गोल्डफिश से हाथी में बदलें - आपकी याददाश्त में सुधार लाने के लिए एक्सपर्ट्स ने शेयर की कुछ टिप्स
यदि आपकी मेन्टल हार्ड ड्राइव को सॉफ्टवेयर अपग्रेड की आवश्यकता है
यादें उन क्षणों को संजोती हैं जो हमारे जीवन को बुनने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और जिन्हें हम विरासत के तौर पर अगली पीढ़ी को सौंपते हैं। कभी-कभी, कुछ यादें हम अपने जेहन में बनाए रख पाते हैं तो कभी, आपको एहसास ही नहीं होता कि वे कब आपके दिमाग की अदृश्य दरारों से फिसल जाती हैं, जिनकी आपको भनक भी नहीं थी। क्या ये गूगल भैया की मदद लेने का संकेत हैं? लेकिन ध्यान रखें कि ये उस नौटंकी दोस्त की तरह प्रतीत हो सकता है जो सबसे पहले तुरंत किसी बुरी चीज की ही कल्पना करता है। चीजें भूल रहे हैं? यह ब्रेन डैमेज है। धुंधली नज़र? कैंसर। ये सब संभव हैं, लेकिन अधिक संभावना इस बात की है कि आपको किसी नेत्र रोग विशेषज्ञ (ऑप्थल्मोलॉजिस्ट) से मिलने और अपनी याददाश्त में सुधार लाने के लिए, इस पर काम करने की ज़रूरत है।
ऐसी दुनिया में, जहां लोगों के दिमाग कैफीन की मदद से शताब्दी ट्रेन से भी तेज चल रहे हैं, हमारे दिमाग मल्टीटास्किंग मास्टर बनने पर मजबूर हो रहे हैं। हम पर लगातार हर जगह और स्क्रीनों से जानकारी की बौछार होती रहती है – नोटिफिकेशन, ईमेल, ट्वीट और भी बहुत कुछ। याददाश्त में सुधार लाने के लिए प्रयास करना – फिर चाहे वह काम के उद्देश्य से हो, परीक्षाओं के लिए हो, या खुद को एक्टिव रखने के लिए सरल मेन्टल एक्सरसाइज़ के रूप में हो – हमारी मेन्टल हार्ड ड्राइव के लिए सॉफ़्टवेयर अपग्रेड की तलाश करने जैसा है।
क्योंकि, जब एक साथ अत्यधिक जानकारी का सामना करना पड़ता है, तो हमारी याददाश्त एक फटी हुई छलनी की तरह काम करने लगती है। ऐसा नहीं है कि हम याद रखने में असमर्थ हैं; लेकिन ऐसा लगता है कि हमारा दिमाग गुहार लगा रहा हो, “अरे, थोड़ा थम जाओ! मैं केवल इतना ही संभाल सकता हूं।” ज्ञान और सूचनाओं की इस डिजिटल बाढ़ में, जो जानकारी वास्तव में महत्वपूर्ण है उसे बनाए रखने के लिए हमारे दिमाग को संघर्ष करना पड़ता है।

आज की दुनिया में सर्वाइव करने के लिए, डेटा की इस दैनिक सुनामी को नेविगेट करने, दिमाग को समय-समय पर खाली करने और डिजिटल युग की निरंतर हलचल में गुम हुई शांति और फोकस को वापिस पाने के तरीके खोजने के लिए, कई लोग अपनी याददाश्त को बेहतर बनाने की तलाश में निकल चुके हैं।
मेमोरी और डेटा रिकॉल पर स्मार्टफ़ोन के प्रभाव का पता लगाने के लिए लगातार स्टडी हो रही है, कुछ का कहना है कि डिजिटल एमनेशिया में वृद्धि का कारण फोन पर बढ़ती हमारी निर्भरता है क्योंकि छोटी सी चीज भी याद ना आने पर हम तुरंत फोन का सहारा लेते हैं। दूसरी ओर, कुछ लोग कहते हैं कि डिजिटल एमनेशिया अपना प्रोडक्ट बेचने के लिए कुछ कंपनियों द्वारा प्रचारित एक मार्केटिंग टेक्नीक है। लेकिन सोन परी का किरदार निभाने वाली एक्टर का नाम ढूंढने के अलावा भी जीवन में बहुत कुछ है, अपने किस्से-कहानियों और यादों को दिलो-दिमाग में बनाए रखने के लिए अपनी याददाश्त में सुधार लाना और उसे बेहतर बनाना बहुत महत्वपूर्ण है।
अपने पावर सेंटर को समझने और इसे तराशते रहने के लिए, हमने एक्सपर्ट्स की ओर रुख किया।
चेतावनी: इस कहानी में किसी बीमारी या मेडिकल कंडीशन के कारण होने वाले मेमोरी लॉस का वर्णन नहीं किया गया है। कृपया अपने लिए उपयुक्त ट्रीटमेंट प्लान के लिए किसी ट्रेंड प्रोफेशनल को कंसल्ट करें।
याददाश्त में सुधार, एक्सपर्ट तरीके से:
मेमोरी क्रिएशन (यादों का सृजन) और रिटेंशन (याददाश्त बने रहना) कैसे काम करता है?
ब्रेन एक कॉम्प्लेक्स अंग है जिसे पढ़ने और समझने में लोगों को वर्षों लग जाते हैं। हमने एसआरवी अस्पताल, गोरेगांव के कंसलटेंट न्यूरोलॉजिस्ट, डॉ. अमित शाह से यह बताने के लिए कहा कि याददाश्त कैसे काम करती है।
वे कहते हैं, “जब हम कुछ देखते हैं या महसूस करते हैं, तो हमारी इंद्रियां इसे ब्रेन के हिप्पोकैम्पस नामक हिस्से में भेजती हैं। यहां, यह जानकारी थोड़े समय के लिए स्टोर की जाती है। उन्हें लंबे समय तक बनाए रखने के लिए, हमारा ब्रेन हमारे नर्व सेल्स के बीच की कड़ियों को मजबूत बनाता है। यह मजबूती सिनैप्टिक प्लास्टिसिटी के नाम से जानी जाती है जो कि नर्व सेल्स के बीच के कनेक्शन की मजबूती दर्शाती हैं।”

“चीजों को बार-बार याद करते रहने से, उन्हें हमारे दिमाग में बनाए रखने में मदद मिलती है। जितना अधिक हम किसी चीज़ के बारे में सोचते हैं या प्रैक्टिस करते हैं, वह हमारे ब्रेन में उतनी ही दृढ़ हो जाती है, जिससे उसे भूलना मुश्किल हो जाता है। हालांकि, समय के साथ यादें बदल सकती हैं या बाद की घटनाओं से प्रभावित हो सकती हैं।”
हमारे ब्रेन का कॉम्प्लेक्स सिस्टम हमारे अनुभवों को यादों के रूप में संजो कर रखता है और जरूरत पड़ने पर उन्हें याद करने में मदद करता है।
सर एचएन रिलायंस फाउंडेशन हॉस्पिटल के साइकेट्रिस्ट, डॉ. आशुतोष शाह का कहना है कि उम्र बढ़ने का असर शरीर के साथ-साथ ब्रेन पर भी पड़ता है, जिससे ब्रेन में उपस्थित सभी मुख्य प्रकार के सेल्स में संरचनात्मक परिवर्तन होते हैं।
आसानी से चीजें याद करने और अपनी याददाश्त बनाए रखने की शक्ति को बढ़ावा देने के लिए प्रैक्टिकल टिप्स
डॉ. आशुतोष का कहना है कि जीवन के पहले दस सालों में, स्वस्थ आहार और अच्छा वातावरण ब्रेन की क्षमता को अधिकतम बढ़ाने में मदद करता है। लेकिन याददाश्त को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाने के लिए कोई जादुई गोली नहीं है। “कई शारीरिक लक्षणों की तरह, मेमोरी एक जन्मजात जेनेटिक गुण है।”
हालांकि, उनका कहना है कि आप अपनी मस्तिष्क की मौजूदा क्षमताओं के अधिकतम उपयोग के लिए इनमें से कुछ टिप्स का उपयोग कर सकते हैं।
नियमित रूप से दिमागी कसरत
सुडोकू के बारे में पापा बिल्कुल सही थे। डॉ. अमित कहते हैं, “मस्तिष्क को चुनौती देने वाली और उत्तेजित करने वाली गतिविधियों में शामिल होना, जैसे पहेलियां सुलझाना, पढ़ना, नए स्किल सीखना, या म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट्स बजाना, कॉग्निटिव फंक्शन और मेमोरी को बढ़ाने में मदद करता है।”
डॉ. आशुतोष कहते हैं, यहां हॉबी (शौक) काम आती है। “ब्रेन हेल्थ को बेहतर बनाने में, किसी भी प्रकार की हॉबी का बहुत योगदान होता है। ये ब्रेन की कॉग्निटिव क्षमता [हार्वर्ड हेल्थ के अनुसार, ब्रेन की किसी काम को करने के विभिन्न तरीकों को सुधारने और खोजने की क्षमता] को बढ़ाने में मदद करती हैं।” हॉबी आपके तनाव को कम करने में भी बेहद सहायक होती है और तनाव का याददाश्त पर काफी गहरा असर होता है। तो कोई भी नया शौक अपनाने में कभी देर मत कीजिए।

पर्याप्त आराम
डॉ. अमित कहते हैं, “स्ट्रांग मेमोरी और कॉग्निटिव फंक्शन के लिए अच्छी नींद बहुत महत्वपूर्ण है।”
डॉ. आशुतोष भी उनकी इस बात का समर्थन करते हैं, जो नींद को एक ‘नेचुरल मेडिसिन’ मानते हैं जिसे हमेशा बहुत कम आंका जाता है। उनका कहना है कि यह विशेषकर छात्रों के लिए बहुत मददगार है – उनकी मेमोरी और ब्रेन हेल्थ को बेहतर बनाने के लिए, नियमित रूप से सूर्यास्त के 3-4 घंटे बाद से 8-9 घंटे की लगातार नींद बहुत आवश्यक है। युवा और मध्यम आयु वर्ग के वयस्कों के लिए, लगभग 7-8 घंटे की रात की नींद हेल्थी होती है।
यदि आप की आदतें आपको रात में उल्लू की तरह जगाए रखती है, तो आप अकेले नहीं हैं। क्या आपने कभी अच्छी नींद के लिए बालासन आज़माया है?
याददाश्त बढ़ाने वाली तकनीकें
जैसे बचपन में हमें नौ प्लैनेट्स (ग्रहों) के नाम याद कराने के लिए ‘निमोनिक’ (मेमोरी बढ़ाने वाली ट्रिक) का उपयोग किया जाता था, डॉ. अमित का कहना है कि आज भी निमोनिक डिवाइसेस, विज़ुअलाइज़ेशन और एसोसिएशन जैसी मेमोरी-बढ़ाने वाली कुछ उपयोगी तकनीकें हैं जो जानकारी को अधिक प्रभावी ढंग से याद रखने में सहायता कर सकती हैं।
क्रॉसवर्ड, स्क्रैबल, वर्ड और मेमोरी गेम्स ब्रेन को चैलेंज करते हैं और कॉग्निटिव परफॉरमेंस में सुधार लाते हैं।

डॉ. अमित एक और तकनीक ‘चंकिंग’ के बारे में बात करते हैं। यह शब्द आपको किटकैट की याद दिला सकता है, लेकिन इसे ऐसे समझे जैसे एक बड़े पिज्जा को टुकड़ों में बांटना, ताकि इसे पचाना आसान हो जाए। उदाहरण के लिए, 10 अंकों के फोन नंबर को पांच-पांच के दो ग्रुप में बांट देना या लिस्ट बनाते समय, एक साथ काम आने वाली चीजों को साथ में रखना (जैसे कि चार्जर और मोबाइल केस, झुमके और हार, ताकि यदि आप एक को याद करें, तो दूसरा अपने आप याद आ जाए)।
रेपेटिशन (दोहराना) का मतलब है किसी एक कार्य को बार-बार करना, जैसे अपने पसंदीदा शो को दोबारा देखना जिसे देखकर आपको सुकून मिलता है। लेकिन यहां एक ट्विस्ट है: स्पेस रेपेटिशन जो अलग-अलग समय पर अलग-अलग एपिसोड देखने जैसा है। इसमें आप एक एपिसोड आज देखते हैं, दूसरा कुछ दिनों में देखते हैं, और फिर शायद एक सप्ताह बाद देखते हैं। आपका ब्रेन इस स्पेस-आउट रिफ्रेशर को ज्यादा पसंद करता है क्योंकि यह लंबे समय तक उस जानकारी को याद रखने में मदद करता है।
फिज़िकल एक्सरसाइज़ और सही डाइट
हालांकि यह बात हमने ट्रको पर बजने वाले धूम हॉर्न से ज्यादा सुनी होगी, दोनों एक्सपर्ट्स का भी यही कहना है कि नियमित एरोबिक एक्सरसाइज़ और एंटीऑक्सिडेंट्स, ओमेगा -3 फैटी एसिड और अन्य पोषक तत्वों से भरपूर संतुलित आहार ब्रेन हेल्थ के लिए आवश्यक हैं, और आपकी याददाश्त में सुधार लाने में सक्षम हैं।
हम में से बहुत से लोग ऐसे होंगे जिन्हें जिम जाने के नाम से बुखार आ जाता है और इसीलिए हमने बिगिनर्स के लिए कुछ अनुकूल वर्कआउट ढूंढे हैं जिन्हें आप घर बैठे ही आज़मा सकते हैं। एक नौसिखिए का फोकस, ज्यादा इंटेंसिव वर्कआउट करने की बजाय उसे लम्बे समय तक करते रहने पर होना चाहिए।
इंटरमिटेंट फास्टिंग
डॉ. आशुतोष का कहना है कि लगभग 12 घंटे (डिनर से ब्रेकफास्ट तक) की इंटरमिटेंट फास्टिंग “मस्तिष्क और शरीर के स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकती है, और मेमोरी की क्षमता और फंक्शन बढ़ा सकती है।”
हालांकि यह रिसर्च निर्णायक नहीं है, एक स्टडी कहती है कि इंटरमिटेंट फास्टिंग हिप्पोकैम्पस (ब्रेन का वह हिस्सा जो मेमोरी और लर्निंग से जुड़ा हुआ है) में नए ब्रेन सेल्स को विकसित करने में सहायक हो सकती है। इससे ब्रेन पावर बूस्ट होती है और हमारे ब्रेन को प्रभावित करने वाली बीमारियों की संभावना कम हो सकती है।

एक अन्य स्टडी से पता चलता है कि अधिक उम्र वाले लोगों में, जो मेमोरी सम्बंधित हलकी-फुलकी तकलीफों से जूझ रहे हैं, इंटरमिटेंट फास्टिंग करने से कॉग्निटिव फंक्शन बेहतर होता है बजाय उनके जो फास्ट नहीं करते हैं। साथ ही, इस रिसर्च स्टेटमेंट के अनुसार, इंटरमिटेंट फास्टिंग मस्तिष्क के लचीलेपन को बढ़ाती है, जिससे यह बेहतर काम करता है और डैमेज और बीमारियों के प्रति अधिक मजबूत बनता है।
सोशल इंगेजमेंट्स
अपने अंदर के सोशल एनिमल को जगाएं, क्योंकि दोनों एक्सपर्ट्स बताते हैं कि सामाजिक संबंध बनाए रखने से और बातचीत करते रहने से आपका मस्तिष्क युवा रहता है।
अपने दोस्तों के साथ बिताएं समय को एक मेन्टल जिम की तरह समझें जहां आप उन मेमोरी मसल्स को एक्सरसाइज़ करवाते हैं। जब आप बातचीत, हंसी-मजाक या बहस कर रहे होते हैं, तो आपका मस्तिष्क जमकर पार्टी मना रहा होता है।
इस दौरान आपके ब्रेन का कोऑर्डिनेशन सेंटर वर्कआउट कर रहा होता हैं। आपसी बातचीत, बहस और विचार-विमर्श आपके न्यूरल पाथवे को सक्रिय रखती है, जिससे वे सभी मजबूत और फुर्तीले बनते हैं।.
फिर आता है कॉग्निटिव रिजर्व, ब्रेन का सेविंग्स अकाउंट। आपके जितने ज्यादा सोशल कनेक्शन होंगे, आप इस अकाउंट में उतना ही अधिक जमा करेंगे। और जब कभी जिंदगी में आपकी मेमोरी को चुनौती का सामना करना पड़ेगा, तो यह रिजर्व आपके बहुत काम आएगा।
सामाजिक मेलजोल (सोशलाइसिंग) आपके मस्तिष्क के लिए विटामिन बूस्ट की तरह है। यह आपके मूड को बेहतर बनाता है, तनाव कम करता है और यहां तक कि उम्र बढ़ने के साथ आपके कॉग्निटिव फंक्शन को कमजोर होने से रोकने में भी मदद करता है। ए जर्नल ऑफ जेरोन्टोलॉजी: साइकोलॉजिकल साइंसेज की रिपोर्ट बताती है कि सोशलाइज़ेशन (समाजीकरण) से “अधिक उम्र वाले लोगों में डिमेंशिया से बचाव में फायदा हो सकता है, ठीक उसी तरह जिस तरह फिज़िकल एक्सरसाइज़ से डायबिटीज़ या हृदय रोग की संभावना कम होती है।”
जब हमारी इंद्रियां जानकारियों की बाढ़ में डूब रही हों और यादें सुनीता की लेटेस्ट इंस्टाग्राम स्टोरी की तरह क्षणिक प्रतीत होने लगें, तो याददाश्त में सुधार करने की हमारी जरूरत केवल यह याद रखने के बारे में नहीं है कि हमने अपनी चाबियां कहां छोड़ी थीं। यह एक संतुलन बनाने के बारे में हैं: डेटा से भरी इस दुनिया पर अपना नियंत्रण पुनः प्राप्त करने के साथ-साथ इस उथल-पुथल के बीच अपने दिमाग को राहत की सांस प्रदान करना। इस ह्यूमन रेस में कदम से कदम मिला कर चलने के लिए आपको केवल उन क्षणों को संरक्षित करना चाहिए जो वास्तव में आपको परिभाषित करते हैं और गैरजरूरी क्षणों और यादों को मुक्त कर देना चाहिए।




