मैं अपनी दादी का सम्मान कैसे करूं जब वह मेरी मां का सम्मान नहीं करतीं?
इस दुविधा से कैसे निपटें
हर घर में एक दबी-दबी सी बात सुनने में आती है – मां की तरफ की फैमिली पिता की फैमिली से बेहतर होती है। आमतौर पर, हम में से अधिकांश लोग अपने मेटरनल फैमिली ट्री के प्रति ज्यादा झुकाव महसूस करते हैं। सास-बहू के बीच मनमुटाव कोई नई बात नहीं है और अक्सर इसके पीछे निहित कारण उनके बेटे या आपके पार्टनर के स्नेह का बंटवारा होता है। लेकिन इस टकराव की वजह से अक्सर ग्रैंडपेरेंट्स और ग्रैंडचाइल्ड के रिश्ते भी तनावपूर्ण हो सकते हैं। और कुछ ऐसा ही, हमारी एक ट्वीक रीडर अपने घर पर अनुभव कर रही थी। अपने कुछ प्रश्नों के उत्तर पाने के लिए, उन्होंने हमारी इंस्टाग्राम सीरीज़ ‘आस्किंग फॉर ए फ्रेंड’ के माध्यम से हमसे संपर्क किया, जहां ट्वीक कम्युनिटी अपने जीवन सम्बंधित मुद्दों पर आपस में चर्चा करती है। हमने इस विषय पर राय देने के लिए कुछ एक्सपर्ट्स को भी शामिल किया।
आस्किंग फॉर ए फ्रेंड: “हाय ट्वीक, मुझे आपका फैमिली रिलेशनशिप टॉपिक्स को हैंडल करने का तरीका बहुत पसंद है। मैं आपसे अपनी एक समस्या के बारे में सलाह लेना चाहती हूं।
मेरी दादी बहुत बूढ़ी हैं और काफी बीमार हैं, वह हमारे साथ रह रही हैं और उनका इलाज चल रहा है। मैं जानती हूं कि मुझे उनका सम्मान करना चाहिए लेकिन मैं चाह कर भी उनके साथ अच्छा व्यवहार नहीं कर पा रही हूं।
मैंने अपनी मां से ऐसे बहुत किस्से सुने हैं, जहां वे बताती हैं कि शादी के तुरंत बाद से ही दादी का व्यवहार उनके प्रति कितना क्रूर था। मेरी दादी का बर्ताव उनके प्रति अभी भी अच्छा नहीं हैं, यह जानते हुए भी कि उनकी अच्छी देखभाल के लिए मेरी मां ने कितने बलिदान दिए हैं, वह कभी उनका आभार नहीं मानती।
मेरी दादी मेरे साथ अच्छी हैं लेकिन मुझे समझ नहीं आता कि मां के प्रति उनके बुरे व्यवहार को मैं कैसे नज़रअंदाज़ करूं।”

एक्सपर्ट कहते हैं:
दिल्ली की काउंसलिंग साइकोलोजिस्ट सोनाली वर्मा, कोटो पर, जो केवल महिलाओं के लिए एक सोशल कम्युनिटी प्लेटफार्म है, अपनी एक्सपर्ट एडवाइस शेयर करती हैं। उनका कहना है कि यह एक चुनौतीपूर्ण स्थिति है क्योंकि हमारे पेरेंट्स के साथ हमारा रिश्ता स्पेशल होता है। लेकिन, यह जरूरी नहीं है कि आपको आपके ग्रैंडपेरेंट्स और पेरेंट्स में से किसी एक रिश्ते को चुनने की आवश्यकता है, वर्मा कहती हैं, “आप दोनों पक्षों को उनकी जरूरत के अनुसार सपोर्ट प्रदान कर सकते हैं।”
वर्मा की सलाह है, “अपने माता-पिता से इस बारे में बात करें कि उन्हें इस रिश्ते को लेकर आपसे क्या उम्मीदें हैं। उसके आधार पर, अपने लिए, अपने पेरेंट्स और ग्रैंडपेरेंट्स के लिए सीमाएं निर्धारित करें। साथ ही, अपने ग्रैंडपेरेंट्स को बेहतर ढंग से समझने और उनके साथ इमोशनली जुड़ने के लिए हर दिन उनके साथ थोड़ा क्वॉलिटी टाइम बिताएं।”
बेंगलुरु स्थित साइकोलोजिस्ट, फोरम पुजारा का कहना है कि आपको यह समझना जरूरी है कि आपके ग्रैंडपेरेंट्स और पेरेंट्स के बीच का यह तनाव बहुत पुराना है, और उनके व्यक्तिगत अनुभवों को पूरी तरह से समझ पाना कठिन है। पुजारा कहती हैं, “उनके रिश्ते को बेहतर बनाने की कोशिश करने के बजाय, उनके व्यक्तिगत स्वभावों की भिन्नता और आपसी रिश्तों के मतभेदों का सम्मान करें। अपने ग्रैंडपेरेंट्स के साथ वैसा ही व्यवहार करें जैसा वो आपके साथ कर रहे हैं, लेकिन साथ ही अपने पेरेंट्स के अनुभवों को समझते हुए, उनका सम्मान बनाए रखने की कोशिश करें।”
ट्वीक ट्राइब के विचार:
शीतल भांटी: “मेरा भी यही अनुभव रहा है! लेकिन मेरे मामले में, मेरी मां एकदम स्पष्ट थीं कि सबसे पहली और महत्वपूर्ण बात जो हमें याद रखनी है वह यह कि वह हमारी दादी हैं, और वह भी इंसान हैं। बाकी जो भी हुआ, वह हमारी लड़ाई नहीं थी, उसमें हमें खुद को शामिल करने की आवश्यकता नहीं है।”
रिया दत्ता: “मैंने सीखा है कि रिश्तों में एक ही सिद्धांत पर चलना चाहिए, ‘अगर कोई आपके साथ बुरा नहीं है, तो वह ठीक है’। जब वे दूसरों के प्रति बुरा व्यवहार करते हैं तो उन्हें टोकें – किसी भी तरह के बुरे व्यवहार को नजरअंदाज न करें – लेकिन अन्य लोगों के अनुभवों के भार को उठाना हमारा काम नहीं है। और ऊपर से, क्योंकि वह बीमार है और आपको उन्होंने हमेशा प्यार दिया है, आप कम से कम इतना तो कर ही सकते हैं कि बिना किसी दुर्भावना के उनकी देखभाल करें। हम सभी पहले इंसान हैं और कुछ लोगों को अहसास ही नहीं होता कि उन्होंने क्या गलत किया है क्योंकि उन्होंने खुद कभी ऐसा अनुभव नहीं किया होता।”
रश्मी रविनरे: “आप ग्रैंडचाइल्ड वाला कार्ड खेल सकते हैं और दादी को स्पष्ट रूप से, लेकिन नम्रता के साथ, बता सकते हैं कि जब वह आपकी मां के साथ बुरा व्यवहार करती हैं तो आपको अच्छा नहीं लगता। साथ ही, जब मां दादी की देखभाल में कुछ अच्छा करती हैं तो आप दादी के सामने उन्हें गले लगाकर उनके प्रयासों की सराहना कर सकते हैं।”
डाइनिंग टेबल कॉन्वर्सेशन्स: “आदर्श परिस्थिति में, आपके पिता को हस्तक्षेप करना चाहिए था और सही का साथ देना चाहिए था, और इस व्यवहार को बढ़ने से पहले ही रोक देना चाहिए था। किसी के आपत्ति ना उठाने के कारण आपकी दादी ने यह मान लिया कि उनका यह रवैया, आपकी मां और उनके रिश्ते पर, उनका नियंत्रण बनाने में मदद कर रहा है। और इसी वजह से आपकी मां उनसे डर कर उनके काबू में रहती हैं। हो सकता है कि उन्हें भी अपनी सास के साथ यही झेलना पड़ा हो और इसीलिए उनके अनुसार यही ‘सही तरीका’ हो। उन्हें स्पष्ट शब्दों में इस बात से अवगत कराना बहुत महत्वपूर्ण है कि यह उनका रवैया नहीं है, बल्कि आपकी मां की दयालुता और शिष्टता है, जो इतने वर्षों से यह सब सह रही हैं। सबसे पहले, अपने पिता से इस बात को बार-बार विनम्रतापूर्वक संबोधित करने के लिए कहें। यदि इससे काम नहीं बनता, तो आपको और आपके भाई-बहनों को अपनी मां के सपोर्ट में खड़ा होना चाहिए। इसका समाधान करना आवश्यक है। यह न केवल आपके परिवार की मानसिक शांति को बचाएगा, बल्कि आपके परिवार के मूल्यों और आदर्शों में भी सुधार लाएगा। और इससे भविष्य में परिवार से जुड़ने वाले नए सदस्यों को भी मदद मिलेगी।”
सिद: “हमारी मांएं बहुत कुछ सह चुकी हैं और नहीं, अपने बड़ों को उनकी गलत बातों के लिए टोकना अनादर नहीं है, जब तक आप अपना लहजा और शब्द बुद्धिमानी से चुनते हैं।”
स्वयंपूर्णा मिश्रा: “किसी भी तरह के अपमान का हिस्सा ना बनें! जो कोई भी आपकी मां का अपमान करता है वह कभी भी आपसे सच्चा प्यार नहीं कर सकता।”
यदि आप चाहते हैं कि ट्वीक ट्राइब आपके प्रश्नों के उत्तर ढूंढने में आपकी सहायता करे, तो इंस्टाग्राम पर डीएम के माध्यम से हमें संपर्क करें।




