टॉक्सिक वर्क कल्चर: खराब बॉस से निपटने के विशेषज्ञ के सुझाव
जब आपकी ज़िंदगी फिल्म ‘द डेविल वियर्स प्राडा’ का बुरा रीमेक बन जायें
जैसे करेले का पहला कौर आपके मुंह को कसैला कर देता है, ठीक उसी तरह कोई ऐसा एक खराब बॉस ज़रूर होता है, जिसका मात्र नाम भी आपके मुंह का स्वाद खराब कर देता है। वह जो मीटिंग के बीच छोटी सी गलती होने पर चिल्लाने लगता था। वह जो रात के 10 बजे काम देकर, उसे अगले दिन सुबह 8 बजे पूरा करने की डेडलाइन देता था।
कोई भी कामकाजी वयस्क आपको यह बता सकता है – बुली करने वाले (बेवजह सताने वाले) लोग हमेशा स्कूल के गलियारों तक ही सीमित नहीं रहते, कुछ अपनी जगह ऑफिस में भी बना लेते हैं।
माइंडसाइट क्लिनिक की संस्थापक और सी ई ओ, मनोचिकित्सक जैनी सावला के अनुसार, बढ़ती संख्या में रोगियों की प्रमुख शिकायत, वर्कप्लेस में होने वाले तनाव से सम्बंधित होती हैं। वह कहती हैं, “भारत में लगातार श्रमिक संख्या बढ़ती जा रही है, जिससे कर्मचारियों को खर्चें के तौर पर देखा जाता है। यह बात दोनों ही पार्टियों को पता होती है।”
लेकिन क्या कोई ऐसा प्रभावी तरीका है, जिससे आप अपने नापसंद खराब बॉस के साथ अच्छा व्यवहार बनाये रखते हुए, अपनी पसंदीदा नौकरी पर पकड़ बनाये रख सकें? सावला के पास इसके लिए एक चेकलिस्ट है।

→ जानिये कि आप कहाँ कदम रखने वाले हैं- यदि आप नया ऑफिस जॉइन करने वाले हैं, तो सावला सलाह देती हैं, कि शुरू करने से पहले ही वहां की कार्य संस्कृति के बारे में जितना हो सके जानकारी हासिल करें। काम का समय, छुट्टियां, ऑफिस के तय समय के बाद आधिकारिक संचार की आवश्यकता, इत्यादि के बारे में साफ तौर से पूछें। सब जानने के बाद खुद से सवाल करें- क्या आप ऐसे ऑफिस में काम करना चाहते हैं?
→ सीमा तय करें, जिसे वे आसानी से पार न कर सकें- चीज़ों को व्यावसायिक बनाए रखने के लिये, अपने रिश्ते और सीमायें तय करें। सावला सलाह देती हैं, “एक बार व्यावसायिक और व्यक्तिगत रिश्ते की सीमा धुँधलाने लगे, तो उसे दोबारा स्पष्ट करना मुश्किल हो जाता है। आप बेशक अपनी नई जॉब में, लोगों के साथ अच्छा तालमेल बनाना चाहेंगे, तब भी अपनी सीमायें निर्धारित करना जरूरी है।”
ऑफिस की छुट्टी के बाद किसी प्रोजेक्ट या काम के बारे में दिशा-निर्देश दिये जाने पर आप यह बेहतरीन प्रतिक्रिया दे सकते हैं, “मैंने नोट कर लिया है, कल सुबह ऑफिस पहुंचकर पहला काम यही करूंगी। “इससे आप विनम्रता के साथ यह जता सकते हैं, कि आप ऑफिस का काम ऑफिस तक ही सीमित रखते हैं।
→ दिमाग शांत रखें- आमतौर पर, कार्यस्थल पर विभिन्न पदों पर नियुक्त लोगों के बीच किसी भी विषय पर टकराव का हल सही नहीं निकलता। सावला कहती हैं, “अगर सामना किसी ऐसे व्यक्ति से हो जो भावनात्मक प्रतिक्रियाओं को उकसाता हो, तो आप पूरी कोशिश करके खुद को भावुक होने से रोकें और खुद को नियंत्रित करें। ऐसे लोगों के साथ वाक्-युद्ध में शामिल न हो, क्योंकि वह अपने पद के कारण हमेशा आपसे उच्च ही रहेंगे।”

तनावपूर्ण स्थिति में खुद को अलग करने की अच्छी तकनीक बताते हुये, सावला सलाह देती हैं, कि दिल को दुखाने वाले शब्दों को मानसिक रूप से न जुड़ने दें। “आंखों का संपर्क बनाये रखें, लेकिन अपने दिमाग में कोई गाना गुनगुनाने की कोशिश करें। इससे आपका ध्यान कहीं और हट जायेगा, लेकिन आंखों का संपर्क बनाये रखने से ऐसा महसूस नहीं होगा कि आप उस बातचीत से बाहर कुछ और सोच रहे हैं।” इसके अलावा तनाव कम करने के लिये 4-7-10 ब्रीथिंग तकनीक को भी आज़मा सकते हैं। सांस लेते समय अपने दिमाग में 4 तक गिनती गिनें। 4 से 7 तक गिनते समय सांस को रोककर रखियें और 7 से 10 गिनते हुये सांस छोड़ दीजिये।
सावला कहती हैं, कि जब आप अपने बॉस के पास कोई समस्या लेकर जाते हैं, तो उसके साथ हमेशा समाधान लेकर भी तैयार रहें। अगर आपके हिसाब से विकल्प ‘बी’ सही रास्ता है, तो उसे साथ में थोड़े मुश्किल विकल्प ‘ए’ और ‘सी’ से भी अवगत कराएं। यह आपकी समस्या को सुलझाने के कौशल को भी दर्शायेगा।
अगर आपको पता है कि सामने वाला व्यक्ति खुद को ही ज़्यादा तवज्जो देता है, तो आप अपने वाक्यों में थोड़ा बदलाव लेकर आयें। “मैं सोच रही हूं” और “हमें ऐसा करना चाहिये” की जगह आप कहें, “आपने कहा था की यह काम करना है, क्या आपको लगता है की हमें ऐसा करना चाहिये ….।” आप वाक्य को सवाल की तरह पेश करें, ताकि उन्हें लगे कि उनका सुझाव महत्वपूर्ण है। इससे उन्हें असुरक्षा की भावना महसूस नहीं होगी।
→ उनके लक्ष्यों के साथ खुद को जोड़ने की कोशिश करें- सावला कहती हैं, “यह सुनने में थोड़ा अजीब लगता है कि उनसे जुड़ो मत लेकिन उनके साथ संपर्क में भी रहो। पर इसका मतलब है, कि आप पता लगाये कि कंपनी को लेकर उनके लक्ष्य क्या हैं और वह कैसे इसे हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं?” अपने बॉस को इन लक्ष्यों को हासिल करने में मदद करके, आप उनके साथ एक मजबूत व्यावसायिक रिश्ता कायम कर पाएंगे। इससे कंपनी में आपकी स्थिति भी मज़बूत बनेगी।

यह जानने के लिये थोड़ी खोजबीन की जरूरत हो सकती है। सावला कहती हैं, “कभी-कभी सिर्फ पूछ लेने पर ही लोग खुल कर चर्चा कर लेते हैं। खुद को ऐसे प्रदर्शित करें, जैसे कि आप कर्मचारी के तौर पर उनके काम को जानकर उसे आसान बनाना चाहते हैं।” इस जानकारी का इस्तेमाल करते हुए, आप अपने सुझाव उनके समक्ष रखें, और उनसे ऐसे जुड़े कि उन्हें लगे कि वह इस तरह अपने उद्देश्य और प्राथमिकताओं को पूरा कर लेंगे।
→ अन्य जॉब विकल्पों पर भी रखें नज़र- अपने बायोडाटा को नवीनतम रखें, ‘लिंक्डइन प्रोफाइल’ पर सक्रिय रहें और नई जॉब शुरू करने के बाद भी अपने प्रोफेशनल नेटवर्क को मज़बूत रखें। नये कौशल को विकसित करने पर ध्यान दें और विभिन्न विभागों के साथ काम करने और सहयोग देने की कोशिश करें। सावला कहती हैं, कि यह एक सुरक्षित जाल की तरह काम करता है क्योंकि आप अपनी पसंदीदा कंपनी के प्रति चाहे कितने भी प्रतिबद्ध हो, आपकी निष्ठा आपके खुद के प्रति, आपके विकास और भविष्य के प्रति भी होनी चाहिए।

