5 लाइफ़-सेविंग मेडिकल टेस्ट जो हर महिला को कराने ही चाहिए
किसी अजनबी का आपके वजाइना के साथ छेड़छाड़ करने का एक दूसरा पहलू भी है
कुछ महिलाओं के लिए गायनोकोलॉजिस्ट के पास जाने का ख़याल मात्र ही, उनकी हिम्मत तोड़ देने के लिए काफी होता है। और यदि आप उन लोगों में से हैं, जो खुद अपने रूटीन मेडिकल टेस्ट कराना चाहती हैं, तो अपने आपको परिवार के महत्वपूर्ण लोगों के साथ –सब कुछ ठीक तो है ना ?- जैसे कई प्रश्नों के जवाब देने के लिए तैयार कर लें।
और यदि किसी तरह आपने अपॉइंटमेंट ले भी लिया, तो उस अजनबी डॉक्टर के साथ अपनी ‘महिलाओं वाली समस्या’ के बारे में बात करना उतना ही असहज होता है, जितना कि अपने पैरेंट्स से ‘वो बातें’ करना। हम कैसे भूल सकते हैं – हमारे देश में आज भी लोग टीवी पर कन्डोम का एड आते ही चैनल बदल देते हैं।
लेकिन ध्यान रखिए, यह रेग्युलर मेडिकल टेस्ट आपकी ज़िन्दगी बचा सकते हैं। अपोलो स्पैक्ट्रा हॉस्पिटल की गायनोकोलॉजिस्ट और ऑब्स्टेट्रीशियन, डॉ मिलोनी गडोया का मानना है, “बीमारियों की सही समय पर रोक-थाम करना, एक लम्बी उम्र पाने का महामंत्र है। प्यूबर्टी से लेकर मेनोपॉज़ तक, एक औरत के शरीर में बहुत से फिज़िकल और हॉर्मोनल बदलाव आते हैं, और इन मेडिकल टेस्ट की मदद से बहुत सारी गायनोकोलॉजिकल तकलीफों से समय रहते बचाव हो सकता है।”
तो जहां हर महिला को फिट रहने के लिए एक्सरसाइज़ और तनाव दूर करने के लिए मेडिटेशन करने का समय निकालना चाहिए, अपनी डाइट सही रखनी चाहिए (#टीम एवोकाडो), वहीं एक सुरक्षित जीवन के लिए, समय पर रूटीन मेडिकल टेस्ट करवाना एक बहुत अच्छी आदत है।

अट्ठारह साल की उम्र से ही, या फिर इससे पहले भी यदि आप सेक्शुअली ऐक्टिव हैं, साल में एक बार गायनोकोलॉजिस्ट के पास ज़रूर जाएं। हां, पहली बार ये अजीब लग सकता है, लेकिन उसके दरवाज़े से बाहर आने के चंद मिनट बाद ही आपको इस एहसास से छुटकारा मिल जाएगा।
डॉ सुरभि सिद्धार्थ, मदरहुड हॉस्पिटल की कंसल्टेंट ऑब्स्टेट्रीशियन और गायनोकोलॉजिस्ट का कहना है, “कुछ बीमारियां जो महिलाओं में आम होती हैं, जैसे – सर्वाइकल कैंसर और ब्रेस्ट कैंसर, बहुत बाद की स्टेज पर पकड़ में आती हैं क्योंकि हम बहुत सी बातों पर ध्यान ही नहीं देते।”
पीसीओएस (पॉलिसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम), फ़ाइब्रॉइड्स, ब्रेस्ट डिस्ऑर्डर और रिप्रोडक्टिव ट्रैक्ट से जुड़ी एब्नॉर्मलटी जैसी कई समस्याओं के बारे में गायनोकोलॉजिस्ट से बातचीत करना भी बहुत महत्वपूर्ण है।
इनके बारे में अनुमान लगाना कोई बहुत मुश्किल काम नहीं है, इसलिए यहां हम उन स्टैंडर्ड मेडिकल टेस्ट की लिस्ट दे रहे हैं, जो हर महिला को कराने ही चाहिए और ये भी बता रहे हैं कि इन्हें कितने समय के बाद कराते रहना चाहिए।
आपकी महत्वपूर्ण कार्यों की लिस्ट में ये रूटीन मेडिकल टेस्ट अवश्य शामिल होने चाहिए

क्या: पैप स्मीयर
आपको यह कब कराना चाहिए: 21 वर्ष की उम्र के बाद
कब दोहराएं: केवल पैप टेस्ट कराना हो तो हर तीसरे साल, और अगर पैप स्मीयर और एचपीवी टेस्ट दोनों एक साथ कराने हों तो हर पांचवें साल।
यह कैसे किया जाता है: आपको टेबल पर लिटाया जाएगा और डॉक्टर आपको पैर चौड़े रखने को कहेंगी। वे आपके वजाइना में एक मेटल या प्लास्टिक का टूल (स्पेक्युलम) डालेंगी, ताकि आपकी वजाइनल वॉल को चौड़ा किया जा सके और वे सर्विक्स को देख सकें। यहां से वे सर्विक्स के सेल्स का स्वाब (नमूना) लेंगे।
इसे कराना इतना ज़रूरी क्यों है: इस टेस्ट में यह देखा जाता है कि कहीं सर्विक्स (गर्भाशय का मुंह) के सेल्स में कोई असामान्य या कैंसर से पहले वाले बदलाव तो नहीं आ रहे हैं। जब कोई महिला सेक्शुअली ऐक्टिव हो जाती है तो उसे हर तीसरे साल में पैप स्मीयर टेस्ट करवाना चाहिए, ताकि सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम समय रहते की जा सके।
क्या: एचपीवी टेस्ट
आपको यह कब कराना चाहिए: 30 वर्ष की उम्र के बाद
कब दोहराएं: केवल एचपीवी टेस्ट कराना हो तो हर तीसरे साल, और अगर पैप स्मीयर और एचपीवी टेस्ट दोनों एक साथ कराने हों तो हर पांचवें साल।
यह कैसे किया जाता है: बिल्कुल पैप टेस्ट की तरह।
इसे कराना इतना ज़रूरी क्यों है: एचपीवी टेस्ट उन ख़तरनाक एचपीवी (ह्यूमन पैपिलोमावायरस) का पता लगाता है, जो अक्सर सर्वाइकल कैंसर में पाया जाता है। वर्ष 2018 से, आप प्राइमरी सर्वाइकल कैंसर स्क्रीनिंग के लिए भी एचपीवी टेस्ट करा सकते हैं (यानि कि इसे पैप टेस्ट के बिना भी कराया जा सकता है)।

क्या: मैमोग्राम
आपको यह कब कराना चाहिए: 50 वर्ष की उम्र के बाद
कब दोहराएं: 50 से 54 वर्ष की उम्र में हर साल और 55 वर्ष की उम्र के बाद दो साल में एक बार। फ़ैमिली हिस्ट्री और दूसरे कारणों को ध्यान में रखते हुए, डॉक्टर किसी भी उम्र की महिला को यह टेस्ट कराने के लिए कह सकते हैं।
यह कैसे किया जाता है: आपको एक सुरक्षित, कम तीव्रता वाली एक्स-रे मशीन के सामने खड़ा किया जाता है। टेक्निशियन आपके ब्रेस्ट को एक प्लेट पर रखता है और दूसरी प्लेट ऊपर की ओर से आपके ब्रेस्ट को दबाती है। इनकी सहायता से आपके ब्रेस्ट को चपटा किया जाता है और उस स्थिति में स्थिर रख के एक्स-रे लिया जाता है। इसका साइड व्यू भी लिया जाता है। यही प्रक्रिया दूसरे ब्रेस्ट के साथ भी दोहराई जाती है।
इसे कराना इतना ज़रूरी क्यों है: हर साल गायनोकोलॉजिस्ट द्वारा ब्रेस्ट की जांच कराने से किसी भी तरह की एब्नॉर्मलिटी या गांठ आदि का पता चल जाता है। यदि कोई असामान्य सूजन है तो आगे जांच की जानी चाहिए। मैमोग्राम एकदम सही तो नहीं होते, लेकिन ब्रेस्ट कैंसर का पता लगाने के लिए फिलहाल यही सबसे अच्छा टूल है। यदि पहले से पकड़ में आ जाए, तो कैंसर को आगे बढ़ने से रोका जा सकता है।
क्या: एसटीडी टेस्ट
आपको यह कब कराना चाहिए: जैसे ही आप सेक्शुअली ऐक्टिव हों।
कब दोहराएं: उन महिलाओं को एसटीडी होने का ख़तरा ज़्यादा होता है, जिनके आए दिन नए या कई सेक्स पार्टनर होते हैं। ऐसी महिलाओं को गोनोरिया, जेनिटल हर्पीज़ और क्लैमाइडिया का टेस्ट हर साल कराना चाहिए। प्रेग्नेंट महिलाओं को प्रेग्नेंसी की शुरुआत में सिफलिस, एचआइवी और हेपैटाइटिस बी का टेस्ट कराना चाहिए।
यह कैसे किया जाता है: एसटीडी की जांच स्टेराइल (जीवाणुरहित) क्यू-टिप के साथ की जाती है, जिससे वजाइना से स्वाब लिया जाता है। सिफलिस और हेपैटाइटिस के लिए एक साधारण सा ब्लड टेस्ट करवाना होता है।
इसे कराना इतना ज़रूरी क्यों है: अक्सर, एसटीडी के कोई लक्षण दिखाई नहीं देते हैं या उन्हें समझना मुश्किल होता है। इनकी वजह से स्वास्थ्य से जुड़ी गंभीर समस्याएं और अन्य ख़तरनाक एसटीडीज़ भी हो सकती हैं, जैसे- एड्स। साथ ही, पहले से ही सावधानी बरतने से आप इसे और लोगों में फैलने से रोक सकती हैं।

क्या: एचआईवी टेस्ट
आपको यह कब कराना चाहिए: 18 से 64 वर्ष की उम्र के दौरान।
कब दोहराएं: कम से कम एक बार एचआईवी की जांच ज़रूर कराएं। वो लोग, जिन्हें इन्फ़ेक्शन का ज़्यादा ख़तरा होता है, उन्हें हर तीन से छह महीने में यह जांच करानी चाहिए।
यह कैसे किया जाता है: एक साधारण सा ब्लड टेस्ट करवाना होता है।
इसे कराना इतना ज़रूरी क्यों है: वर्ष 2017 में, 2.1 मिलियन एचआईवी पॉज़िटिव पॉप्युलेशन के साथ, भारत दुनिया में तीसरे स्थान पर था। यदि लोग इसकी जांच कराएंगे तो इसका फैलाव रुकेगा और सही समय पर इससे प्रभावित लोगों का इलाज हो सकेगा, जिससे उन्हें एड्स होने के ख़तरे से बचाया जा सकेगा।
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स्टाइलिंग: दिव्या गुरसाहनी, हेयर और मेकअप: मौसम गांधी, मॉडल: सुमाया हज़ारिका/एनिमा क्रिएटिव मैनेजमेंट
स्विमसूट, असोस

