फीमेल प्लेज़र के लिए सेक्स से पहले फोरप्ले इतना जरूरी क्यों है?
जरूरत पड़ने पर सेक्षुअल प्लेज़र को अपने कंट्रोल में लेने में ही समझदारी है
कल्पना कीजिए: आपकी सुहाग रात है, और आप अपने पार्टनर के साथ इंटिमेट होने का इंतजार कर रहे हैं, एक ऐसे शानदार ऑर्गैज़्म की उम्मीद के साथ जो फोरप्ले से भरपूर हो और आपके होश उड़ा दे। एक किस के साथ शुरुआत तो ठीकठाक होती है, लेकिन इससे पहले कि आप तालमेल बना सकें, आपकी पहली रात एक निराशाजनक रूप से ख़त्म हो जाती है – और आप अकेले, व्याकुल, बाथरूम के कमोड पर बैठे सोचते रह जाते हैं, “यह क्या था?” यह सीन सान्या मल्होत्रा की फिल्म ‘मिसेस’ के शुरुआती दृश्यों में से एक है, जो फरवरी 2025 में ओटीटी पर रिलीज़ हुई थी।
इस फिल्म को लेकर इंटरनेट पर मचे तूफान पर अभी तक यदि आपकी नज़र नहीं पड़ी है, तो यहां इस महत्वपूर्ण सीन का वर्णन दिया गया है: रिचा (सान्या मल्होत्रा का किरदार) अपने सेक्सिस्ट पति से सवाल करती है कि वह बेडरूम में उसकी ज़रूरतों – जिसके कारण उसके लिए सेक्स बहुत असहज और दर्दनाक अनुभव बन जाता है – को बार-बार कैसे नज़रअंदाज़ कर सकता है। जब वह अपनी भावनाएं उसके सामने व्यक्त करती है, तो वह उससे कहता है कि उसे तो आभारी होना चाहिए कि उसमें से रसोई की सड़ी दुर्गन्ध आने के बावजूद भी वह उसके साथ सो रहा है – जबकि वह खुद रिचा से पूरे दिन रसोई संभालने की उम्मीद करता है। विडंबना यह है कि रिचा का पति एक “फीमेल एनाटोमी” का डॉक्टर है, जैसा कि फिल्म की शुरुआत में वह उसे बताता है, लेकिन फिर भी उसे औरतों की जरूरतों की कोई समझ नहीं है। और दुर्भाग्य की बात तो यह है कि यह कई पुरुषों, डॉक्टरों या अन्य लोगों की हकीकत है।

हाल ही में हुई एक स्टडी से पता चला कि हर ऐज ग्रुप में पुरुषों की ऑर्गैज़्म रेट 70% से 85% के बीच पाई गई थी, जो महिलाओं की 46% से 58% की तुलना में 22-30% अधिक थी। स्टडी के अनुसार, वयस्कों में ऑर्गैज़्म रेट में इस अंतर का मुख्य कारण हमारे सामाजिक और सांस्कृतिक मानदंड हैं जो महिलाओं की यौन संतुष्टि को कम आंकते हैं, पेनिट्रेटिव सेक्स को प्राथमिकता देते हैं, और ऐसी मानसिकता को बढ़ावा देते हैं जो पुरुषों के सेक्षुअल प्लेज़र के पक्ष में होती है। बेंगलुरु स्थित सेक्सोलॉजिस्ट और पेल्विक केयर थेरेपिस्ट आंचल कौशल कहती हैं, “आजकल बहुत से मॉडर्न कपल्स की सेक्स की समझ बड़ी सीमित है, और परिणामस्वरूप, वे खुद को कम सेक्स या सेक्सलेस रिलेशनशिप्स में पाते हैं। उनको लगता है कि सेक्स केवल विभिन्न पोजीशनों, ऑर्गैज़्म या लेटेस्ट ‘हॉट टिप’ के बारे में है, लेकिन सही मायने में इंटिमेसी मात्र इन चीज़ों के बारे में नहीं है। यह एक जरूरत है जो दोनों पक्षों के लिए समान रूप से महत्वपूर्ण है और यह सेक्षुअली और इमोशनली दोनों रूप से पूरी होनी चाहिए।”
सेक्षुअल इंटिमेसी और संतुष्टि हर रिश्ते का बहुत महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, और महिलाओं के लिए सेक्स को आनंदपूर्ण बनाने में फोरप्ले एक बहुत अहम भूमिका निभाता है। प्लेज़र और डिज़ायर की अनुपस्थिति रिश्तों को गहरे स्तर पर प्रभावित कर सकती है। एक रिलेशनशिप में फोरप्ले की भूमिका को समझने के लिए हमने कुछ एक्सपर्ट्स से बात की, इसकी कमी बेडरूम के बाहर भी आपके जीवन को किस हद तक प्रभावित कर सकती है, और अपने आनंद के लिए आप क्या कर सकते हैं।

फोरप्ले को सेक्स का सबसे महत्वपूर्ण खिलाड़ी क्यों माना जाता है?
पुरुषों और महिलाओं की शारीरिक बनावट अलग-अलग होती है, इसीलिए डिज़ायर और अराउज़ल को अनुभव करने के उनके तरीके भी अलग-अलग होते हैं। पुरुष बड़ी जल्दी उत्तेजित हो जाते हैं,और एक्शन के लिए फटाफट तैयार हो जाते हैं लेकिन कौशल बताती हैं कि फीमेल डिज़ायर अक्सर प्रतिक्रियाशील होती है। “यह सही स्पर्श और अटेंशन से जागृत होती है। यदि आप फोरप्ले पर ध्यान नहीं दे रहे हैं, तो आप उस डिज़ायर को ठीक से उत्पन्न ही नहीं होने दे रहे हैं।”
हरियाणा की मैरिज और सेक्स थेरेपिस्ट डॉ. नेहा मेहता का कहना है कि महिलाओं के लिए फोरप्ले दो कारणों से जरूरी है, पहला क्योंकि इससे उनमें सुरक्षा की भावना पनपती है कि उनका पार्टनर उन्हें केवल उनके शरीर के लिए नहीं चाहता है और दूसरा, इससे अराउज़ल बढ़ता है। डॉ. मेहता कहती हैं, “शारीरिक स्पर्श से ऑक्सीटोसिन उत्पन्न होता है जो महिलाओं को अराउज़ल, लुब्रिकेशन और बेहतर ऑर्गेज्म पाने में मदद करता है। भरपूर फोरप्ले से महिलाएं खुश और संतुष्ट महसूस करती हैं।”
फीमेल डिज़ायर और प्लेज़र किसी लाइट स्विच की तरह काम नहीं करते; हमारे शरीर आहिस्ता-आहिस्ता, सौम्य स्पर्श के साथ उत्तेजित करने के लिए लिए बने हैं। कौशल कहती हैं, “हमारा कनेक्टिव टिश्यू – फेशिआ – एक निश्चित स्पीड पर प्लेज़र को रजिस्टर करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यदि स्पर्श बहुत तेज़ या कठोर हो, तो शरीर प्लेज़र सिग्नल को पूरी तरह से अनदेखा कर सकता है, और कभी-कभी सुन्न भी हो सकता है। धीमे-धीमे संवेदना पूरी तरह से जागृत करने में मदद मिलती है, जिससे उत्तेजना भी गहरी होती है।”

फोरप्ले का आभाव? यह आपके रिश्ते को खत्म कर सकता है
सेक्स एजुकेशन और फीमेल प्लेज़र की समझ की कमी के कारण, अधिकांश पुरुष क्लिट और वजाइना के तालमेल और इसके प्रबल प्रभाव को समझने में असमर्थ हैं। दिल्ली स्थित कपल्स कॉउंसलर रुचि रूह बताती हैं कि फोरप्ले की कमी न केवल सेक्स को दर्दनाक और असुविधाजनक बना सकती है, बल्कि महिलाओं को ऐसा महसूस कराती है जैसे कि उन्हें साथ जबरदस्ती की जा रही है। रूह बताती हैं, “पुरुषों और महिलाओं के अराउज़ल और सेक्षुअलिटी अलग-अलग तरीके से काम करती है। पुरुषों की तुलना में, महिलाओं को किसी भी प्रकार के सेक्षुअल एक्ट में शामिल होने के लिए थोड़ा अधिक आश्वासन, कम्फर्ट और इमोशनल कनेक्शन की आवश्यकता होती है। इस एक्ट के दौरान उन्हें सम्मान और प्यार महसूस करने की आवश्यकता होती है।”
बहुत से कपल्स ऐसे भी होते हैं जिन्हें फोरप्ले की समझ होती है लेकिन इसके बावजूद, वे समय की कमी, बिज़ी शेड्यूल और प्राइवेसी की कमी के कारण इस पर ध्यान नहीं देते हैं। समय के साथ, सेक्स के मायने बदल जाते हैं, यह एक दूसरे के प्लेज़र को एक्स्प्लोर करने और इंटिमेसी जाहिर करने के बजाय ऐसे लगने लगता है जैसे ‘चलो काम ख़त्म करें’।
फोरप्ले न करने के शारीरिक प्रभाव
फोरप्ले की कमी से लुब्रिकेशन भी कम होता है और सेक्स असहज और तकलीफदेह महसूस हो सकता है। डॉ. मेहता बताती हैं, “महिला का शरीर दर्द करने लगता है और उसके एनर्जी लेवल कम होने लगते हैं और यह उसके शरीर को उसी तरह प्रभावित कर सकते हैं जैसे डिप्रेशन और एंग्जायटी कर सकते हैं।”
कौशल बताती हैं, “एक सोमैटिक सेक्सोलॉजिस्ट और पेल्विक केयर थेरेपिस्ट के रूप में, मैंने ऐसी कई महिलाएं देखी हैं जो क्रॉनिक यूटीआई, पुडेंडल न्यूरलजिया और डिस्पेर्यूनिया से पीड़ित होती हैं – और अक्सर उसका मुख्य कारण अराउज़ल की कमी होता है। जब टिश्यू ठीक से फूलते नहीं हैं, तो नसें दबने लगती हैं, और शरीर को संकेत देती हैं कि यह असुरक्षित है। पेल्विक फ्लोर टाइट हो जाता है, जिससे दर्द और शिथिलता महसूस होने लगती है।”
फोरप्ले न करने के इमोशनल प्रभाव
एक असंतुष्ट सेक्स लाइफ भी आपके रिश्ते पर दबाव डाल सकती है। शारीरिक स्पर्श और भावनाएं आपस में जुड़ी होती हैं, इसलिए इसके अभाव में महिलाएं अपने साथी से जुड़ाव महसूस नहीं कर पाती हैं। डॉ. मेहता कहती हैं, “मेरे सामने आने वाले 80% मामलों में, महिलाओं को लगता है कि उनके रिश्ते में इमोशनल कनेक्शन का आभाव है। उन्हें अपने पार्टनर की तरफ से उपयुक्त इंटिमेसी का अहसास नहीं होता, और इसलिए वे सेक्स से बचने लगती हैं। वे खुद को अनचाहा महसूस करने लगती हैं और उनका लिबिडो (सेक्स की चाह) कम होने लगता है और उनमें सजने-संवरने की चाह भी ख़त्म हो जाती है। समय के साथ, ये छोटी-छोटी बातें बढ़ती जाती हैं और रिश्ते में नाराज़गी और कड़वाहट पैदा होती है क्योंकि उन्हें लगता है कि उनके पार्टनर की खुशी और सुख को प्राथमिकता मिल रही है लेकिन उनकी जरूरतें अनदेखी की जा रही हैं।”
रूह बताती हैं कि कई महिलाएं सेक्स और प्यार को एक दूसरे से जोड़ती हैं। अगर उनका पार्टनर उनके शरीर पर ध्यान नहीं दे रहा है, तो वे खुद को अनचाहा और अप्रिय समझने लगती हैं। “उन्हें लगने लगता है कि उनमें ही कुछ कमी है, जिससे आत्म-संदेह और बॉडी इमेज जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं।” वह शारीरिक स्पर्श से दूर भागने लगती है। कई बार केवल एक नकारात्मक अनुभव भी महिलाओं को फिज़िकल इंटिमेसी को टालने का कारण बन सकता है, चाहे वह गले लगना हो, या किस करना हो। रूह बताती हैं, “जिन महिलाओं का अपने पार्टनर के साथ सेक्षुअल एक्सपीरियंस अच्छा नहीं होता, कभी-कभी उन्हें एक-दूसरे का स्पर्श भी घृणात्मक लगने लगता है।”
सेक्षुअल केमिस्ट्री के आभाव में असंतुष्ट महिलाएं अपने पार्टनर से दूर होने लगती हैं, उनकी रिलेशनशिप में इंटिमेसी कम होने लगती है और आपसी नाराज़गी और गहरी होती जाती है। दूसरी और, ऐसे माहौल में, उनके पार्टनर में भी पत्नी से इच्छित प्रतिक्रिया ना मिलने के कारण अनचाहे भाव उत्पन्न हो सकते हैं, जिससे कपल के आपसी रिश्ते में एक गांठ बनने लगती हैं।

फिर से प्लेज़र टाउन की सही राह पकड़ें
अपने सेक्षुअल अनुभव सुखद बनाने के लिए, सभी एक्सपर्ट्स आपको अपने पार्टनर के साथ खुलकर बात करने की सलाह देते हैं कि बैडरूम में उससे आपकी क्या अपेक्षाएं हैं – जिसके लिए आपको भी यह पता होना चाहिए कि आप क्या चाहते हैं। कौशल के अनुसार, “कोई भी दो लोग एक जैसे नहीं होते हैं, और कोई भी दो पार्टनर बिल्कुल समान इच्छाएं नहीं रखते हैं। यही कारण है कि निरंतर खुलकर बातचीत करना महत्वपूर्ण है। कोई भी किसी के मन को नहीं पढ़ सकता। सेक्स मूल रूप से आपसी लगाव, चाहत, आत्म-जागरूकता और स्पष्टता और आत्मविश्वास के साथ अपनी सीमाओं, जरूरतों और इच्छाओं को व्यक्त करने की क्षमता के बारे में है। जितना ज्यादा हम – अपने शरीर की और एक दूसरे की – सुनना सीख लेते हैं, हमारी इंटिमेसी उतनी ही बेहतर और संतोषजनक हो जाती है।”
हमारे एक्सपर्ट्स के अनुसार, इन कुछ टिप्स की मदद से, आप अपने शानदार ऑर्गैज़्म का दौर फिर से शुरू कर सकते हैं।
बेड में आपकी चाहतों के बारे में अपने पार्टनर से बात करें: डॉ मेहता कहती हैं, “सहजता से अपने पार्टनर को बताएं कि आपको क्या अच्छा लगता है। फिल्मों, थेरेपिस्ट या आर्टिकल्स की मदद से उन्हें समझाने की कोशिश करें की वे आपको किस तरह प्लेज़र दे सकते हैं।”
अपने पार्टनर को उपयुक्त प्लेज़र देने के लिए गाइड करें: रूह का कहना है, “यदि आपका पार्टनर आपको बेहतर प्लेज़र पहुंचाने के तरीके सीखने के लिए उत्साहित है, तो ‘गाइडेड इमेजरी’ का प्रयास करें, जैसे कि शब्दों के माध्यम से एक मेंटल पिक्चर बनाते हुए उसे बताना कि आपको क्या अच्छा लगता है और उस अनुभव को और भी बेहतर कैसे बनाया जाए। उदाहरण के लिए, “जब तुम धीरे-धीरे मेरी पीठ सहलाते हो, तो मैं पूरी तरह से रिलैक्स हो जाती हूं, और मेरा शरीर जैसे तुम्हारे स्पर्श से पिघलने लगता है। सोचो कि हम किसी समुद्री बीच पर, एक-दूसरे की बाहों में लिपटे हुए बैठे हैं, और हवा के झोंकें हमें छूकर निकल रहे हैं। मुझे बहुत अच्छा लगता है जब तुम मुझे अपने करीब रखते हो, हम एक दूसरे के साथ कितना रिलैक्स महसूस करते हैं।” ये ‘गाइडेड इमेजरी’ के सरल उदाहरण हैं, जब आप एक दूसरे के साथ खुलकर बातचीत करने में सहज हो जाएं, आप इन्हें और मसालेदार बना सकते हैं। आप उन्हें शारीरिक स्पर्श के माध्यम से भी अपने प्लेज़र ज़ोन के बारे में गाइड कर सकते हैं।”
लुब्रिकेंट का इस्तेमाल करें: रूह कहती हैं, “अगर आपके अराउज़ल में समय लगता है (जोकि स्वाभाविक है) या यह पर्याप्त नहीं लगता है, तो सेक्स के दौरान लुब्रिकेंट का इस्तेमाल करें। इससे इंटरकोर्स के दौरान दर्द कम होगा।”
सेल्फ-प्लेज़र भी जरूरी है: रूह का मानना है, “अपने शरीर को परखें और जानें कि आपको क्या अच्छा लगता है। मास्टरबेशन बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह आपके शरीर को समझने में मदद करता है, और आपको अपनी सेक्षुएलिटी पर अधिक नियंत्रण और अधिक संतुष्टि का एहसास कराता है।”
अपने पेल्विक फ्लोर को फ्री रखें: कौशल की सलाह है, “किसी भी प्रकार का तनाव सबसे पहले आपके हिप्स और पेल्विक फ्लोर में डेरा जमाता है, जो आपके और आपके आनंद के बीच रोड़ा बन जाता हैं। हल्के से हिप सर्कल, रॉकिंग और ट्वर्किंग से नेगेटिव भावों से दिमाग हटेगा और रक्त का प्रवाह वहां बढ़ेगा जहां इसकी सही ज़रूरत है। आप इसे खुद से फ़्लर्ट करने जैसा समझें।”
केवल जेनिटल ही नहीं, शरीर के अन्य भागों को भी स्पर्श करें: कौशल कहती हैं, “आपका पूरा शरीर एक प्लेज़र मैप है। अपनी बाहों, जांघों, गर्दन और पेट को जिज्ञासा के साथ धीमे-धीमे स्पर्श कर के देखें। ध्यान दें कि आपको क्या अच्छा लगता है, कहां कोई अहसास नहीं होता और किन जगहों को छूने से आपको आनंद की अनुभूति होती है और बार-बार सहलाने का मन करता है। समय आ गया है की आप अपने शरीर के प्रति जागरूक हो जाएं।”
जैसा कि कौशल बताती हैं, बेहतरीन सेक्स का स्पीड से कुछ लेना-देना नहीं है – यह एक-दूसरे के शरीर को ट्यून करने, एक्स्प्लोर करने और सम्मान देने के बारे में है। “जब आप फोरप्ले को उपयुक्त समय देते हैं, तो इंटिमेसी और भी ज़्यादा संतोषजनक हो जाती है।” महिलाओं के शरीर सहलाने के लिए बने होते हैं और हमारी सेक्षुअल डिज़ायर को उपयुक्त नीयत और अटेंशन के साथ धीरे-धीरे जागरूक किया जाना चाहिए। पार्टनर के साथ सेक्षुअल केमिस्ट्री स्थापित होने और परफेक्ट होने में समय लगता है, एक-दूसरे के शरीर को मांपने और बिस्तर में अपनी इच्छाओं को समझने का समय दें ताकि आप दोनों ही एक शानदार और संतुष्ट ऑर्गैज़्म प्राप्त कर सकें।




