पेरेंटिंग की दुनिया में कदम रखने से पहले खुद से ये 19 सवाल अवश्य पूछें
क्या सुबह 4 बजे उठकर दूध पिलाने और चौबीसों घंटे डायपर बदलने वाले लाइफस्टाइल के लिए आप तैयार हैं?
जब लोग कहते हैं कि आजकल अरेंज मैरिज के लिए बायोडेटा तैयार करना किसी जॉब के लिए एप्लीकेशन फॉर्म भरने जैसा है, तो वे बिलकुल बढ़ा-चढ़ा कर नहीं कह रहे हैं। आपकी ऊंचाई, वजन, वेतन से लेकर आपके दाहिने पैर के तलवे पर गुप्त तिल, और तो और आपके चाचा के बेटे की कमाई तक उन्हें सब जानकारी चाहिए। इतनी जानकारी की आदमी देते-देते थक जाए। लेकिन जब ऐसा ही एक बायोडेटा भरने की मेरी बारी आई तो मेरा सामना एक ऐसे सवाल से हुआ जिसका मैंने आज तक कभी स्पष्ट रूप से जवाब नहीं दिया था: क्या मैं वास्तव में शादी के बाद बच्चे चाहती हूं, या यह मेरे लिए एक और मील का पत्थर है जिसके लिए मुझे बचपन से तैयार किया गया था, और एक महिला होने के नाते मेरी स्वाभाविक प्रवृत्ति? इसने मुझे एहसास दिलाया कि हवन कुंड के चक्कर लगाने से पहले इस अहम बात पर अपने मन को टोहना बहुत जरूरी है और पेरेंटिंग की शुरुआत करने से पहले कुछ सवाल खुद से अवश्य पूछें।
मेरा मानना था कि एक मां बनने में जो संतुष्टि मिलती है वह बच्चे पैदा करने के बाद की तकलीफों से कहीं ज़्यादा होगी – लेकिन अब, मेरा मन डगमगाने लगा है। ये तकलीफें तो अंतहीन लगती हैं। अपने सकड़े से वजाइनल कैनाल से एक तरबूज़ के साइज़ के इंसान को बाहर धकेलना? और उसके बाद होने वाले शारीरिक परिवर्तन – बेकाबू गैस, यूरिन लीक, निप्पलों के घाव (और अन्य ब्रेस्टफीडिंग समस्याएं), हॉरमोन का ओवरलोड? इसके अलावा, डायपर के लम्बे-चौड़े बिल और आसमान छूती स्कूलों की फीस जो किसी नए एम्प्लॉई की वार्षिक तनख्वाह से भी ज़्यादा हो सकती है। और यदि आप जैसे-तैसे खुद को इन सब बातों के लिए तैयार कर भी लें, तो उसे एक अच्छा इंसान बनाने के लिए उसकी सही परवरिश करने की आजीवन जिम्मेदारी भी आपके ही हिस्से आती है!
इसलिए, इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि आजकल ज़्यादातर महिलाएं बच्चे नहीं चाहती हैं। लैंसेट स्टडी के अनुसार, भारत की फर्टिलिटी रेट 2027 तक घटकर 1.75 हो जाएगी और 2050 तक 1.29 से भी नीचे गिर जाएगी। 1950 में यह रेट 6.2 थी और 2021 में यह लगभग 2 थी। 2024 की एक न्यूज़ रिपोर्ट के अनुसार, भारत में DINKS (डुअल इनकम नो किड्स) की संख्या बढ़ रही है। इसका एक कारण यह है कि पहले बच्चों को बुढ़ापे का सहारा माना जाता था, लेकिन द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में कहा गया है कि “आज बच्चों के पालन-पोषण की लागत बुढ़ापे में होने वाले संभावित रिटर्न से कहीं ज़्यादा है।” क्या हम जैसी शहरी, शिक्षित महिलाएं जो दुनिया के मुद्दों – अंतहीन युद्ध, बढ़ती महंगाई, बिगड़ता पर्यावरण – से पूरी तरह वाकिफ हैं और इन सबके बीच सफलता हासिल करने का दबाव भी सह रही हैं, किसी दूसरे इंसान को, खास तौर पर जिसे हमने जन्म दिया हो, इस अराजकता में झोंकना चाहेंगीं? और इससे हमारा और हमारे सपने का क्या होगा? हम अपनी ही एक कार्बन कॉपी विकसित करने और अपने 80 सालों में वर्ल्ड टूर पूरा करने के सपने में से चयन कैसे करें?
इन सवालों के कारण अधिकांश औरतों की रातों की नींद उड़ी हुई है, और इसलिए हमने मुंबई की कपल और फैमिली थेरेपिस्ट नैना शाहरी से संपर्क किया, ताकि यह समझा जा सके कि इस उलझन भरे कोहरे से कैसे बाहर निकलें, और सही निर्णय पर पहुंच सकें। शाहरी कहती हैं, “बुद्धि और तर्क ही एकमात्र तरीका है जिसकी मदद से हम अपने आस-पास की दुनिया और जानकारी को समझ सकते हैं। हो सकता है कि हममें से कई लोग अपने शरीर और भावनाओं से जुड़ाव महसूस करते हों और जानते हों कि हमें अपना बच्चा चाहिए या नहीं। फिर भी, हम जिस दुनिया में रहते हैं, उसमें हमसे बहुत सी अपेक्षाएं लगाईं जाती हैं और माता-पिता बनना एक बहुत बड़ी ज़िम्मेदारी है। इसलिए खुद से पेरेंटिंग की शुरुआत करने से पहले कुछ सवाल पूछना आपको यह पता लगाने में मदद कर सकता है कि क्या आप माता-पिता बनने के लिए तैयार हैं।”

पेरेंटिंग की शुरुआत करने वालों के लिए 19 महत्वपूर्ण सवाल
सपोर्ट सिस्टम कैसा है
1. कहते हैं कि एक बच्चे को पालने के लिए पूरे गांव की जरूरत होती है – क्या आपके आस-पास ऐसे लोग हैं जो बच्चे की देखभाल में हाथ बटाएंगें? अगर हां, तो क्या आपके विचार उन लोगों के साथ मेल खाते हैं जो बच्चे के पालन-पोषण में योगदान देंगे?
2. क्या आपके आस-पास, आपके पार्टनर के अलावा, आपके माता-पिता और दोस्तों जैसा कोई इमोशनल सपोर्ट सिस्टम है? अपने पास कुछ ख़ास लोगों का वक़्त-बेवक़्त निर्भर कर सकने वाला एक मजबूत ग्रुप होने से, आपको फिज़िकल और इमोशनल बदलावों से जूझने में मदद मिल सकती है। फिर भले ही यह सिर्फ़ आपकी नींद की कमी जैसी छोटी सी बात की भड़ास निकालने के बारे में ही क्यों न हो।
3. क्या आपके पास उपयुक्त मार्गदर्शन और जानकारी के विश्वसनीय स्रोत हैं? इनमें वह दोस्त जो प्रेगनेंसी और बच्चे की परवरिश से गुज़र चुके हों, परिवार के बुज़ुर्ग, किताबें और ऑनलाइन ब्लॉग्स भी शामिल हो सकते हैं जहां लोग अपने अनुभव शेयर करते हैं। इनमें मेडिकल प्रोफेशनल, थेरेपिस्ट आदि भी शामिल हैं।
आपका फाइनेंशियल सिस्टम कैसा है
4. क्या आपका अपने फाइनांसेस पर कंट्रोल है और आप इससे जुड़े फैसले लेने में स्वयं सक्षम हैं? इससे आपको अपने और अपने बच्चे का भरण-पोषण करने के लिए निर्णय लेने और उसे लागू करने में मदद मिलेगी।
5. क्या आपके पास अपने बच्चे और खुद से संबंधित प्रत्याशित खर्चों और इमरजेंसी की परिस्थितियों के लिए कोई प्लान हैं? फाइनेंशियल स्ट्रेस एक ऐसा दबाव है जो आमतौर पर अधिकांश माता-पिता अनुभव करते हैं – और यह प्रश्न हर इनकम ग्रुप वाले लोगों पर लागू होता है और इसकी मदद से आप अपने और अपने बच्चे के लिए इच्छित लाइफस्टाइल सम्बंधित उचित निर्णय लेने में सक्षम बनते हैं।
6. अपने फाइनांसेस को कैसे मैनेज करना है, क्या इस बात पर आपके और आपके पार्टनर के विचार मिलते हैं? अपने निवेशों में क्या फेरबदल करना चाहिए, एक कपल के रूप में और व्यक्तिगत तौर पर कौन से खर्च आपके लिए जरूरी हैं जिन पर समझौता करना नामुमकिन है, और आप किन खर्चों को टालने के लिए तैयार हैं, इन बातों पर आपस में चर्चा करने से आपको यह समझने में मदद मिलेगी कि क्या आप एक बच्चे के लिए फाइनेंशियल रूप से तैयार हैं और उसके पैदा होने के बाद आपके लाइफस्टाइल में क्या बदलाव आ सकते हैं।
पार्टनरशिप और को-पेरेंटिंग संबंधित सवाल
7. क्या आप अपने पार्टनर के साथ अपनी भावनाओं को खुलकर व्यक्त कर पाते हैं और आप विवादों को कैसे सुलझाते हैं? इससे आपको यह समझने में मदद मिलेगी कि क्या आप दोनों असहमति वाले मुद्दों को इस तरह से सुलझाने में सक्षम हैं कि इससे बच्चे की देखभाल या पालन-पोषण में बाधा न आए।
8. क्या आपकी या आपके पार्टनर की अपने होने वाले बच्चों से कुछ गुप्त अपेक्षाएं हैं? कई बार हम अपने बच्चे से एक खास तरीके से दिखने, व्यवहार करने और चीजें हासिल करने की उम्मीद कर सकते हैं जो हो सकता है आपके बच्चे की ज़रूरतों, सपनों या आकांक्षाओं से मेल नहीं खाए।
9. पेरेंटिंग के तीन पहलू हैं- मार्गदर्शन, पालन-पोषण और सीमाएं तय करना। आप अपने रिश्तों में सीमाएं कैसे तय करते हैं? आपका पार्टनर अपने जानकार लोगों के साथ सीमाएं कैसे तय करता है? क्या सीमाएं तय करने की आपकी शैलियां आप दोनों को स्वस्थ लगती हैं और एक-दूसरे के साथ मेल खाती हैं?
10. क्या आप दोनों ने माता-पिता के रूप में अपनी ज़िम्मेदारियों के बंटवारे पर चर्चा की है? साथ रह रहे दो लोगों का माता-पिता बनने का फैसला अपने साथ कई भूमिकाएं और ज़िम्मेदारियां लेकर आता है – जैसे एक रोमांटिक पार्टनर, रूममेट और फाइनेंशियल पार्टनर बनना, साथ ही फैमिली सेटिंग में भी साझेदारी निभाना। परंपरागत रूप से, बच्चे की देखभाल की ज़िम्मेदारी महिलाओं पर छोड़ दी जाती है, और इस विषय पर खुलकर बात करनी बहुत जरूरी है कि आपके घर में इस ज़िम्मेदारी को कैसे हैंडल किया जाएगा।

आत्म-जागरूकता और स्वयं की देखभाल संबंधित सवाल
11. क्या आप अपनी एकतरफा सोच को चुनौती देने के लिए तैयार हैं? अपनी मान्यताओं के प्रति झुकाव होना स्वाभाविक हैं और ऐसा हम सभी अनुभव करते हैं, लेकिन हर आने वाली पीढ़ी पुरानी मान्यताओं को किसी न किसी तरह से चुनौती देती है। जो आपके लिए जरूरी है उस पर फोकस करने के साथ-साथ कुछ नया सीखने के लिए स्वयं को तैयार करना भी महत्वपूर्ण है, यह आपको बच्चों के साथ आपके संबंधों को बेहतर बनाने में मदद करेगा।
12. मुश्किल समय में आप खुद को कैसे पेश करते हैं? आपका यह जानना ज़रूरी है कि भावनात्मक तौर पर आपके लिए क्या काम करता है क्योंकि पेरेंटिंग आपकी और आपके बच्चे, दोनों की ही बराबर देखभाल करने के बारे में हैं।
13. आप तनाव का सामना कैसे करते हैं? क्या आप आक्रामक हो जाते हैं, स्थिति से बचने की कोशिश करते हैं, या बिलकुल शांत हो जाते हैं? क्या आपके लिए तनावपूर्ण स्थितियों को संभालना मुश्किल हो जाता है? हालांकि ऐसी परिस्थितियों को हैंडल करने का कोई एक परफेक्ट तरीका नहीं है, लेकिन यह सवाल अपने अंदर जागरूकता पैदा करने के लिए है ताकि आप बच्चों के साथ सावधान रह सकें।
14. क्या ऐसे कोई क्षेत्र हैं जो आपके लिए संघर्षपूर्ण हैं और जिन पर आप काम करना चाहेंगे? जैसे, कुछ लोगों को खुद को एक रूटीन में ढालना मुश्किल लग सकता है, कुछ अपनी देखभाल ठीक से नहीं कर पाते हैं, बीमार होने पर डॉक्टर के पास जाना भी उन्हें एक संघर्ष लगता है। और कुछ लोग के लिए अपना काम छोड़कर किसी और के लिए वक़्त निकालना और उनके लिए उपस्थित रहना कठिन लग सकता है। एक पैरेंट के रूप में, आप अपने बच्चे की भलाई के लिए जिम्मेदार होंगे, और यह आत्म-चिंतन आपको यह समझने में मदद करेगा कि क्या आप किसी ऐसे व्यक्ति के लिए अपने जीवन में जगह बनाने के लिए तैयार हैं जो पूरी तरह से आप पर निर्भर है।
15. बच्चा पैदा करने की आपकी इच्छा के पीछे वास्तव में क्या कारण हैं? हममें से ज़्यादातर लोग इस सोच के साथ बड़े हुए हैं कि बच्चे होने ही चाहिए, या यह कि अपनी विरासत को आगे बढ़ाने का यही एकमात्र तरीका है। इन कारणों की वजह से हम तो अपनी सामाजिक संरचनाओं के सामने घुटने टेक सकते हैं, लेकिन ऐसा ना हो कि आगे जाकर कहीं हम भी अपने बच्चों पर भी ऐसी निरर्थक अपेक्षाएं और शर्तें थोपने लगें। क्या आपके पास इनके अलावा भी कोई कारण हैं?
16. बच्चा होना एक बहुत बड़ा बदलाव है और इसका असर जीवन के सभी पहलुओं पर पड़ता है, जिसमें पारिवारिक रिश्ते, पार्टनर के साथ संबंध, काम और दोस्ती सब शामिल हैं। आपने और आपके पार्टनर ने अपने जीवन में पहले आए बदलावों को कैसे संभाला है? और इन परिवर्तनों के दौरान किन चीजों ने आपको स्थिर बने रहने की हिम्मत दी?
आपका वर्क-लाइफ बैलंस कैसा है
17. ऑफिस का काम, सोशल लाइफ और घर और फैमिली के लिए समय को आप और आपका पार्टनर कैसे मैनेज करते हैं?
18. क्या आप और आपका पार्टनर अपने लाइफस्टाइल में कुछ बदलाव करने के लिए तैयार हैं – जिसमें नींद का रूटीन, आपके खाने-पीने और रिलैक्सेशन के समय जैसे महत्वपूर्ण बदलाव शामिल हैं?
19. क्या आपकी वर्क पॉलिसी में बच्चे की परवरिश के लिए टाइम और कंपनसेशन शामिल है – क्या मैटरनिटी और पैटर्निटी लीव के लिए कोई पॉलिसी है? क्या ऐसे लाभ उठाने पर वर्कस्पेस में किसी प्रकार का भेदभाव होता है? यदि आप एक फ्रीलांसर हैं या अपना खुद का व्यवसाय चलाते हैं, तो अपने बच्चे को अधिक समय देने के कारण क्या फाइनेंशियल प्रभाव पड़ सकते हैं?
शाहरी कहती हैं, “एक महिला के शरीर पर केवल उसका अपना हक़ होता है, कोई भी उसे यह नहीं बता सकता कि उसे बच्चे पैदा करने चाहिए या नहीं।” आपको सिर्फ़ इसलिए बच्चे पैदा करने के लिए दबाव महसूस नहीं करना चाहिए क्योंकि आप बायोलॉजिकल रूप से सक्षम हैं। यह एक बहुत बड़ा फ़ैसला है जो आपके जीवन जीने के तरीके को बड़े पैमाने पर बदल देता है। आत्मनिरीक्षण के लिए दिए यह सही संकेत आपको अपने संदेहों को दूर करने, अपने डर को जांचने और अपने आत्मविश्वास को परखने में मदद कर सकते हैं, और इसके बाद जब आप तय करेंगें कि आपको किस रास्ते पर चलना है, तो आपका निर्णय आपके लिए निश्चित ही सही साबित होगा।




