स्टॉक मार्केट में इन्वेस्ट करने के लिए हमने कुछ मूर्खतापूर्ण सवाल पूछे, ताकि आप बच सकें
दलाल स्ट्रीट के दिग्गजों ने दिए जवाब
बचपन में मॉरल साइंस की क्लास से मैंने एक सबसे बड़ी सीख ली, वह थी ‘इग्नोरेंस इस ब्लिस’, जिसका अर्थ है – कुछ चीजों की जानकारी न हो तो ही बेहतर है क्योंकि उनका ज्ञान दुःख का कारण बन सकता है। इस सीख ने मुझे जीवन भर बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज और शेयर मार्केट से दूरी बनाए रखने के लिए प्रेरित किया। ये उतरती-चढ़ती लाल और हरी रेखाएं मुझे क्रिस्टोफर नोलन के यूनिवर्स से भी अधिक जटिल लगती थीं। स्टॉक मार्केट में इन्वेस्ट करने के प्रति मेरी अरुचि के लिए मेरी परवरिश जिम्मेदार है, क्योंकि जब इन्वेस्टमेंट की बात आती है तो मेरे घर में कोई भी खतरों का खिलाड़ी नहीं है। मैं तो मोनोपोली खेलते समय भी किसी प्रॉपर्टी में इन्वेस्ट करने से पहले तीन बार सोचती हूं।
मैं इस बात से इंकार नहीं कर सकती कि कोई भी बड़ी फाइनेंशियल जिम्मेदारी न उठाना मेरे लिए एक सौभाग्य की बात है। मुझे अपने इस डर का सामना, साल में केवल एक बार, अपने डैड के फाइनेंशियल एडवाइजर के साथ हमारी एनुअल डेट पर करना पड़ता है। वे नंबरों से भरे भारी-भरकम डाक्यूमेंट्स पढ़ने के लिए मुझे मजबूर करते हैं, एक दिन मुझे अमीर बनाने के बड़े-बड़े वादें करते हैं, और उस दिन मेरे सेविंग्स अकाउंट में से मेरी मेहनत की कमाई का एक बड़ा हिस्सा एक लम्बी छुट्टी मनाने के लिए कहीं दूर चला जाता है, जहां वह एक स्लोथ की स्पीड से बढ़ेगा। मैं सोचती थी, मेरी फाइनेंशियल लाइफ आगे भी इसी तरह चलती रहेगी, जैसी अब तक चल रही थी।
और फिर एक दिन हम सब दोस्तों ने मिलकर सोनी लिव पर, टेलीविज़न सीरीज ‘स्कैम 1992’ देख ली, बस उस फिल्म ने तो जैसे मेरे दोस्तों को ही ठग लिया। वो हर्षद मेहता और उसके ज्ञान, “रिस्क है तो इश्क़ है” से इतने प्रभावित हो गए कि कुछ ने किसी एक मोतीलाल ओसवाल को पकड़कर अपना गुरु बना लिया, और बाकी लोग स्टॉक्स, शेयर्स, बिटकॉइंस जैसे नए डिनोमिनेशन/मूल्यवर्ग पर अपग्रेड कर गए।

एक्सपर्ट्स के अनुसार, 2016 में केवल 2% भारतीय स्टॉक मार्केट में इन्वेस्ट कर रहे थे, जबकि हमारी इकोनॉमी, इक्विटी मार्केट के बाद, एशिया की तीसरी सबसे बड़ी इकोनॉमी है। लॉकडाउन के दौरान, गिरती इकोनॉमी और ढहते जॉब मार्केट के बीच, मनी मैनेजमेंट अधिकांश ब्रंच कन्वर्सेशन का अहम हिस्सा बनता जा रहा था।
राफा दलवी, एक मार्केटिंग प्रोफेशनल जो अब स्टॉक में भी अपना हाथ आजमा रही हैं, बताती हैं, “जब मेरी जॉब सैलरी में कटौती हुई, और मुझे एहसास हुआ कि मेरी सेविंग्स बहुत कम इंटरेस्ट रेट पर बढ़ रही हैं, तो मुझे इन वोलेटाइल/अस्थिर बाजारों में स्मार्ट इन्वेस्टमेंट का जोखिम उठाना पड़ा।”
दीपायन चौधरी ने अपने पिता के असामयिक निधन के बाद खुद को शेयर बाजार की भाषा से जूझते हुए पाया। उन्होंने पिछले 10 वर्षों में लगभग 10 लाख रुपये का इन्वेस्टमेंट किया, लेकिन कभी ध्यान से उस पर नजर नहीं रखी, और उनका पैसा बढ़ ही नहीं रहा था। वह कहते हैं, “जब मैंने अपने सभी फाइनेंशियल डाक्यूमेंट्स दोबारा देखे, तो मेरे पास स्टॉक मार्केट में प्रवेश करने के अलावा कोई विकल्प नहीं था। अपनी सतही समझ और फाइनेंशियल एडवाइजर की मदद से, पिछले दो वर्षों में, मैंने इसे करीब 15 लाख रुपये में बदल दिया।”
रिजर्व बैंक ऑफ़ इंडिया के डेटा के अनुसार, 2020 में एक्टिव इन्वेस्टर एकाउंट्स में रिकॉर्ड 10.4 मिलियन की वृद्धि हुई।

हाई रिस्क के डर को कम करने के लिए, मैंने इकोनॉमिक्स की एक प्रोफेसर शरबानी तालुकदार से बात की, जिन्होंने समझाया कि कैसे कम उम्र में स्टॉक मार्केट में इन्वेस्ट करना सबसे बुद्धिमानी वाला काम है। वह कहती हैं, “जैसे-जैसे आपकी उम्र बढ़ती है, आपकी जिम्मेदारियां बढ़ने लगती हैं। आपकी रिस्क लेने की क्षमता कम हो जाती है। जब आप छोटे होते हैं, तो भले ही आपके पास इन्वेस्ट करने के लिए पैसा कम होता है, लेकिन युवा खून में साहस की कोई कमी नहीं होती। खुद को मार्केट की कार्यशैली से परिचित कराने के लिए छोटे से ही शुरुआत करें।”
उन्होंने यह भी बताया कि उचित ज्ञान और विश्वास की कमी के कारण कई लोग इस फाइनेंशियल इंस्ट्रूमेंट से दूर रहते हैं और इस बारे में खुद को शिक्षित करना सबसे पहला कदम है।

स्टॉक मार्केट में इन्वेस्ट करना, अब होगा सरल
क्या स्टॉक मार्केट में इन्वेस्ट करने के लिए मुझे मैथ्स में निपुण होने की ज़रूरत है?
नहीं, लेकिन आपको प्रॉफिट और लॉस की बुनियादी समझ और कुछ सामान्य ज्ञान की आवश्यकता है। एक ऐसा फाइनेंशियल एडवाइज़र जिस पर आप भरोसा करते हैं वह आपकी घबराहट कम कर सकता है। मार्केट में नंबर्स जटिल हो जाते हैं, और इनके उतार-चढ़ाव को प्रोफेशनल द्वारा सबसे अच्छी तरह से ट्रैक किया जाता है। आंख मूंद कर अपने मित्र या परिवार के सदस्य की सलाह का पालन करने में कोई समझदारी नहीं है, यह आखिरी चीज़ होगी जो आप करना चाहेंगे।

क्या मैं अपने मौजूदा बैंक अकाउंट का उपयोग कर सकती हूं? या मुझे एक नया अकाउंट खुलवाने के लिए ढेर सारी कागजी कार्रवाई करनी पड़ेगी?
हां, इसके लिए आपको एक ट्रेडिंग अकाउंट की आवश्यकता है, जिसे डीमैट अकाउंट के रूप में भी जाना जाता है, लेकिन आपको यह जानकर बहुत खुशी होगी कि इसके लिए कोई लम्बी-चौड़ी कागजी कार्रवाई की जरूरत नहीं है। वो दिन चले गए। डीमटेरियलाइज़्ड अकाउंट की मदद से आप अपने शेयर और सेक्युरिटी इलेक्ट्रॉनिक फॉर्मेट में रख सकते हैं।
आप इस अकाउंट को अपने बैंक के नेट-बैंकिंग ऐप का उपयोग करके अपने फोन से शुरू कर सकते हैं। आपको अपने बैंक को डीमैट अकाउंट से जोड़ने के लिए अपने पैन कार्ड और आधार कार्ड की एक कॉपी, मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी और एक रद्द चेक की आवश्यकता है। अधिकांश बैंक एक सप्ताह से भी कम समय में आपका नया अकाउंट बना देंगे।
मेरा अकाउंट शुरू होने के बाद मुझे क्या करना है? मैं कहां से शेयर खरीदूं या बेचूं? क्या इसके लिए कोई ऐप्स, साइट या ऑफिस होते हैं?
स्मॉलकेस और जीरोधा जैसे ऐप्स पर आप स्टॉक बेच या खरीद सकते हैं। बल्कि, आप इन्वेस्ट करने से पहले कीमतें चैक करने के लिए अपने डीमैट अकाउंट का भी उपयोग कर सकते हैं। दल्वी का कहना है कि मार्केट में उतर रहे बिगिनर्स के लिए स्मॉलकेस सबसे अच्छा प्लेटफार्म है।
वह कहते हैं, “पूरे दिन मार्केट को ट्रैक करने के लिए ना तो मेरे पास समय था और ना ही पर्याप्त ज्ञान। केमिकल्स, फार्मास्यूटिकल्स, एफएमसीजी जैसे वर्गों के तहत आने वाली कंपनियों को स्मॉलकेस एक साथ लाता है, और इसमें निफ्टी 50, निफ्टी 100 जैसी सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाली श्रेणियां भी हैं। आप इन्वेस्ट करने के लिए कोई भी केटेगरी चुन सकते हैं, और बाकी का काम यह ऐप आपके लिए करता है। यह काफी आसान है।”
इन्वेस्ट करने के लिए कौन-कौन से वर्ग की कंपनियां हैं?
कंपनियों को लार्ज-कैप कंपनियों, मिड-कैप कंपनियों और स्मॉल-कैप कंपनियों के अंतर्गत वर्गीकृत किया गया है। लार्ज-कैप कंपनियां राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त हैं, और हाई क्वॉलिटी प्रोडक्ट्स का कारोबार करती हैं। इन्हें ब्लू-चिप कंपनियां भी कहा जाता है। स्टॉक मार्केट में इन्वेस्ट करते समय, इनके साथ शुरुआत करना सबसे सुरक्षित है। जैसे: रिलायंस, टीसीएस, इंफोसिस, हिंदुस्तान यूनिलीवर, आईटीसी इत्यादि।
मिड-कैप कंपनियां लार्ज-कैप कंपनियों जितनी बड़ी नहीं है जैसे पॉलीकैब, रिलैक्सो फुटवियर इत्यादि। स्मॉल-कैप कंपनियां आम तौर पर स्टार्ट-अप होती हैं, और इनमें रिस्क कहीं अधिक होता है।
इन कंपनियों की विभिन्न प्रोडक्ट श्रेणियां हैं जैसे बैंकिंग, केमिकल्स, फार्मास्यूटिकल्स, एफएमसीजी, ऑटोमोबाइल टेलीकम्यूनिकेशन और पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग। क्या चीज डिमांड में है, यह जानने के लिए अपने सामान्य ज्ञान का उपयोग करें। उदाहरण के लिए, पेंडेमिक के दौरान, फार्मास्यूटिकल कंपनियों में उछाल देखा गया था और इनमें इन्वेस्ट करने वाले लोगों को बहुत अच्छा रिटर्न मिला।
यदि किसी को इन्वेस्टमेन्ट (म्यूचुअल फंड या एसआईपी स्कीम) का कोई अनुभव नहीं है, तो क्या आप उन्हें स्टॉक और शेयरों की दुनिया में प्रवेश करने की सलाह देंगे?
म्यूचुअल फंड आपको रिस्क का ट्रेलर दिखाता है, लेकिन स्टॉक मार्केट वास्तविक तस्वीर है। अंततः, यह आपकी जोखिम उठाने की क्षमता पर निर्भर करता है।
2017 में, मुंबई की एक इंजीनियर, श्रेया वाघमारे ने सीधे क्रिप्टोकरेंसी मार्केट में छलांग लगाई, वो भी लो-रिस्क म्यूचुअल फंड या ट्रेडिशनल स्टॉक मार्केट में पहले कभी कोई जोखिम उठाए बिना।
“मेरे पास थोड़ा पैसा था, जिस पर उस वक़्त रिस्क उठाने में मुझे कोई आपत्ति नहीं थी। मैं उस राशि को खोने के लिए भी तैयार थी। पिछले साल उस इन्वेस्टमेंट पर मुझे इतना प्रॉफिट मिला जो मेरी शादी की शॉपिंग और लहंगे के लिए काम आया।”
मुझे जज न करें, लेकिन क्या वास्तव में शेयर मार्केट में बिना किसी रिस्क के इन्वेस्ट करने का कोई तरीका नहीं है?
आपका बुलबुला फोड़ने के लिए माफ़ करें, लेकिन स्टॉक मार्केट में इन्वेस्ट करने का जोखिम आपको केवल तभी उठाना चाहिए जब आपमें अपनी सेविंग्स को नीचे गिरते हुए देखने का साहस हो।
बस याद रखें, “आप मार्केट को किसी समय सीमा में नहीं बांध सकते, लेकिन यदि आप मार्केट को समय दे सकते हैं, तो यह आपको एक अच्छा सरप्राइज़ दे सकता है।”

इस क्षेत्र में रिस्क तो रहेगी: जितनी ज्यादा रिटर्न की अपेक्षा, उतना अधिक रिस्क। लॉन्ग-टर्म इंवेस्टमेंट्स (पांच साल से अधिक) काफी सुरक्षित होते हैं। घाटे की संभावना कम करनी है तो अपने इन्वेस्टमेंट में विविधता लाएं। आपके सामने फाइनेंशियल साधनों की भरमार है: एफडी, आरडी, एसआईपी, एसडब्ल्यूपी, म्यूचुअल फंड, शेयर बाजार, क्रिप्टोकरेंसी, एलआईसी इत्यादि। अलग-अलग स्थानों पर अपना पैसा इन्वेस्ट करके अपना फाइनेंशियल पोर्टफोलियो बनाएं। आपके पास जो भी रकम हो, उसे हिस्सों में बांट लें और बचत करें।
इस रिस्की व्यापार में सबसे बड़ा जोखिम क्या है?
इन्वेस्टिंग में सबसे बड़ा जोखिम बिल्कुल भी इन्वेस्ट न करना है। हालांकि यह सुनने में अजीब लगता है, लेकिन अपना पैसा सही जगह इन्वेस्ट न करना आपको गरीब बना रहा है और यह एक बहुत बड़ा रिस्क है।
क्यों? महंगाई की वजह से।
महंगाई तेजी से बढ़ती जा रही हैं, और हमारे पैसे को भी उस रेट से बढ़ने की ज़रूरत है जो इंफ्लेशन को मात दे सके ताकि हम अपनी ज़रूरत की चीज़ों को खरीदने में सक्षम हो सकें।

क्या इन्वेस्टिंग शुरू करने के लिए कोई आयु मानदंड है? ट्रेडिंग शुरू करने का सबसे अच्छा समय कब है?
इन्वेस्टिंग पर उम्र की कोई रोक नहीं है। बल्कि, 18 वर्ष से कम आयु के लोग भी माता-पिता या अभिभावक द्वारा उपलब्ध कराए गए डाक्यूमेंट्स के साथ डीमैट अकाउंट खोलकर स्टॉक मार्केट में इन्वेस्ट कर सकते हैं।
आप जितनी जल्दी ट्रेडिंग शुरू करेंगे, उतना बेहतर होगा, खासकर मिडिल-क्लास फैमिली वालों के लिए। ऐसे परिवारों में ज्यादातर लोगों को उच्च शिक्षा के लिए लोन लेने के बारे में भी सोचना होता है। अपने पैसे को बढ़ता देखने के लिए, भले ही 5,000 रुपये जैसी कम राशि से छोटी शुरुआत करें। यहां बात पैसों के बारे में नहीं है, यह उन चीजों को करने की आजादी के बारे में है जो आप करना चाहते हैं।
19 वर्षीय, वृंदा रावल बताती हैं, “बचपन से मैं अपने पिता को इन्वेस्ट करते हुए देख रही हूं। इसलिए जब मैं 18 साल की हुई, तो मैंने भी इसमें दिलचस्पी लेना शुरू कर दिया। मैंने 5,000 रुपये का इन्वेस्टमेंट किया और इसमें उतार-चढ़ाव आते रहते हैं, लेकिन मैं यहां लॉन्ग-टर्म प्रॉफिट के लिए हूं, इसलिए मैं घबराती नहीं हूं। कुछ ख़ास किये बिना, अपना पैसा बढ़ते हुए देखना मुझे अच्छा लगता है।”
छोटी उम्र में शुरुआत करने से आपको आपके 30s में मदद मिलेगी। तब आप अपनी पुरानी गलतियों से सीख कर पक्के हो चुके होंगे और मार्केट की गतिविधियों के बारे में अधिक जागरूक होंगे।
क्या मुझे हर सुबह उठते ही इन गतिविधियों पर नज़र रखनी होगी?
नहीं, पर यदि आप इस मार्केट के नशे के आदी होना चाहते है तो बात और है। स्टॉक मार्केट में दो प्रकार के इन्वेस्टमेंट होते हैं: इंट्राडे ट्रेडिंग और लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टिंग। इंट्राडे ट्रेडिंग, सरल शब्दों में, एक तरह का जुआ है। आप सुबह पैसा इन्वेस्ट करते हैं, और दिन के अंत में आपको पता चलता है कि आपको लाभ हुआ है या हानि। यदि आप इन मामलों में नौसिखिया हैं, तो सुबह लगभग 8.30 बजे सीएनबीसी जैसे समाचार चैनल देखने से मदद मिल सकती है। वे हर दिन मार्केट सम्बंधित भविष्यवाणियां करते हैं और ट्रेंड को समझना सरल बनाते हैं।
लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टमेंट में, अपने स्टॉक को प्रतिदिन ट्रैक न करने में समझदारी है। बल्कि, हर तीन महीने में एक बार जांच करनी चाहिए ताकि घबराहट में की जाने वाली बेवजह खरीदारी और बिक्री से बच सकें।

एक नौसिखिया के लिए, अस्थिर/वोलेटाइल मार्केट में इन्वेस्ट करने के लिए एक अच्छी शुरूआती रकम क्या होनी चाहिए?
सच कहें तो शेयर मार्केट में कोई भी चीज गारंटी के साथ नहीं आती। अप्रत्याशित घाटे से बचने के लिए बिगिनर्स ब्लू-चिप कंपनियों में इन्वेस्ट करके शेयर बाजार में प्रवेश कर सकते हैं। इन्वेस्ट करने के लिए एक अच्छी शुरूआती रकम इन्वेस्टर की मार्केट में रिस्क लेने की क्षमता पर निर्भर करती है।
यदि अचानक परिस्थिति खराब हो जाए, और अप्रत्याशित खर्चे आ जाएं और मेरा सारा पैसा शेयर मार्केट में फंसा हो, तो क्या करें?
दो शब्द: इमरजेंसी कॉर्पस/फण्ड। यदि आपकी आय का स्रोत बंद हो जाए या अचानक बड़े अप्रत्याशित खर्च आ जाएं तो यह फण्ड आपके मन की शांति का साधन है। यहां सामान्य नियम यह है कि तीन से छह महीने के फिक्स एक्सपेंस जितनी रकम को ऐसी जगह रखा जाए जहां से आसानी से निकाला जा सके (आपका सेविंग्स बैंक अकाउंट ठीक है)।
जैसे, यदि आप किराए, भोजन और अन्य जरूरतों पर प्रति माह 30,000 रुपये खर्च करते हैं, तो जरूरत के समय के लिए अपने इमरजेंसी कॉर्पस में हर समय 90,000 रुपये से 1.8 लाख रुपये तक रखें।
क्या मुझे लोन लेकर इन्वेस्ट करना चाहिए?
नहीं, यदि आपको लोन लेने की आवश्यकता है, तो हमारी सलाह है कि हाई रिस्क मार्केट में इन्वेस्ट करने से बचें। मार्केट में किसी रिटर्न की कोई गारंटी नहीं है। एक इन्वेस्टर को हमेशा अच्छे की आशा करने के साथ-साथ सबसे बुरे के लिए भी तैयार रहना चाहिए।
कोई भी अप्रत्याशित घटना शेयर मार्केट को प्रभावित कर सकती है। पेंडेमिक इसका सबसे बड़ा उदाहरण है।
लोन महंगे होते हैं, और आप अक्सर अपने इन्वेस्टमेंट पर कमाए लाभ से ज्यादा उस लोन का इंटरेस्ट भरते हैं। यह सरल गणित है: यदि मैं 10% इंटरेस्ट पर एक लोन लेती हूं लेकिन मैं अपने इन्वेस्टमेंट पर 8% कमा रही हूं, तो वास्तव में मेरा नुकसान हो रहा है।
कुछ जरुरी टर्म्स जो हमें पता होनी चाहिए:
कैपिटल: वह शुरूआती रकम जो आप कोई व्यवसाय या इन्वेस्ट,आदि करने के लिए उपयोग करते हैं ताकि आप उस पर ब्याज कमा सकें।
ब्रोकर हाउस: इन आर्गेनाईजेशंस के पास स्टॉक खरीदने या बेचने का लाइसेंस होता है। वे बिचौलिए की तरह काम करते हैं और लेनदेन में आपकी सहायता करते हैं। वे आपको फाइनेंशियल सलाह भी प्रदान करते हैं। भारत में प्रमुख ब्रोकर हाउसों के उदाहरण हैं – एंजेल सिक्योरिटीज, शेयर खान, आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज, एचडीएफसी सिक्योरिटीज और कोटक सिक्योरिटीज।
लिक्विडिटी: किसी भी समय, नाममात्र ट्रांसेक्शन फी के साथ, अपने स्टॉक/एसेट को मार्केट में बेचकर अपने सेविंग्स अकाउंट में वह राशि वापस पाने की क्षमता को उस एसेट की लिक्विडिटी कहते हैं।
शेयर: शेयर और स्टॉक एक ही चीज़ हैं। यह किसी कंपनी में ओनरशिप(स्वामित्व) का एक हिस्सा है। मान लीजिए, यदि मेरे पास Apple कंपनी के स्टॉक हैं, तो मैं Apple की शेयरहोल्डर हूं।
बांड: जब आप कोई बांड खरीदते हैं, तो आप बांड जारी करने वाले को (यह सरकार या कोई कंपनी हो सकती है) अपना पैसा उधार दे रहे हैं, जो आपको एक निश्चित समय में उस पैसे पर ब्याज देते हैं। एक बांड को फिक्स्ड इनकम इन्वेस्टमेंट के रूप में जाना जाता है, क्योंकि बांड के खरीदार के रूप में आपको उसका निश्चित ब्याज वापस मिलता है।
उदाहरण के लिए, आप चार साल की अवधि के लिए 6% ब्याज के साथ 10,000 रुपये के बांड में इन्वेस्ट करते हैं। तो आपको ब्याज के रूप में हर साल 600 रुपये मिलेंगे।

