"यदि आपका वजन ज़्यादा है, तो क्या आप ब्राइडल लहंगा पहनने के लायक नहीं है?"
वज़न बढ़ना, मुंहासे, मूड स्विंग्स – मेरी शादी के लिए मेरा पीसीओएस नहीं थमने वाला
बढ़ती उम्र में, मुझे हमेशा ऐसे पहचाना जाता था – वह लड़की जिसके चेहरे पर बहुत सारे मुहांसे हैं। घर पर, हमें पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओएस) या हार्मोनल असंतुलन के बारे में कुछ ख़ास जानकारी नहीं थी। इसलिए मेरे पेरेंट्स, मेरा भला सोचते हुए, मुझे नए-नए फेस मास्क और क्रीम लाकर देते थे जो उन्हें लगता था कि शायद मेरे मुहांसों में मददगार साबित हो सकते हैं। लेकिन कुछ नहीं हुआ। मैंने सालों डर्मेटोलॉजिस्ट के क्लीनिकों के चक्कर लगाए, फिर आखिरकार एक ने मुझे पीसीओएस का टेस्ट करवाने की सलाह दी। उस समय मैं 21 साल की थी, और मानसिक रूप से पीसीओएस के लिए तैयार नहीं थी, लेकिन मैंने टेस्ट करवा लिया।
लक्षण तो हमेशा से ही थे: अनियमित पीरियड्स, मुहांसों का निरंतर बने रहना, और बिना किसी कारण के बढ़ता वज़न। लेकिन एक दशक पहले, पीसीओएस पर इतनी चर्चा नहीं होती थी। टेस्ट से उचित कारण तो पता चल गया लेकिन साथ ही दवाओं की बाढ़ आ गई। इतनी कम उम्र में, हर दिन मुट्ठी भर गोलियां खा-खाकर मुझे ऐसा लगने लगा कि मेरे साथ कुछ बहुत बड़ी गड़बड़ है। मानो मेरा शरीर मुझे धोखा दे रहा है। मेरा वज़न 20 किलो बढ़ गया, और इसके साथ ही मेरा आत्म-सम्मान भी डगमगा गया।
हार्मोनल उथल-पुथल के कारण मेरे मूड में बहुत उतार-चढ़ाव होने लगे, और फिर मुझे पता चला कि मैं एंग्जायटी और क्लिनिकल डिप्रेशन के दौर से भी गुज़र रही हूं। बीस साल की उम्र में, जब मैं दुनिया में अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रही थी, तो अचानक यह ज्ञात होना कि मुझे एक जटिल बीमारी ने जकड़ लिया है, मेरे ऊपर बहुत भारी पड़ रहा था। मैं बहुत अकेलापन महसूस करने लगी थी।
दो साल तक दवाओं पर निर्भर रहने के बाद, मैं पूरी तरह थक चुकी थी। दवाओं की वजह से मेरा वज़न बढ़ता जा रहा था और साथ ही मुझे बहुत मूड स्विंग भी होने लगे थे। आखिरकार, मैंने दवाएं लेना बंद कर दिया और पीसीओएस को नियंत्रित करने के लिए अपने लाइफस्टाइल में छोटे-छोटे बदलाव करने शुरू कर दिए – शक्कर में कटौती, सोच-समझकर खाना, फिज़िकल एक्टिविटी बढ़ाना और खाने की मात्रा पर नियंत्रण रखना। एक अच्छी न्यूट्रिशनिस्ट की सलाह के साथ खुद पर काम करने से काफ़ी मदद मिली। लोग मुझे वो सब कुछ छोड़ने की सलाह देते थे जो मेरे अंदर के पंजाबी को सबसे ज़्यादा पसंद था, लेकिन इन्होंने मुझे अल्टीमेटम देने के बजाय ऑप्शन दिए।

लेकिन मुहांसों से मेरी जंग अभी भी जारी है। मैं पांच साल से कंटेंट क्रिएटर हूं, और एक बार, जब मैं एक इवेंट होस्ट कर रही थी, तो किसी ने मेरी त्वचा पर कमेंट किया कि यह कितनी खराब लग रही है। मैं बाद में कार में जाकर फूट-फूट कर रोई। लेकिन उसी दिन मैंने यह संकल्प भी लिया कि अब और नहीं छिपूंगी; मैंने तय किया कि मैं अपनी स्किन – अपनी सच्चाई – को इंस्टाग्राम फ़िल्टर से धुंधला नहीं करूंगी। मैं समझ चुकी थी कि अगर मुझे पीसीओएस के साथ जीना है, तो मुझे अपने शरीर को हर हाल में प्यार करना होगा, हर उस चीज़ को अपनाना होगा जो यह मुझे देता है, जैसे काम करने की ताकत ताकि मैं आर्थिक रूप से स्वतंत्र बनूं, और जीवन के छोटे-छोटे पलों का आनंद ले सकूं। अब मैं अपने कंटेंट प्लेटफ़ॉर्म के जरिये स्किन पॉज़िटिविटी, पीसीओएस और वो सारी वास्तविकताएं – जिन्हें हम में से कई लोग अक्सर छिपाते हैं – के बारे में बात करती हूं और जागरुकता बढ़ाने का प्रयास करती हूं। क्योंकि मुझे पता है कि इसे दबाने और अनदेखा करने से कैसा महसूस होता है। मेरा मानना है कि अपने अनुभवों को शेयर करने से पीसीओएस से पीड़ित अन्य महिलाओं को जानकारी मिलेगी, वे खुद को अकेला नहीं समझेंगी और उन्हें इसका सामना करने की प्रेरणा मिलेगी।
आज, पांच साल बाद, 28 साल की उम्र में, मैं पहले से कहीं ज़्यादा स्वस्थ, आश्वस्त और स्थिर महसूस करती हूं। और अब मैं अपने जीवन के अगले पड़ाव की कगार पर हूं: शादी। मार्च 2025 में, मेरी सगाई मेरे सबसे अच्छे दोस्त राहुल से हुई, और हम इसी अक्टूबर में शादी कर रहे हैं।
लेकिन हर पीसीओएस से पीड़ित महिला आपको यही बताएगी, कि शादी होने से यह तकलीफ जादुई रूप से गायब नहीं हो जाती। बल्कि, हो सकता है कि यह स्थिति को और भी जटिल बना दे।
सेलिब्रेशन के समय में थकान
पीसीओएस सिर्फ़ आपके दर्दनाक पीरियड्स और ओवेरियन सिस्ट तक ही सीमित नहीं है। यह आपके हार्मोन, एनर्जी लेवल और आपके मूड को भी प्रभावित करता है। और पीसीओएस के साथ शादी की प्लानिंग करना? यह एक इमोशनल मैराथन है। सारी दुनिया उम्मीद करती है कि दुल्हन अपनी शादी में दमकती रहे, वह हर समय उत्साहित और आनंदित दिखनी चाहिए। वे कहते हैं ना, “यह आपके जीवन का सबसे अच्छा समय होता है।”
लेकिन कई दिन ऐसे होते हैं, जब मैं अपने बिस्तर से उठ भी नहीं पाती। शादी की धूमधाम और चहल-पहल के साथ इस मानसिक और शारीरिक थकान का सांमजस्य बिठाना हमेशा आसान नहीं होता। मैं सिर्फ़ टाइमलाइन और डेकॉर ही नहीं, बल्कि अपनी एनर्जी, अपनी एंग्जायटी और अपने दर्द को भी संभाल रही होती हूं। मैंने बिना किसी अपराधबोध के अपने शरीर को आराम देना सीख लिया है – जब तकलीफ़ बढ़ जाती है तो कार्यक्रम में बदलाव कर लेती हूं, जब भावविभोर हो जाती हूं तो कुछ समय के लिए थम जाती हूं। और उन दिनों खुलकर जश्न मनाती हूं जब मैं पूरी तरह से तंदरुस्त महसूस कर रही होती हूं।
कुछ दिन ऐसे भी होते हैं जब मैं शादी के फंक्शनों के लिए जगह ढूंढना या लहंगे ट्राई करने का प्लान बदल देती हूं। और फिर कुछ दिन ऐसे होते हैं जब मैं फिर से बेहतर महसूस करती हूं और हफ़्ते भर की प्लानिंग को 24 घंटों में निपटा लेती हूं। पीसीओएस ब्राइड्स टाइम मैनेजमेंट मात्र सीखतीं नहीं हैं; हम इसमें महारत हासिल कर लेतीं हैं, अपनी फेवरेट कॉफ़ी और दृढ़ निश्चय के बलबूते पर।

ब्राइडल कपड़ों से जुड़ी लोगों की धारणाएं
मैंने बड़ी मेहनत से खुद को एक ऐसी औरत में बदला है जो अपनी बॉडी से बहुत प्यार करती है। लेकिन जब सगाई का लहंगा खरीदने का समय आया, तो दुनिया मेरे इस बदलाव को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं थी।
मैं बहुत उत्साहित थी—ये मेरा पहला फंक्शन था, पहली ऑउटफिट थी, दुल्हन बनने का ये मेरा पहला ख़ास पल था। लेकिन शॉपिंग के अनुभव ने मेरे पूरे उत्साह पर पानी फेर दिया। मैं जिन भी दुकानों में गई, उनमें से ज़्यादातर दुकानदार मेरे साइज़ के कपड़े रखते ही नहीं थे। जैसे तो वह तय कर चुके हों कि जो औरतें स्टैंडर्ड साइज़ चार्ट से बाहर हैं, उनकी शादी नहीं होगी। और तो और, वे मेरे साथ ऐसा व्यवहार कर रहे थे जैसे मैं गलत जगह पर आ गई हूं। ऐसा लग रहा था जैसे उन्हें मेरे लिए मेहनत करने में कोई दिलचस्पी नहीं थी। अगर उनकी दुकान में मेरे साइज़ के लहंगे नहीं थे, तो वे कोई अन्य उपाय भी तो बता सकते थे। उनकी उपेक्षा में, वहां के माहौल में, आप उनकी आलोचना महसूस कर सकते थे। ये एक मायूस कर देने वाला अनुभव था।
काफी हाथ-पैर मारने के बाद मुझे एक जाने-माने ब्रांड का मनचाहा लहंगा मिल गया, और उन्होंने आश्वासन दिया कि वे उसे बना सकते हैं, मेरी ख़ुशी का कोई ठिकाना नहीं था। हमने इवेंट का डेकॉर भी उसी के हिसाब से प्लान कर लिया था। लेकिन इवेंट से ठीक 25 दिन पहले, उन्होंने यह कहकर मना कर दिया कि वे मेरे साइज़ का लहंगा समय पर नहीं बना पाएंगे। मैं दंग रह गई। अचानक मेरा साइज़ कैसे समस्या बन गया?
मैंने अपना अनुभव इंस्टाग्राम पर शेयर किया (बिना ब्रांड का नाम लिए), और लोगों की प्रतिक्रिया ज़बरदस्त थी। कई महिलाओं ने लिखा कि वे भी कुछ ऐसा ही अनुभव कर चुकी हैं। तभी मुझे एहसास हुआ: यह सिर्फ़ मेरी कहानी नहीं है। ब्राइडल फ़ैशन की दुनिया ‘इन्क्लूसिविटी’ का दावा तो करती है, लेकिन उस पर शायद ही अमल करती है। मुझे मिले सपोर्ट को देखकर उस ब्रांड ने मुझसे संपर्क किया और मेरा लहंगा बनाने की दोबारा पेशकश की, लेकिन मैंने कहा कि अब मुझे उनसे कुछ नहीं चाहिए। उनके साथ मेरा अनुभव तब ही बर्बाद हो गया था जब उन्होंने मुझे अदृश्य और अयोग्य महसूस कराया।
शुक्र है, कि मेरी दोस्त और जानी-मानी मेकअप आर्टिस्ट काजोल आर. पासवान ने मुझे डिज़ाइनर जिगर और निकिता से मिलवाया। उन्होंने सिर्फ़ एक हफ़्ते में, मेरे और मेरे मंगेतर के लिए, बिना किसी झंझट और पूरी सहानुभूति के साथ खूबसूरत, ख़ास तौर पर डिज़ाइन किए हुए कपड़े तैयार किए। हर दुल्हन को इसी तरह का ट्रीटमेंट मिलना चाहिए।
स्किन से अपेक्षा vs. हार्मोन का सच
एक अनकहा नियम है: दुल्हनों की त्वचा बेदाग होनी चाहिए। ड्युई, ग्लोइंग, कैमरे के लिए तैयार। लेकिन अगर आपको पीसीओएस है, तो आपकी स्किन के अपने प्लान होते हैं। मुहांसे अचानक से कभी भी निकल जाते हैं। आपकी पीरियड साईकल आपकी स्किन की बनावट को प्रभावित करती है। जो इस महीने काम करेगा, वह शायद अगले महीने आपकी त्वचा को तकलीफ दे सकता है। हालांकि मैंने अपनी त्वचा के दाग अपना लिए हैं, लेकिन मैं जी-जान से इन मुहांसों को उभरने से रोकना चाहती हूं। और इसका मतलब है कि अब नए प्रोडक्ट्स के साथ एक्सपेरिमेंट नहीं करना है, मैं अपने स्किन केयर रूटीन पर ही टिकी रहूंगी।
सबसे बड़ी मुश्किल है एक ऐसा मेकअप आर्टिस्ट ढूंढना जो एक्ने-प्रोन/मुहांसो वाली त्वचा की समझ रखता हो। कुछ प्रोडक्ट्स की वजह से स्किन पर ब्रेकआउट बढ़ सकते हैं। और सच कहूं तो, मैं नहीं चाहती कि अपने शादी के लुक के लिए मैं अपनी त्वचा की सेहत के साथ कोई समझौता करूं।
इसलिए, मैंने सगाई के लिए अपना मेकअप खुद किया और बाकी के फंक्शनों के लिए भी मेरा यही प्लान है। इसलिए नहीं कि मैं एक परफेक्शनिस्ट हूं, बल्कि इसलिए कि मुझे खुद पर भरोसा है कि मैं अपनी त्वचा को जितना अच्छे से जानती हूं, उतना कोई नहीं जानता, और मैं उसे जितनी कोमलता से हैंडल करूंगी, और कोई नहीं करेगा।
सेंसिटिव या एक्ने-प्रोन स्किन वाली ब्राइड्स के लिए मेरी सलाह यह है कि मेरी तरह आप भी इन दो नियमों का पालन कर सकते हैं: जो भी करें, अपनी त्वचा की ज़रूरतों को ध्यान में रखते हुए, उसके अनुसार करें। शादी से पहले के दिनों में कुछ भी नया ट्राई न करें; त्वचा पर कठोर ट्रीटमेंट्स करवाने की बजाय उसके हाइड्रेशन पर ध्यान दें। और हमेशा ऐसा मेकअप आर्टिस्ट चुनें जो अपने प्रचार से ज़्यादा हाइजीन को महत्व देता हो; गंदे ब्रश या एक्सपायर हो चुके प्रोडक्ट्स, इवेंट के बाद, आपकी त्वचा को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
अब मैंने फेस पर जरूरत से ज़्यादा पाउडर लगाने के बजाय हल्का कंसीलर और हाइड्रेटिंग सेटिंग स्प्रे का इस्तेमाल करना सीख लिया है। मेरी सगाई का लुक बहुत सॉफ्ट था: स्मोकी आइज़, ढेर सारा ब्लश, ड्युई फ़िनिश। यह पूरे दिन टिका रहा, और सबसे ज़रूरी बात, मैं जैसी हूं वैसा ही महसूस कर रही थी।

प्यार जो हर परिस्थिति में आपकी ढाल बन सके
जिंदगी की इस उथल-पुथल के बीच, मुझे खुशी है कि मेरे पास अपना एक चीयर लीडर है: राहुल, मेरा मंगेतर जो हमेशा मुझे प्रोत्साहित और सपोर्ट करता है। हम कॉलेज में दोस्त थे और पैंडेमिक के दौरान हमारी दोस्ती एक गहरे रिश्ते में बदल गई। हमारे बैकग्राउंड बहुत अलग होने के बावजूद (वह तेलुगु है और मैं सिख), हमारी मूल मान्यताएं एक जैसी हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात तो यह है कि हम दोनों अपनी दोस्ती को बहुत महत्व देते हैं, और मानते हैं कि किसी भी रिश्ते को बनाए रखने के लिए यह बेहद ज़रूरी है।
हम एक-दूसरे को जितना अच्छे से जानते और समझते हैं, उतना और कोई नहीं जानता। वह एक बहुत ही समझदार पार्टनर है—वह हमेशा से मेरे नज़रिए को समझता था और मेरी ज़रूरतों का ध्यान रखता था। पीसीओएस के कारण मेरे अप्रत्याशित व्यवहार को हैंडल करने में उसका सहयोग विशेष रूप से सराहनीय रहा है। वह चुपचाप, सरल हाव-भाव के जरिए अपना सपोर्ट जाहिर करता है, जैसे यदि मैं पीएमएस के कारण तकलीफ में हूं, तो वह मेरे लिए बिस्तर पर नाश्ता ले आता है। अचानक उत्पन्न मेरे मूड स्विंग्स या शादी की तैयारियों को टालने की मेरी मजबूरी को वह समझता है और धैर्य रखता है। कई बार तो मैं उसे एकदम से समझा भी नहीं पाती, क्योंकि जब आपके पीरियड्स अनियमित होते हैं, तो आपके खुद के लिए यह समझना मुश्किल होता है कि आप आखिर चाहते क्या हैं। और कई बार जब यह सब उसके लिए कठिन हो जाता है, तब भी मैं देख सकती हूं कि वह प्रयत्न करना कभी नहीं छोड़ता।
हर दुल्हन इस बात की हकदार है, कि वह जैसी भी है, उसे वैसे ही अपनाया और प्यार किया जाए। पीसीओएस मेरा एक हिस्सा है, लेकिन यह मुझे परिभाषित नहीं करता। और जैसे-जैसे मैं जीवन के इस नए अध्याय में कदम रखने की तैयारी कर रही हूं – हार्मोन असंतुलन, मुहांसे, लहंगे और प्यार के साथ – मैं उस ताकत को, जो मुझे वर्षों से खुद की देखभाल करके और खुद को हमेशा दूसरों से आगे रखने के प्रयास के दौरान हासिल हुई है, उसे भी अपने साथ लेकर जाउंगी।
आकांक्षा नारंग को दिए विवरण के अनुसार
प्रबलीन कौर भूमरा एक कंटेंट क्रिएटर हैं जो पीसीओएस, बॉडी पॉजिटिविटी और स्किन पॉज़िटिविटी पर बातचीत शुरू करती हैं और उन्हें आगे बढ़ाती हैं।

