मिलिए कोलकाता की पहली अंतिम संस्कार कराने वाली महिला से
हर सुबह ऑफिस पहुँचते ही, श्रुति रेड्डी सेठी की प्रतीक्षा में एक-न-एक शव अवश्य होता है
आज निपटाए जाने वाले उसके कार्य हैं- चार मृत्यु प्रमाण पत्र प्राप्त करना, एक लाश को कोलकाता हवाई अड्डे से मुर्शिदाबाद के लिए भेजना, फिर अपनी कंपनी के प्रचार के लिए स्थानीय अस्पताल के साथ अनुबंध को अंतिम रूप देना। मृत्यु ही उसके व्यवसाय अंत्येष्टि, ‘टेलर मेड सर्विस’ के लिए एकमात्र मुनाफ़ेवाला धन का स्रोत है।
2016 तक श्रुति का कॉरपोरेट सेक्टर का काम सिक्योर होते हुए भी उतना ही उबाऊ था, जितना कि किसी कॉकटेल बार में रम और कोक ऑर्डर करना हो सकता है। वह बताती हैं, “तभी मेरे पति का कोलकाता तबादला होने पर हम यहां चले आए और मैंने कुछ नया करने के बारे में सोचा।”
कोलकाता में उस समय हर ओर जीर्ण-शीर्ण इमारतें जिनमें अधिकतर बुजुर्ग बसे हुए थे, और उनके बीच में से गुजरती हुई पीली एम्बेसेडर गाड़ियाँ ही दिखाई देती थीं। उनका वर्णन मेरे बचपन के दिनों से मेल खाता है, जब गर्मी की छुट्टियां अम्मा के अहाते में इधर-उधर भागते-दौड़ते बिताई जाती थीं। फर्क सिर्फ यह है, कि श्रुति के इरादें ठीक नहीं है। वह बताती हैं, “कोलकाता में अधिकतर लोग काम के लिए अपना शहर और बूढ़े माता-पिता को छोड़कर कहीं और जा बसें हैं। यहां पर रिटायर्ड लोगों की एक बड़ी संख्या है। अगर दुनिया में विवाह और जन्म-दिन प्लान करने वाली संस्थाएं हो सकती हैं, तो फिर अंतिम-संस्कार करने वाली संस्था क्यों नहीं?”
एक ऐसे परिवार के लिए, जिसके अधिकांश सदस्य सरकारी कर्मचारी हों, सेठी का निर्णय एकदम पागलपन भरा था। ख़ुद उनकी मां यह जानना चाहती थीं, कि कैसे एक उच्च शिक्षित इंजीनियर फ्यूनरल-प्लानर बनने के बारे में सोच भी सकती है? मित्र पीठ पीछे उसका मजाक उड़ा रहे थे। नकारात्मक विचारो की तो बाढ़ सी आ गई थी। जिन अस्पतालों से उसने अपनी फ्यूनरल सर्विसेस ‘अंत्येष्टि’ का प्रचार करने के लिए संपर्क किया, वह तो आग-बबूला होने लगे, “हम यहां जीवन बचाने के लिए काम कर रहे हैं, आप यहां मृतकों के लिए सेवा का प्रचार नहीं कर सकतीं।”
और-तो-और, कभी भूले-भटके कोई कॉल आ भी जाती, तो वह अधिकतर ऐसे टूटे दिल वाले प्रेमी की निकलती, जो ‘अंत्येष्टि’ को एक सुसाइड-प्रीवेंशन हेल्पलाइन समझ कर कॉल कर रहा होता था। सेठी कहती हैं, “हम उन्हें यह कैसे समझाएं, कि मृत्यु हो जाने के उपरांत ही हम उनके काम आ सकते थे, हम उन्हें उस मृत्यु से बचा नहीं सकते थे।”
विश्वास का अभाव किसी भी नये-नये उद्द्यमि के साहस को तोड़ सकता था, लेकिन सेठी ने यह नोटिस किया कि जस्ट-डायल पर ‘फ्यूनरल-प्लानर’ के लिये बहुत सारी रिक्वेस्ट आती हैं। बस यही से उन्हें अपना पहला काम मिला। फ्यूनरल सर्विस की प्रक्रिया पूरी होने के बाद फ्रीज़र बॉक्स को कीटाणु-रहित करना और धोना भी आवश्यक था। बस फिर क्या था, सेठी ने अपनी आस्तीनें चढ़ाई और डेटॉल, किचन स्क्रबर और मिस्टर- मसल लेकर, अपने काम पर जुट गई।
श्रुति ने बताया कि जैसे-जैसे शवों की संख्या बढ़ने लगी, उनके मूल निवासी भी बिन बुलाए, उसके ऑफिस में आने लगे। अदृश्य पैरों की पद-चाप, अचानक उठने वाला भीषण शोर, और बिना खुले ही सुनाई देने वाली दरवाजों की चरमराहट- हर वक्त जैसे किसी भयावह फिल्म का साउंडट्रेक चल रहा हो। आखिर एक रात, सेठी ने उन आत्माओं का सामना करने का फैसला किया। उसने उनसे प्रार्थना की, “हम जो भी कर रहे हैं, वह आपकी भलाई के लिए कर रहे हैं, कृपया हमें परेशान ना करें।” तब से वह सब कुछ शांत हो गया।
2018 में, श्रुति सेठी ने ‘नेशनल एंटरप्रेन्योरशिप अवॉर्ड’ जीता और राजकीय मान्यता प्राप्त की। अब ‘अंत्येष्टि’ को अपने राज्य के अलावा, अन्य राज्यों से भी ढेरों की संख्या में निवेदन प्राप्त होने लगे। और यह आंकड़ा अब मुट्ठी-भर से बढ़कर, करीब 100 से ऊपर, प्रतिदिन हो गया। अपनी पसंद के अनुसार सर्विस, और प्री-बुकिंग की सुविधा ने उसकी लोकप्रियता को बढ़ाने का काम किया। ₹7,000 से ₹20,000 रेंज के पैकेज में आप अपनी पसंद का वाहन, मनपसंद पंडित, अपनी इच्छानुसार मोगरा अथवा गुलाब के फूलों की सजावट भी चुन सकते हैं। यहां तक कि अंतिम-संस्कार के समय बजने वाले संगीत का भी चुनाव कर सकते हैं।
इस प्रकार की सेवाओं का अब अस्पतालों द्वारा खुले हाथों से स्वागत किया जा रहा है। मुर्दा-घरों ने उन्हें अपनी स्पीड-डायल सर्विस पर रखा है। सेठी – कोलकाता की पहली अंतिम-संस्कार महिला – अब अपनी कंपनी के बढ़ते मुनाफे से प्रसन्न हैं। सौभाग्य-वश, यद्यपि विज्ञान ने आयु-सीमा को बढ़ा अवश्य दिया है, किंतु वह अभी तक अमरता का गुप्त-मंत्र नहीं प्राप्त कर सका है। जैसा कि अम्मा हमेशा कहती थीं, कि आखिरकार मृत्यु ही जीवन में एक अवश्यंभावी चीज़ है, तो इसके लिए भी सदैव तैयार रहना चाहिए।
