बचत श्रृंखला: एक लाभदायक स्टार्ट-अप का निर्माण कैसे करें
रूबीज ऑर्गेनिक्स की संस्थापक रुबीना कराचीवाला ने अपनी ट्रिक्स का पिटारा खोला
सात साल की उम्र में ‘द जेटसन्स’ देखते-देखते, मैं भी एक ऐसे उड़ते हुए यन्त्र के सपने देखती थी, जो मेरे पसंदीदा बटर गार्लिक प्रॉन्स को मेरे खिड़की की चौखट पर छोड़ जाए। कुछ महीने पहले ही, एक हैडलाइन पढ़कर मेरी इस फैंटसी ने दोबारा दस्तक दी। लिखा था, “ज़ोमाटो ने सफलतापूर्वक अपनी पहली ड्रोन मील डिलीवरी टेस्ट की।” हम स्टार्ट-अप के युग में जी रहें हैं- सरकार के अनुसार जिसका मुख्यालय भारत में हो, जिसे शुरू हुए 10 साल से कम समय हुआ हो और जिसका वार्षिक टर्नओवर 100 करोड़ रूपये से कम हो। इस वजह से, अब एक आइडिया को बिज़नेस में बदलना पहले से काफी आसान हो गया है, और भारतीय बिज़नेसमैन भी पहले से कहीं ज्यादा इनोवेटिव हो गए हैं।
नैसकॉम (NASSCOM) के अनुसार, अकेले 2018 में, 1200 नई कंपनियां भारतीय मार्किट में आईं, जिससे मौजूदा संख्या बढ़कर 7200 तक पहुंच गयी है। पर स्टार्टअप को मुनाफ़े में बदलने का सीक्रेट, अपने संसाधनों को मैनेज करना है।
रुबीना कराचीवाला का संघर्ष यह था कि वह ऐसा मेकअप ढ़ूंढना चाहती थी, जो उनकी संवेदनशील त्वचा को क्षतिग्रस्त होने से बचाए। इसी से जन्म हुआ रूबीज ऑर्गेनिक्स का- भारत का पहला एथिकल मेकअप स्टार्ट-अप, जो केमिकल मेकअप की बजाय ऑर्गेनिक विकल्पों पर फोकस करता है। ये रेंज पैराबेन फ्री, शाकाहारी और पशुओं पर टेस्टिंग के खिलाफ है। फोर्ब्स की रिपोर्ट के अनुसार रूबीज ऑर्गेनिक्स हर महीने 10 से 15 फीसदी की दर से विकसित हो रहा है। अपने अनुभव के आधार पर, कराचीवाला नये उद्धमियों को आर्थिक चुनौतियों को सुलझाने का तरीका बताती हैं।

स्टार्ट-अप की अवधारणा बनाएं
अपने बिज़नेस को शुरू करने से पहले आप उसी फील्ड में किसी और के नीचे कम से कम दो साल काम करने का अनुभव लें। कराचीवाला कहती हैं, “इससे आपको पैसे से जुड़ी और रास्ते में आने वाली तमाम चुनौतियों को निपटने की समझ आयेगी, जो आपको किसी वेबसाइट, किताब और शिक्षक से नहीं मिल सकती।” अपने बिज़नेस को जल्द से जल्द शुरू करना चाहिये; लेकिन एक साथ ही सब कुछ नहीं लगाएं। प्रारंभिक चरण आपके बिज़नेस मॉडल के लिए एक ट्रायल रन है, इसलिए छोटे जोखिम उठाएं।
अपने बिज़नेस के हर पहलू को समझने के लिये समय लें ताकि आप बाद में खुद को किसी पहलू पर फंसा हुआ न पाएं – “मैंने वेबसाइट डिजाइन करना सीखा, हालांकि मुझे इसकी आवश्यकता नहीं थी। यह आपको सही प्रश्न पूछने और आपकी आवश्यकताओं को स्पष्ट रूप से बताने में मदद करता है।”
स्टार्ट-अप की शुरुआत करें
कराचीवाला सलाह देती हैं, कि शुरुआत में छोटे लक्ष्य निर्धारित करें, जो धीरे-धीरे आपको वांछित परिणाम प्राप्त करने में मदद करते हैं। इसके अलावा प्लान करते समय बजट में खर्चें को बढ़ा-चढ़ाकर लिखना भी प्रभावशाली तकनीक है- अनुमानित खर्चें को दोगुना जोड़ो। “इससे यह सुनिश्चित हो जायेगा कि इमरजेंसी के हालात में भी आपको फंड्स की कमी नहीं होगी।”
प्रोफेशनल से मदद लेने पर गलतियों के चांस कम हो जाते हैं। “जब मैंने ब्यूटी इंडस्ट्री में कदम रखने का सोचा, तो मैंने प्रोडेक्ट्स की बेहतरी के लिये रिसर्च और डेवलपमेंट कंपनी को रखा था। उन्होंने मुझे अपने उत्पादों की शेल्फ लाइफ को बेहतर बनाने और उपभोक्ता की जरूरतों को समझने में मदद की।”
बजट, प्लानिंग और शैड्यूलिंग के बीच, अगर आपको थोड़ी फुर्सत मिले, तो आप कराचीवाला की रीडिंग लिस्ट में से कुछ नये उद्यमियों के बारें में ज़रूर पढ़ें- ‘गय कावास्की’ की द आर्ट ऑफ द स्टार्ट, ‘स्टीफन जे डब्नर’ और ‘स्टीवन लेविट’ की थिंक लाइक ए फ्रीक, ‘एलिज़ाबेथ गिल्बर्ट’ की बिग मैजिक और ‘मालकोल्म ग्लेडवैल’ की आउटलियर्स ।

स्टार्ट-अप को संभालना
बिज़नेस में निवेश और पुर्ननिवेश के बीच संतुलन बनाये रखें, ताकि आपका स्टार्ट-अप सुचारू रूप से चलता रहे। कराचीवाला कहती हैं, “शुरूआत में आप कमाया पूरा पैसा वापस निवेश करेंगे।” इसके बावजूद खुद को अपनी कंपनी का कर्मचारी समझें। वह कहती हैं, “शुरूआत से ही खुद को सेलरी ज़रूर दें, चाहे वो सिर्फ 5000 रूपये ही क्यों न हो। इससे आपको पता चलेगा कि असल में आपकी कंपनी कितना कमा रही है।”
निवेश सिर्फ पैसे का नहीं होता, मानवीय संबंध भी उतने ही ज़रूरी है। “इंडस्ट्री में रिश्ते बनाने से आपको बेहतर बिज़नेस की समझ मिलेगी और बार्टर सर्विस से लागत में कटौती होगी। हालांकि, गुणवत्ता में कभी कोई समझौता न करें।”

