क्या एक इमोशनली अवेलेबल पार्टनर की उम्मीद रखना गलत है?
इमोशनल नेग्लेक्ट आपके तलाक का कारण बन सकती है
“मेरे आंसू नहीं रुकते थे, लेकिन फिर भी मुझे लगता था कि मुझे ही समझदारी दिखानी चाहिए क्योंकि वह हमेशा ऐसा दर्शाता था जैसे सारी दुनिया का बोझ उसके ही सिर पर आ पड़ा है, मानो केवल उसका ही जीवन बिखर रहा है।” यह व्यथा है दिल्ली में रहने वाली सिमरित* की, जो दो साल से एक ऐसे व्यक्ति के साथ रिश्ता निभा रहीं थीं, जो उनके साथ होते हुए भी उनके साथ नहीं था, उनकी रिलेशनशिप में उसका योगदान नाममात्र का था, सिर्फ उतना, जितना बेहद जरूरी था। वह शायद ही कभी उसके साथ एक खुशनुमा कपल के रूप में समय बिताता था – ना क्वालिटी में और ना ही क्वांटिटी में – और अंततः उसके इस व्यवहार ने सिमरित* को भावनात्मक रूप से इतना निचोड़ दिया की उन्हें प्रोफेशनल हेल्प की जरूरत पड़ गई।
जब आप किसी ऐसे रिश्ते में होते हैं जहां आपकी भावनात्मक ज़रूरतें पूरी नहीं होती हैं, तो यह आपको अंदरूनी तौर पर कमज़ोर करने लगता है। मुंबई में रहने वाली अन्वेषा* कहती हैं कि शादी के बाद उनके दोस्तों ने उनमें बहुत बदलाव महसूस किया। वे कहती हैं, “चार साल हो गए हैं, और मुझे लगता है कि मैंने अपना खुशमिजाज़, और उत्साही व्यक्तित्व खो दिया है।” उनके पति द्वारा हर समय मिलने वाले साइलेंट ट्रीटमेंट के कारण वह अक्सर अपनी ज़रूरतों पर सवाल उठाने लगती हैं, सोचती हैं कि क्या वे उनसे बहुत ज़्यादा उम्मीदें कर रही हैं। “कभी-कभी मुझे लगता है, मैं खुद नहीं जानती कि मैं कब तक टिक पाऊंगी।”
मुंबई के एच. एन. रिलायंस फाउंडेशन हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर की क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट, मेहज़बिन डोरडी कहती हैं कि शादियों में इमोशनल नेग्लेक्ट (भावनात्मक उपेक्षा) बहुत आम होती जा रही है। “टेक्नोलॉजी की लत, वर्क स्ट्रेस और मेन्टल हेल्थ संबंधी समस्याएं इसके मुख्य कारण हैं। और ऊपर से सोशल मीडिया की अवास्तविक अपेक्षाएं और सामान्य तौर पर भावनात्मक जागरूकता का आभाव कपल्स के लिए इंटिमेसी और हेल्थी कम्युनिकेशन बनाए रखना कठिन बना देता है।”
यही वजह है की अमेज़न प्राइम वीडियो पर उपलब्ध फिल्म रॉकी और रानी की प्रेमकहानी का रोमांटिक लीड रॉकी (रणवीर सिंह द्वारा अभिनीत) बॉलीवुड के सबसे चर्चित किरदारों में से एक था। वह अपने पार्टनर की ज़रूरतों के प्रति सजग, अभिव्यक्त और भावनात्मक रूप से मौजूद था। महिलाएं उसके किरदार की तारीफें करते नहीं थकती थीं क्योंकि आजकल, ऑनस्क्रीन और रियल लाइफ दोनों में, इस तरह के आदमी कितने दुर्लभ हैं। यह इस बात को स्पष्ट करता है कितनी महिलाएं अपने पार्टनर द्वारा इमोशनल नेग्लेक्ट सह रही हैं और यह बर्ताव किस तरह रिश्तों में ज़हर घोल रहा है।
इमोशनल नेग्लेक्ट यानि भावनात्मक उपेक्षा को स्पष्ट रूप से समझा पाना कठिन हो सकता है, खासकर तब, जब कोई न कोई नेकनीयत मौसी या चाचा जी इस बात पर जोर दे रहे हों कि यह कोई “वास्तविक” समस्या नहीं है और “क्या वह आपके साथ बुरा व्यवहार करते हैं, नहीं ना?” हैदराबाद के सिल्वर ओक हेल्थ में कार्यरत साइकोलोजिस्ट और वेलनेस कोच ज़ेनिया श्राव्या इस बात पर और स्पष्टता प्रदान करती हैं: “यदि कोई व्यक्ति दूसरे व्यक्ति या अपने पार्टनर की भावनात्मक जरूरतों को पहचानने, मानने या उन पर प्रतिक्रिया करने में लगातार विफल हो रहा है तो उसके इस व्यवहार को इमोशनल नेग्लेक्ट यानि भावनात्मक उपेक्षा की संज्ञा दी जा सकती है। यह इमोशनल एब्यूज़ या भावनात्मक दुर्व्यवहार से अलग है, क्योंकि उसमें सक्रिय नुकसान शामिल होता है। इमोशनल नेग्लेक्ट स्नेह, सहानुभूति, कम्युनिकेशन और सपोर्ट की अनुपस्थिति के बारे में है।”
यदि आप भी कभी-कभी ऐसी परिस्थितियों का सामना करते हैं, तो यह समझने की कोशिश करें कि रिश्तों में दरारें कहां से शुरू हुईं, वे कितनी गहरी हैं। इससे यह अनुमान लगाने में मदद मिलेगी कि क्या आपके विवाह को अभी भी बचाया जा सकता है।

इमोशनल नेग्लेक्ट यानि भावनात्मक उपेक्षा की शुरुआत कैसे होती है
उपेक्षा की शुरुआत अक्सर छोटे-मोटे, सरल हाव-भावों के साथ होती है, जिन पर ध्यान देना या उन्हें बहस का मुद्दा बनाना उचित नहीं लगता, इसलिए वह आसानी से अनदेखा कर दिए जाते हैं। डोरडी कहती हैं, “यह इतना सहज हो सकता है जैसे बातचीत के दौरान आंखों का संपर्क न बनाना या मोबाइल देखते हुए उचाट मन से, आधे-अधूरे जवाब देना।” दिखने में यह एक छोटी सी बात लगती है लेकिन जब इस तरह का व्यवहार बढ़ता जाता है, तो यह किसी ज्वालामुखी के फटने का इंतज़ार करने जैसा है। “समय के साथ, अपने पार्टनर की भावनाओं को खारिज करने या अनदेखा करने जैसी ये छोटी-छोटी हरकतें बढ़ती जाती हैं, और फिर निरंतर उसी ढर्रे पर चलने लगती हैं।” अपने पार्टनर के जीवन-संबंधी महत्वपूर्ण बातों को भूल जाना, कभी जानने की कोशिश नहीं करना कि उनका दिन कैसा बीता – जो क्षणिक अलगाव के रूप में शुरू हुआ था वह धीरे-धीरे भावनात्मक दूरी में बदलने लगता है जिसे पाटना मुश्किल होता है।
अर्थपूर्ण बातचीत के साथ-साथ, हम अपने साथी के साथ में एक सुरक्षित जगह तलाशते हैं, जहां हमारा दिल और भावनाएं दोनों शांति से रह सकें। जब हमारे जीवन में बाकी सब कुछ ठीक चल रहा होता है, तो इमोशनल सपोर्ट की अनुपस्थिति का अहसास कम दुखदायी होता है। लेकिन जब हमारी मानसिक स्थिति नाज़ुक होती है और हम असुरक्षित महसूस करते हैं – जैसे, किसी प्रियजन की मौत या नौकरी का खो जाना – तो हम चाहते हैं कि कोई हमें संभाले। श्रव्या कहती हैं कि मुश्किल समय में कम्फर्ट या सपोर्ट देने में विफल होना या प्यार और इंटिमेसी ना दिखाना भी इमोशनल नेग्लेक्ट के प्रतीक हैं। मुंबई की 30 वर्षीय जिनल* इस बात की पुष्टि करती हैं, उन्हें भी अपने एक्स-हस्बैंड से अंततः तलाक लेना पड़ा क्योंकि वह हमेशा भावनात्मक रूप से अनुपलब्ध रहता था और उनकी तकलीफों के प्रति कोई सहानुभूति नहीं दर्शाता था। “मेरी बिल्ली गुज़र गई और उसके पास कहने के लिए कुछ भी नहीं था। उसे न केवल मेरी बिल्ली के मर जाने से बल्कि मेरे दर्द से भी कोई फर्क नहीं पड़ा। उसने मुझे कई दिनों तक रोते हुए देखा और एक बार भी मुझे सांत्वना नहीं दी।”
जब यह इमोशनल नेग्लेक्ट एक पैटर्न बन जाता है, तो उपेक्षित साथी के लिए महत्वहीन और अप्रिय महसूस करना स्वाभाविक है। लेकिन यह जरूरी नहीं है कि हर समय भावनात्मक उपेक्षा की वजह प्यार की कमी हो। डोरडी बताती हैं कि कई मामलों में भावनात्मक उपेक्षा के पीछे पुराने घाव या आघात हो सकते हैं, या फिर कुछ लोग अपनी भावनाओं को शब्दों में जाहिर करने में सक्षम नहीं होते। “यदि आपको कभी भी अपनी या किसी और की भावनाओं को पहचानना, व्यक्त करना या उन पर प्रतिक्रिया करना नहीं सिखाया गया है, तो जाहिर है आपको किसी और की भावनाओं के लिए जगह बनाने और उनकी उम्मीदों पर खरा उतरने में परेशानी हो सकती है।” श्रव्या बताती हैं कि दो लोगों के प्यार जताने के तरीकों (लव लैंग्वेज) में अंतर, उन्हें ऐसा महसूस करा सकता है कि उनकी भावनात्मक ज़रूरतें पूरी नहीं हो रही हैं। “यदि एक पार्टनर शब्दों के माध्यम से प्यार व्यक्त करता है, जबकि दूसरा अपने हावभाव के माध्यम से दिखाता है, तो आपसी प्रेम होने के बावजूद भी वे अप्रिय महसूस कर सकते हैं।” उदाहरण के लिए, आपका पार्टनर आपके लिए आपके जन्मदिन पर स्पा अपॉइंटमेंट बुक करके अपनी परवाह दिखाना चाहता है, लेकिन यदि आप पर्सनल क्वालिटी टाइम को अधिक महत्व देते हैं तो आपको ऐसा लग सकता है कि वे आपके लिए मौजूद नहीं हैं।

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क्या आपकी शादी को बचाया जा सकता है?
कई बार, एक रिलेशनशिप को दोबारा जीवंत करने का कोई रास्ता नहीं होता। श्रव्या कहती हैं, “अगर आप भावनात्मक तौर पर जुड़ाव महसूस करना बंद कर देते हैं, रिश्ते को बचाने के आपके प्रयासों के बावजूद बार-बार आपकी उपेक्षा की जाती है, विश्वास और सम्मान की कमी महसूस होने लगती है, और अलगाव बहुत लंबे समय तक बना रहता है, तो संभव है कि आपकी शादी बहुत नाजुक स्थिति से गुज़र रही है।” यदि घाव बहुत गहरे हो चुके हों और उनके भरने की उम्मीद ना के बराबर हो, तो दोनों पार्टनर्स के लिए अलग होना सबसे स्वस्थ समाधान हो सकता है।
हालांकि, इन सभी अलगावों के बावजूद यदि आपके रिश्ते में अभी भी प्यार और सम्मान है और देखभाल का जज़्बा मौजूद है, तो एक उम्मीद की किरण हो सकती है। कनिका* जो अपने पति के साथ भारत से दुबई चली गईं, बताती हैं कि उन्हें शुरू में अकेलेपन से जूझना पड़ा। ऐसा इसलिए भी हुआ क्योंकि उनके पति काम में डूबे रहते थे और शारीरिक और भावनात्मक रूप से अनुपस्थित रहते थे। “एक साल बीत गया, बातचीत कम होते-होते ना के बराबर हो गई, जो भी बात होती वो ज़्यादातर खाने को लेकर या हमारे बच्चे की स्कूल संबंधित चीज़ों के इर्द-गिर्द घूमती थी।” कई झगड़े हुए लेकिन कोई परिणाम नहीं निकला, कनिका कहती हैं कि आखिरकार उनका ज्वालामुखी फट पड़ा। “मैंने उनसे कह दिया कि अगर उन्होंने मुझे वक़्त देना शुरू नहीं किया, तो वे मुझे खो देंगे। यह कोई धमकी या अल्टीमेटम नहीं था; मैं बस उन्हें स्पष्ट तौर पर अपनी मनःस्थिति बताना चाहती थी और यह भी कि अब मेरे सब्र का बांध टूटने लगा है।” तब उनके पति को एहसास हुआ कि इसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए। उन्होंने आपस में बैठकर, अपनी ज़रूरतों पर चर्चा की, और एक-दूसरे को ज़्यादा से ज़्यादा समय देना शुरू किया। आज, उनका कहना है, वे दोनों खुश हैं और एक हेल्थी रिलेशनशिप में हैं।
अगर आपको लगता है कि आपकी शादी को बचाया जा सकता है और सब कुछ खत्म नहीं हुआ है, तो एक-दूसरे के फिर से करीब आने के कई तरीके हैं। लेकिन सबसे पहली और महत्वपूर्ण बात यह है कि आप दोनों यह परिवर्तन – भावनात्मक मौजूदगी, बेहतर संवाद और आपसी रिश्ते में सुधार का प्रयत्न – लाने की इच्छा और निष्ठा रखते हों। श्रव्या हमारे साथ ऐसे पांच सवाल शेयर करती हैं जो कपल्स को बेहतर इमोशनल कनेक्शन विकसित करने में मदद कर सकते हैं:
“मेरी कौनसी बातों से आप मेरे प्यार को सबसे ज्यादा महसूस कर पाते हैं?” इससे एक-दूसरे की लव-लैंग्वेज को समझने में मदद मिलती है।
“आप किन हालातों में मुझसे सबसे ज़्यादा इमोशनल कनेक्शन महसूस करते हैं?” इससे आपको उन पलों की पहचान करने में मदद मिलेगी जो इंटिमेसी को मज़बूत करते हैं।
“मैं ऐसा क्या करूं जिससे आपको लगे कि आपकी बात सुनी जा रही है और आप महत्वपूर्ण हैं?” इससे सपोर्ट को बढ़ावा मिलेगा।
“जब हम साथ होते हैं तो आप कैसा महसूस करते हैं?” इससे ईमानदारी से सोचने का मौका मिलता है।
“हम इमोशनल कनेक्शन बढ़ाने के लिए कौन सी छोटी-छोटी दैनिक आदतें अपना सकते हैं?” इससे निरंतर प्रयास करने का बढ़ावा मिलता है।
क्या आपके पार्टनर द्वारा निरंतर मिल रही यह भावनात्मक उपेक्षा आपके विवाह को ख़त्म करने के लिए एक पर्याप्त वजह है? यह निर्णय लेने से पहले आपको अपनी भावनाओं और रिश्ते की गहराई का ईमानदारी से जायजा लेने की आवश्यकता है – ताकि आप जो भी रास्ता चुनें, और फिर चाहे कोई कुछ भी कहे, आपको अपने निर्णय पर भरोसा होना चाहिए कि वह आपके लिए सबसे उपयुक्त था।
*अनुरोध पर सभी नाम बदल दिए गए हैं




