मेरी सेक्सलेस मैरिज मुझे एक खतरनाक राह पर धकेल रही है
मुझे डर है कि यह कुंठा मुझे तोड़ कर रख देगी
जब मैं 26 साल की उम्र में अपने पति मोहित* से मिली, उस समय मैं अपने टूटे हुए दिल को संभालने में लगी थी। जिस व्यक्ति के लिए मैं इतने आंसू बहा रही थी, उसका और मेरा साथ दो साल पुराना था, और इस दौरान मैं इस रिश्ते में पूरी तरह डूबी हुई थी। वह उन पुरुषों में से था जिनमें एक अलग ही किस्म का आकर्षण होता है जो आपको तबाह कर सकता है: भावनात्मक रूप से टूटा हुआ और अनुपलब्ध, लेकिन फिर भी चुंबकीय। वह भले ही मेरे लिए सही नहीं था, लेकिन उसके साथ सेक्स अद्भुत था। उसके साथ मैंने जाना कि अपनी सेक्षुअल डिज़ायर के आगे समर्पण का क्या मतलब होता है, एक से ज़्यादा ओर्गास्म आपको चरम सुख की किन ऊंचाइयों तक पहुंचा सकते हैं। उससे अलग होने के बाद, मैं खुद को पूरी तरह से बेसहारा महसूस करने लगी थी।
फिर एक रात, जब मैं नशे में धुत और बेहाल, रुंआसी हालत में एक दोस्त के साथ शाम बिता रही थी तो उसने हमें संभालने के लिए अपने दोस्त को बुलाया। वह अपने साथ मोहित को लेकर आया। यह मेरी उसके साथ पहली मुलाक़ात थी और मिलते ही मोहित मुझे बेहतर महसूस कराने की कोशिश में लग गया, हमने साथ बैठकर अपने-अपने जीवन में लिए बुरे फ़ैसलों का खूब मज़ाक उड़ाया। बाद में उसने कबूल किया कि पहली मुलाक़ात में ही वह मुझसे आकर्षित हो गया था, और मुझे फिर से देखने के लिए उसने बार-बार ग्रुप मीटिंग्स प्लान की। हमने एक-दूसरे को मैसेज करना शुरू किया, अपने दोस्तों के बिना मिलने लगे और जल्द ही डेटिंग करने लगे।
नर्क जैसे पिछले रिश्ते से निकलने के बाद, यह रिश्ता मधुर, सरल और सुरक्षित लग रहा था। और सेक्स भी अच्छा था। हम साथ में ज़िंदगी बिताने के बारे में सोचने लगे। एक साल बाद, हमने साथ में रहना शुरू किया और कुछ ही समय बाद शादी कर ली।
जब आप रिश्ते में प्रयास करना बंद कर देते हैं
शुरुआत में, हमारा घरेलू जीवन भले ही थोड़ा नीरस था लेकिन सुकूनदायक था। वीडियो एडिटर होने के कारण उसके वर्किंग ऑवर लंबे और अनियमित थे, जबकि मेरी नौ से पांच की नौकरी थी। इसका मतलब था कि हम अक्सर एक-दूसरे के साथ ज़्यादा समय नहीं बिता पाते थे, लेकिन जितना भी समय मिलता था, हम साथ में खुश और सहज महसूस करते थे। कम से कम मुझे तो यही लगता था, लेकिन लगभग चार महीने बाद, हमारी इंटिमेसी कम होने लगी।
पिछले एक साल में हमने सिर्फ़ तीन बार सेक्स किया। और वो भी संतुष्ट करने जैसा नहीं था। बल्कि हर बार ऐसा लगा जैसे हम जल्दबाज़ी और मजबूरी में सेक्स कर रहे हों। कोई फोरप्ले नहीं, सिर्फ कुछ किस और सीधे सेक्स, और उसके बाद सो जाते थे। मेरे ओर्गास्म तक पहुंचने से पहले ही सब ख़त्म हो जाता। हर बार, मेरे हिस्से में निराशा ही आई।
मैं मोहित के साथ बिताए अपने शुरुआती दिनों को याद करती हूं जब हम किस करते हुए कैसे खुद को रोक ही नहीं पाते थे, कैसे उसके आगोश से बाहर निकलना नामुमकिन हो जाता था मानों उसमें कोई गुरुत्वाकर्षण हो जो मुझे उसके और करीब खींच रहा हो। वे रोमांचक पल जब हम देर रात तक एक दूसरे को मैसेज करते थे और जो धीरे-धीरे सेक्सटिंग में बदल जाते थे। हमारी केमिस्ट्री साफ़ दिखाई देती थी। अब, उस चिंगारी की जगह स्नेह ने ले ली है जो आज भी कोमल और प्रेम से भरपूर है, लेकिन मेरी चाह को संतुष्ट करने के लिए काफी नहीं है।
हमारी शादी को अभी दो साल ही हुए हैं, और हमारा बेडरूम अभी से बेजान सा लगने लगा है। मैंने लोगों को कहते सुना था कि उम्र और शादी के दशक बढ़ने के साथ-साथ सेक्स लाइफ़ कमज़ोर होने लगती है, लेकिन हम तो अभी भी बीस के दशक में ही हैं। तो हमारी इंटिमेसी अभी से पुरानी, बीती हुई बात क्यों लगने लगी है?

इंटिमेसी की कमी धीरे-धीरे मेरे आत्मविश्वास को खत्म रही है
यहां बात सिर्फ़ अच्छे या बुरे सेक्स की नहीं है, बल्कि यह भी है कि यह मुझे कैसा महसूस कराता है – खूबसूरत, जिसकी चाहत हो। इसका अभाव धीरे-धीरे मेरे आत्मविश्वास को कम कर रहा है। मैं अक्सर खुद पर सवाल उठाने लगती हूं: क्या अब मैं आकर्षक नहीं रही? क्या इसलिए कि अब मैं पहले जैसी नहीं दिखती, मोटी हो गई हूं? या, कहीं उसका मन तो नहीं भटकने लगा है? मैं इन विचारों को दूर भगाने की कोशिश करती हूं, लेकिन अंदर ही अंदर ये मुझे कचोटते रहते हैं। कभी-कभी मैं मन ही मन हंसती हूं – शायद यह कर्मा है क्योंकि दो साल पहले मैंने वह चेन ईमेल फ़ॉरवर्ड नहीं की थी ना, जिसमें कहा गया था कि अगर मैंने उसे नज़रअंदाज़ किया तो बेडरूम में बदकिस्मती होगी।
मेरी सेक्सलेस मैरिज की शुरुआत कब हुई, यह बिलकुल सही से बताना तो कठिन है, लेकिन मोहित को इरेक्शन की समस्या होने लगी थी। पहले कुछ बार ऐसा हुआ, तो मैंने इसे तनाव का नतीजा समझा। लेकिन जल्द ही, इसे नज़रअंदाज़ करना नामुमकिन हो गया। मैंने कई बार पहल की और उसे संतुष्ट करने की हर संभव कोशिश की, लेकिन वह फिर भी उत्तेजित नहीं हो पाता था। जल्द ही उसने मेरी कोशिशों को नज़रअंदाज़ करना शुरू कर दिया, ऑफिस या अन्य कामों का बहाना बनाकर मुझे टालने लगा। उसका स्नेह भरपूर दिखता था लेकिन सेक्स की कोई चाह नहीं दिखती थी।
जब मैंने उससे इस बारे में पूछा, तो उसने पहले तो इनकार किया, लेकिन बाद में मान लिया कि वह अपने वज़न को लेकर थोड़ा असहज महसूस कर रहा था। मैंने उसे यकीन दिलाया कि वह मुझे अब भी आकर्षक लगता है, और साथ ही यह भी स्वीकारा कि उसके व्यवहार ने मुझे कितना दुःख पहुंचाया। मैंने उससे कहा कि मैं अब उस पर दबाव नहीं डालूंगी, और जब भी वह तैयार हो, वो मेरे पास आ सकता है। मैंने हफ़्तों और महीनों तक इंतज़ार किया। लेकिन कुछ नहीं।

यह तनाव अब बेडरूम की चारदीवारी से बाहर निकल गया है
मेरी नाराज़गी बढ़ती जा रही थी। मुझे गुस्सा इस बात का था कि उसने इस समस्या को सुलझाने की कोई कोशिश नहीं की, उसने मेरे साथ सही वजह नहीं शेयर की, उसे यह अहसास ही नहीं था कि मुझे आश्वस्त करने के लिए उसे पूरी पारदर्शिता के साथ इस बारे में मुझसे बात करनी चाहिए। और अब यह तनाव बेडरूम की चारदीवारी से बाहर निकल गया है। हमारे झगड़े बढ़ गए हैं और चाहे हम किसी भी बात पर लड़ रहे हों, मुझे हमेशा ऐसा लगता है जैसे मेरी जिंदगी से खुशियां चुराने का यह उसका एक और नया तरीका है। और मुझे पता है कि उसे भी लगता है कि वह मुझे निराश कर रहा है।
आखिरकार, उसने माना कि उसे भी लगता है कि यह कोई मेडिकल समस्या हो सकती है। काफ़ी समझाने-बुझाने के बाद, वह डॉक्टर के पास गया। कारण: परफॉरमेंस एंग्जायटी। कोई स्थायी विकार नहीं, बस असफल होने का डर। डॉक्टर ने कहा कि हो सकता है कि थकान की वजह से शुरुआती कुछ बार में उसे इरेक्शन न हुआ हो, लेकिन इससे उसके आत्मविश्वास पर असर पड़ा होगा। उसने उसे ऐसी दवाइयां दीं जो उसके इरेक्शन को बनाए रखने में मदद करेंगी ताकि उसका आत्मविश्वास वापस आ सके, उसे अपने उपकरणों से दूर रहने की सलाह दी, और उसे याद दिलाया कि सेक्स जितना शारीरिक है, उतना ही मानसिक भी है।
कुछ समय के लिए ही सही, मेरे अंदर एक उम्मीद जागी थी। लेकिन अब वो उम्मीद फिर से निराशा में बदल गई है क्योंकि न तो वो अपनी दवाएं लेता है, और ना ही स्क्रीन से दूर रहने की कोशिश करता है। और ना ही उसे कोई परवाह है कि उसे भी अपनी तरफ से हमारी इस सेक्सलेस मैरिज में कुछ रंग भरने की कोशिश करने की आवश्यकता है।
असल में, उसकी यही बात मुझे सबसे ज़्यादा दुख पहुंचाती है। मुझे ऐसा महसूस होता है जैसे हमारी इंटिमेसी उसके लिए मायने नहीं रखती, मेरी परेशानी से उसे कोई फर्क नहीं पड़ता। क्योंकि मेरे लिए सेक्स केवल एक फिज़िकल एक्ट नहीं है, मेरे लिए यह हमारे बीच के लगाव का प्रतीक है। इसके द्वारा आप बिना कुछ कहे यह जताते हो, “मैंने तुम्हें चुना है, तुम मेरी पसंद हो।”

मुझे डर है कि कहीं मैं कुछ गलत ना कर बैठूं
जब मैं टीवी या फिल्मों में किरदारों को सेक्स करते हुए देखती हूं, तो मेरे अंदर एक अजीब सी टीस उठती है। यह गलत है, लेकिन मुझे याद नहीं कि अपने पार्टनर द्वारा बदन सहलाना या गर्दन चूमने का एहसास कैसा होता है। कभी-कभी, जब मैं खुद को सेल्फ-प्लेज़र के माध्यम से संतुष्ट करने का प्रयास कर रही होती हूं, तो मेरे मन में अपने पति की बजाय अजनबियों की छवियां कौंधने लगती हैं। ऐसा क्यों होता है, मैं अपने पति की कल्पना क्यों नहीं करती? क्या इसलिए कि मैं उम्मीद खो रही हूं?
और क्या होगा यदि ये कल्पना धीरे-धीरे प्रलोभन में बदल जाए? अगर किसी दिन मैंने हताशा में अपनी इच्छाओं के सामने घुटने टेक दिए तो क्या होगा? मैं अपने पति को धोखा नहीं देना चाहती; वह एक अच्छा इंसान है, और अन्य पहलूओं में हमारी शादी हर तरह से कामयाब है। लेकिन जब भी मैं आगे का सोचती हूं तो खुद को हमेशा इसी दुविधा में खड़ा पाती हूं, एक जवान शादीशुदा औरत लेकिन अछूती। क्या मैं अपनी शारीरिक जरूरतों को अनदेखा करके इस रिश्ते में टिक पाउंगी, या मैं उस पहले हाथ को थाम लूंगी जो मेरी ओर बढ़ेगा? इस कल्पना मात्र से मुझे अपराधबोध होने लगता है। मैं खुद को याद दिलाती हूं कि धोखा देना मेरा स्वभाव नहीं है, मैं विश्वासघात नहीं कर सकती। लेकिन जब आप भूखे मर रहे हों (फिर चाहे वह शारीरिक हो या भावनात्मक), तो नैतिकता किस कदर डगमगाने लगती है इसकी मैंने कभी कल्पना भी नहीं की थी। यह सोचकर भी मेरा दिल दहल जाता है।
फ़िलहाल, मैं न तो उसके साथ और ना ही किसी और के साथ सेक्षुअल इंटिमेसी की उम्मीद रखना चाहती हूं। अपनी खुशी के लिए खुद पर निर्भर रहना ही मुझे आगे बढ़ने में मदद कर रहा है। मैं आशा करती हूं कि हमारी सेक्स लाइफ़ या तो बेहतर हो जाए, या फिर, उससे सेक्स की कोई भी उम्मीद करना मैं पूरी तरह से छोड़ दूं। बस वह दिन आने से पहले मेरा हौसला न डगमगा जाए। क्योंकि अगर मैंने उसे धोखा दिया, तो मैं खुद को कभी माफ़ नहीं कर पाऊंगी, और हमारी शादी ख़त्म हो जाएगी।
*अनुरोध पर नाम बदल दिए गए हैं
आकांक्षा नारंग को दी गई जानकारी के आधार पर




