई अस्तित्व ही नहीं था। लेकिन आजकल बिलकुल उल्टा हो गया है, अपेक्षाएं बदलती जा रहीं हैं। और जब आप इन पर खरे नहीं उतर पाते, तो ऐसा लगता है जैसे कुछ गलत हो रहा है। विश्व-प्रसिद्ध रिलेशनशिप एक्सपर्ट और साइकोलोजिस्ट, डॉ. जॉन गॉटमैन की रिसर्च का उपयोग करते हुए, भट्ट एक रिलेशनशिप के विभिन्न चरणों को समझाते हुए कहती हैं, “सेक्सलेस मैरिज के बारे में सबसे बड़ी गलतफहमी यह है कि या तो आपके पार्टनर के लिबिडो (सेक्स करने की इच्छा) के साथ कुछ गड़बड़ है या आपके प्रति उनका प्यार ख़त्म होता जा रहा है।”

हर रिलेशनशिप इन चरणों से गुजरती है, जिसकी शुरुआत सबके फेवरेट हनीमून फेज़ से होती है। गॉटमैन की रिसर्च के अनुसार, इसके बाद अक्सर एक रिलेशनशिप पॉवर स्ट्रगल वाले चरण में प्रवेश करती है, जो आम तौर पर लगभग ढाई साल तक चलता है। कुछ कपल्स इसे सफलतापूर्वक पार कर लेते हैं, और मैच्योरिटी और डिसकनेक्शन के अगले चरण में चले जाते हैं – डिसकनेक्शन उतना बुरा नहीं होता जितना सुनने में लगता है – इस फेज़ में वे अपने आपसी बॉन्ड को बनाए रखते हुए अपने पर्सनल हितों के पीछे भागते हैं।
फिर, अगले चरण में, ये रिश्ते गहरे और मैच्योर होने लगते हैं, और अगाध प्रेम का रूप ले लेते हैं। इन चरणों पर विदेशों में बड़े पैमाने पर रिसर्च की गई है, लेकिन भारत में इस तरह की रिसर्च का अभाव है, क्योंकि हमारे यहां लोगों के अनुभव अक्सर धार्मिक और दार्शनिक बातों से प्रभावित होते हैं।
रिलेशनशिप के हर स्टेज के साथ सेक्स की फ़्रिक्वेन्सी भी बदलती रहती है। यह क्वांटिटी से ज्यादा क्वालिटी के बारे में हो जाता है, और हर कपल की ज़रूरतें अलग होती हैं। अपने रिश्ते की तुलना दूसरों से करने में कोई समझदारी नहीं है।
थेरेपी नामक ‘राक्षस” और अपने ‘परफेक्ट मैच’ की खोज
“अगर हम थेरेपिस्ट के पास जाएंगे तो वे कहेगा कि तलाक ले लो।” यह एक आम डर है जो लोगों को एक थेरेपिस्ट के पास जाने से रोकता है और इसका कारण है सही जानकारी की कमी। पैसा भी एक वजह हो सकता है, लेकिन सदियों पुरानी सोच “लोग क्या कहेंगे” एक मुख्य कारण है जो लोगों को मदद मांगने से रोकता है। यह उन कारणों में से एक है जिसने भट्ट को यह पुस्तक लिखने के लिए प्रेरित किया। “यह किताब उन लोगों के लिए है जो फुल-टाइम थेरेपी आज़माने से डरते हैं।”
प्रत्येक चैप्टर के साथ, आप थेरेपी के प्रोसेस को बेहतर ढंग से समझ सकते हैं। भट्ट की किताब को एक उपन्यास के बजाय एक वर्कशीट की तरह समझें। अपने अंदर की भावनाएं पर काम करके ही आप अपनी रिलेशनशिप में अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान दे सकते हैं।
हम सभी बॉलीवुड और रोम-कॉम देखते हुए बड़े हुए हैं जिन्होंने हमारे अंदर इस अहसास को कूट-कूट कर भर दिया कि हर किसी के लिए, कहीं ना कहीं, कोई न कोई बनाया गया है और एक दिन हमें हमारा “परफेक्ट मैच” जरूर मिलेगा। इसलिए जब लोग खुद को एक सेक्सलेस मैरिज में पाते हैं, उन्हें एक नए संकट का सामना करना पड़ता है, “हे भगवान, कहीं ऐसा तो नहीं कि मुझे मेरा परफेक्ट मैच नहीं मिला इसलिए मेरे साथ ऐसा हो रहा है।”

भट्ट ‘परफेक्ट मैच’ में नहीं, बल्कि अपनी रिलेशनशिप पर काम करके उसे परफेक्ट बनाने में विश्वास रखती हैं। “एक ऐसा रिश्ता जिसमें आप दोनों साथ मिलकर, उसे अपने लिए, सही और अनुकूल बनाने का प्रयास करें। लेकिन याद रखें, बदलते समय के साथ रिश्ते की अनुकूलता भी बदलती रहती है। मनुष्य के रूप में, हम लगातार विकसित हो रहे हैं और परफेक्ट रिलेशनशिप वह है जहां आप अपने साझा जीवन में समानता लाने के लिए, एक दूसरे में आ रहे बदलावों को स्वीकार करते हैं और उसके अनुसार खुद को बदलने का प्रयास करते हैं।”
इंटिमेसी को फिर से जगाएं और आपस में ‘बात’ करें
यदि आप अपनी सेक्षुअल लाइफ से खुश नहीं हैं और अपने पार्टनर से दूरी महसूस कर रहें हैं, तो भट्ट के पास कुछ सुझाव हैं कि आप कैसे उसके साथ इस बारे में बात शुरू कर सकते हैं।
- समय निकालें – कई कपल्स इसे प्राथमिकता नहीं देते हैं। रविवार की सुबह अपने पार्टनर के साथ बिताएं।
- फिज़िकल कनेक्शन से शुरुआत करें जैसे मसाज देना, हाथ पकड़ना, या केवल साथ में बिस्तर पर लेटकर संगीत सुनना। इससे अपने पार्टनर के साथ संबंध को मजबूत बनाने में आपको मदद मिलेगी।
- धीरे-धीरे कम्फ़र्टेबल होने की कोशिश करें और फिर खुद कमान संभालें। एक बार जब आप शारीरिक तौर पर कम्फ़र्टेबल हो जाएं, तो बातचीत को धीरे से आगे बढ़ाएं और अलगाव की अपनी भावनाओं को जाहिर करें। “मैं तुमसे कुछ बात करना चाहती थी…”; “मुझे ऐसा महसूस हो रहा है…”। दोष देने से बचें – आप इसमें एक साथ हैं और इस पर एक साथ काम करना होगा।
हार्पर कॉलिन्स द्वारा प्रकाशित, नेहा भट्ट द्वारा लिखित ‘अनअशेम्ड: नोट्स फ्रॉम द डायरी ऑफ ए सेक्स थेरेपिस्ट’ की एक कॉपी खरीदने के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं।




