आत्मा के परम आनंद के लिए ईसबगोल
वह सब जो आपके और आपके ‘पोस्ट पॉटी’ परमानंद के बीच दीवार बन कर खड़ा है
उस दिन के बाद तो मेरी जिंदगी ही बदल गई, वह मेरे लिए एक आसमान से उतरे किसी फ़रिश्ते से कम नहीं था। ईसबगोल का एक घूँट लेते ही, ऐसा लगा जैसे सालों से लदी हुई एक गलत धारणा का भार मेरे सिर से उतर गया। मेरी सारी बेचैनी और भारीपन, जिसे मैंने अपने शरीर का एक हिस्सा समझकर अपना लिया था, पल भर में गायब हो गए।
अब मेरा जीवन भी दो भागों में बंट गया है – मेरी ज़िन्दगी के ‘बेस्ट पॉटी’ वाले दिन से पहले वाले दिन, और बाकी सब उसके बाद, जिन्हें मैं ‘पोस्ट पॉटी’ वाले दिन का नाम दूँगी। वैसे तो मैं अब अपनी लाइफ में बहुत खुश हूँ, बस एक बात का गम है, यदि मैं इतनी अड़ियल न होती तो शायद यह ‘पोस्ट पॉटी’ परमानंद मैं कई सालों पहले प्राप्त कर सकती थी।
अब आप पूछेंगे कि आखिर इस प्रेम-कहानी का नायक कौन है? साइलियम हस्क, जिसे आमतौर पर ईसबगोल कहा जाता है। हाँ, मैं उसी चम्मच-भर सफ़ेद भूसी की बात कर रही हूँ, जिसे आप की नानी अपने खाने से पहले, अपनी लस्सी के गिलास में मिलाया करती थीं।

इस पिस्ता हरे और मटमैले सफ़ेद रंग के डिब्बे में पैक किये गए, जिस पर एक टेलीफ़ोन की तस्वीर बनी है, इस जादूई नुस्खे की हमारे दक्षिण एशियाई घरों में एक विशेष जगह है। मेरे पिता और उनके भाई-बहिन दावे के साथ अपने अनियमित-डाइजेशन, हाई-कोलेस्ट्रॉल, हाई शुगर लेवल और कॉन्स्टिपेशन से मुक्ति दिलाने में इसकी भूमिका की प्रशंसा करते नहीं थकते थे।
लेकिन इस भूसी को फाँकते समय उन लोगों के बिगड़ते हुए चेहरे देखकर, मैंने यह तय कर लिया था कि मैं इसे कभी नहीं आजमाऊंगी। अब कुछ सालों बाद, मैं खुद को उसी हालत में महसूस कर रही हूँ — भारीपन, ब्लोटिंग और कमजोर डाइजेशन। मेरी डोमिनोज़ पिज़्ज़ा की लत अब अंततः अपना असर दिखा रही थी। पूरे हफ्ते लगातार ओवरटाइम करते-करते, इतनी भी फ़ुर्सत नहीं थी कि गूगल पर ही किसी डॉक्टर को ढूंढ कर, अपनी अजीब स्थिति बता सकूं, और ढूंढ भी लेती तो उसे कहती क्या?
ऐसे में, मुझे ईसबगोल के अलावा कोई हल नहीं सूझ रहा था।
बचपन में, मैंने कई बार इस भूसी को पानी में फूलते और गिलास में एक लौंदे की तरह जमते हुए देखा था, और मन ही मन मुझे यह मेरे पेट में भी ऐसे ही जमी हुई दिखती थी। बस अब आगे जो होने वाला था, उसके लिए मैंने खुद को तैयार कर लिया।
पहली बार, जब मैंने एक चम्मच ईसबगोल को एक गिलास पानी में मिलाकर पिया, इसका स्वाद बिल्कुल एक भीगे हुए गत्ते की तरह था। अब सोचती हूँ तो लगता है, कि अगर उसमें थोड़ा-सा शहद मिला लिया होता तो शायद इसका स्वाद कुछ बेहतर हो जाता। एक सांस में इसे गटक लेने के बाद, मुझे नहीं लगा था कि मैं फिर कभी भी ऐसा कर पाऊँगी। विश्वास ही नहीं होता, मैं बिल्कुल ही गलत थी! करीब 45 मिनट बाद जब पेट खाली हुआ, तो ऐसा महसूस हुआ जैसे गोवा के किसी खूबसूरत बीच पर, चमकते इंद्रधनुष के नीचे, मैं अपने इस नए ‘बाथरूम-बडी’ के साथ कुलाँचे मार रही हूं।
जो लोग नहीं जानते, उन्हें बता दूँ कि साइलियम एक नेचुरल डाइटरी फाइबर है जो प्लैंटेगो ओवेटा (Plantago ovata) से मिलता है। सॉल्युबल और इनसॉल्युबल फाइबर का एक मुख्य स्रोत होने के कारण, यह बहुत सी आयुर्वेदिक डाइट और डिटॉक्स प्लान्स का मुख्य अंग रहा है। हिमाचल प्रदेश यूनिवर्सिटी के डिपार्टमेंट ऑफ केमिस्ट्री द्वारा की गई एक स्टडी ने पता लगाया कि साइलियम पानी को सोख कर हमारे शरीर में फूल जाता है,और इसके इसी गुण के कारण, यह डाइजेशन में मदद करता है और हाई-कोलेस्ट्रॉल, ट्राइग्लिसराइड्स, ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित करने में भी सहायता करता है।
होम डिलीवरी एप्स की सुविधा, बढ़ता फास्ट-फूड ट्रेंड, और साथ ही मेरी आधुनिक जीवन-शैली — सब मिलकर मेरे डाइजेशन को पूरी तरह से बर्बाद कर रहे थे। ईसबगोल, जिसे खाते ही उल्टी-जैसा मन करे, उसे अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी का हिस्सा बनाना, मेरे लिए निश्चय ही काफ़ी चुनौतीपूर्ण था, लेकिन अपने शरीर के भले के लिए लिया गया यह मेरा सबसे अच्छा निर्णय भी था।
अब ईसबगोल मेरी शहरी फ़ास्ट-फ़ूड डाइट का एक हिस्सा बन गया है। जैसे-जैसे हमारी डाइट में ‘जंक फ़ूड’ बढ़ रहा है और हमारी सब्ज़ियों में से न्यूट्रिशन कम होता जा रहा है, ईसबगोल जैसे सप्लीमेंट्स का चलन बढ़ने लगा है। डायटीशियन नमामि अग्रवाल, नमामि लाइफ की फाउंडर और सीइओ, का कहना है, “आजकल इन ओल्ड स्कूल तरीकों का उपयोग फिर से बढ़ गया है, क्योंकि यह बिना किसी साइड इफ़ेक्ट के स्वास्थ्य समस्याओं को ठीक करने के साथ-साथ चिकित्सकीय गुण भी रखते हैं।”

अगर ईसबगोल खाने के विचार से ही आपको घिन्न आती हो, जैसा मेरे साथ भी होता था, तो त्रिफला एक अच्छा विकल्प है। अग्रवाल कहती हैं, “त्रिफला भारत में पाए जाने वाले तीन औषधीय पौधे – अमलकी, विभीतकी और हरितकी का हर्बल मिश्रण है। प्राचीन काल से, आयुर्वेदिक दवाइयों में इसका उपयोग होता चला आ रहा है, जो पेट-संबंधी और डेंटल कैविटी जैसी तकलीफों का उपचार करती हैं। त्रिफला में काफी मात्रा में एंटीऑक्सिडेंट पाए जाते हैं, इसके एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण शरीर को डिटॉक्स करने में और इम्यून सिस्टम को बेहतर बनाने में मदद करते हैं।”
ईसबगोल के साथ हुए मेरे इस पहले अद्भुत अनुभव के बाद, मैंने कई बार अपने दोस्तों के सामने अपनी उत्साह से भरी भावनाएं व्यक्त करने की कोशिश की, लेकिन – किसी धार्मिक अनुभव की तरह – इस पर विश्वास करने के लिए इसे महसूस करना बहुत ज़रूरी है। सच कहूँ तो, शायद मेरे इस उत्साह को सही मायने में यदि कोई प्रतिबिंबित करता है तो वह हैं मेरे कुत्ते – जो अपना ‘काम’ निबटाने के बाद, पार्क में फ़ुर्ती के साथ दौड़ लगाते दिखते हैं। शायद हम लोगों को उनके इस इशारे को समझना चाहिए।




