83% भारतीय महिलाओं को ये ब्रेस्टफीडिंग समस्याएं होती हैं
“क्या मैं एक बुरी मां हूं?”
तो, किसी ने आपको बताया नहीं कि मां बनना एक आसान काम नहीं है। रात को चैन की नींद एक सपने जैसी लगती है; कई बार कुछ दिनों तक नहाना भी नसीब नहीं हो पाता, और अपने पार्टनर के साथ इंटिमेसी तो किसी और ही युग की एक सुहावनी याद लगती है जिसके बारे में आप केवल ख्यालों में ही खुश हो पाते हैं। और ऊपर से, आपके सामने ऐसी ब्रेस्टफीडिंग समस्याएं आ खड़ी होती हैं जो आपके बचे-खुचे धैर्य को भी नष्ट करने पर तुली होती हैं।
भले ही इस भावुकता के पीछे कोई सच्चाई नहीं हैं, लेकिन महिलाएं खुद को असफल महसूस करने लगती हैं। इंटरनेशनल बोर्ड द्वारा सर्टिफाइड लैक्टेशन स्पेशलिस्ट और कंसलटेंट दिया जादवानी का कहना है कि अपने शिशुओं के पोषण और उनसे लगाव बढ़ाने का यह समय मांओं के लिए एक अद्भुत और प्राकृतिक तरीका होना चाहिए, लेकिन ये ब्रेस्टफीडिंग समस्याएं उन्हें अकेला और तनावग्रस्त महसूस करा सकती हैं। कुछ महिलाओं के पास इस बारे में सही जानकारी के साथ अच्छा सपोर्ट सिस्टम होता है – या कम से कम दया और हमदर्दी होती है – जो उन्हें इस मुश्किल दौर को पार करने में मदद करते हैं। जादवानी स्वयं उन लोगों में से एक थी जिन्हें ब्रेस्ट मिल्क की कम सप्लाई से निपटने के लिए फार्मूला मिल्क का सहारा लेना पड़ा।
“मुझे इससे कोई तकलीफ नहीं थी, लेकिन फिर डॉक्टर ने हमें बताया कि मेरे बेबी के हॉर्मोन लेवल अबनॉर्मल हैं और उसे केवल ब्रेस्टफीडिंग कराने की ज़रूरत है। फिर तीन महीने के बाद, उसके टेस्ट दोबारा किये गए, और सभी लेवल नार्मल आए। आजीवन दवाएं देने के बजाय, ब्रेस्टफीडिंग का रुख करना कितना आसान था – इसने मेरी आंखें खोल दी।” जब उनकी बेटी 18 महीने की थी, जादवानी ने ट्रेनिंग कोर्स शुरू किया और उन्हें लैक्टेशन स्पेशलिस्ट के रूप में प्रमाणित किया गया।

“यह हमारे सिस्टम में कमी है, क्योंकि जन्म देने के बाद जब महिलाओं को उनका बच्चा सौंपा जाता है, उन्हें आश्वस्त करके घर भेज दिया जाता है। आगे क्या होगा इसके बारे में बहुत कम या कोई जानकारी नहीं दी जाती है और इस परिस्थिति से निपटने के लिए उन्हें उनके हाल पर छोड़ दिया जाता है। इससे ज्यादा भयावह क्या होगा, जब आपको अचानक एक नए नन्हे से जीव की सम्पूर्ण जिम्मेदारी सौंप दी जाएगी।”
2022 में एक स्टडी के अंतर्गत, भारत में 1,200 नर्सिंग मांओं पर सर्वे किया गया और पाया गया कि 83% महिलाओं ने ब्रेस्टफीडिंग से जुड़ी चुनौतियों का सामना किया। आप उस संख्या के आधार पर हमारी 1.5 बिलियन जनसंख्या का मूल्यांकन कर सकते हैं।
जादवानी की ऑनलाइन कोटो कम्युनिटी के उद्देश्य के पीछे मुख्य कारण है – विभिन्न प्रकार की ब्रेस्टफीडिंग समस्याएं और उनसे निपटने के बारे में सही ज्ञान की कमी होना। यह महिलाओं को खुल कर अपने अनुभव शेयर करने और बिना अपराधबोध महसूस किए मार्गदर्शन प्राप्त करने के लिए प्रेरित करते हैं।
“महिलाएं अक्सर अपने सामने आने वाली इन समस्याओं के बारे में बात नहीं करतीं क्योंकि ठीक से ब्रेस्टफीड न करा पाने के कारण वे शर्म महसूस करती हैं, जो कि नई मांओं के लिए आसान माना जाता है। तो, या तो वो ब्रेस्टफीड करना बंद कर देती हैं या फिर इस दौरान होने वाली तकलीफों और दर्द सहती रहती हैं। लेकिन यह मां और शिशु दोनों के लिए ही हेल्थी नहीं है।”
जादवानी ने महिलाओं के समक्ष आने वाली कुछ आम ब्रेस्टफीडिंग समस्याएं, जिनपर अक्सर चर्चा नहीं की जाती, और उनसे निपटने के तरीकों को समझने में हमारी मदद की। हालांकि जो जानकारी उन्होंने हमारे साथ शेयर की है, वह बहुत शिक्षात्मक है, लेकिन हम, जादवानी के साथ, इनमें से किसी भी समस्या से जूझ रही नई मांओं से किसी एक्सपर्ट को कंसल्ट करने का आग्रह करते हैं जो उन्हें बेस्ट गाइडेंस दे सके।
आम ब्रेस्टफीडिंग समस्याएं और उनसे कैसे निपटें
ब्रेस्ट मिल्क की कम सप्लाई
यदि आपकी मिल्क फैक्ट्री अचानक छुट्टी लेने का फैसला कर ले, तो घबराहट महसूस होना स्वाभाविक है। जादवानी का कहना है कि नई मांओं के समक्ष आने वाली इन ब्रेस्टफीडिंग समस्याओं का मुख्य कारण दूध की सप्लाई में कमी हो सकती है। “यदि बच्चा ठीक से लैच नहीं कर पा रहा हो (ब्रेस्ट को मुंह में नहीं ले पा रहा हो) तो दूध बनने में कमी हो सकती है। ब्रेस्टफीडिंग कराना 50% मां का काम है, बाकी 50% बच्चे का है, जो वास्तव में दूध खींचता है। यदि डिमांड कम होगी, तो सप्लाई भी कम होगी।”
आपकी हेल्थ का भी इसमें बहुत बड़ा हाथ है। जब दूध की कम सप्लाई की बात आती है तो तनाव एक प्रमुख कारक हो सकता है। तनाव और चिंता से पूरी तरह छुटकारा पाना कठिन है, खासकर चाइल्ड बर्थ के ठीक बाद जब आप इस नई जिंदगी से तालमेल बिठा रहे होते हैं, लेकिन एक अच्छा सपोर्ट सिस्टम और प्रोफेशनल की मदद के साथ, आप अपनी तकलीफों को कम कर सकते हैं।
जादवानी कहती हैं, “माएं अक्सर फॉर्मूला मिल्क का सहारा यह सोचते हुए लेती हैं, ‘ओह, बेबी ठीक से ब्रेस्टफीड नहीं कर पा रहा है, तो पेट भरने के लिए फॉर्मूला का उपयोग किया जा सकता है। या जब वे काम पर वापस जाने लगती हैं और बच्चा डेकेयर में रहता है, तो उसे वहां भी फॉर्मूला दिया जाता है। शारीरिक रूप से कहें तो नर्सिंग (ब्रेस्टफीडिंग) में कमी आपके शरीर को यह संकेत देती है कि दूध की मांग कम हो रही है। इसलिए, सप्लाई भी तो कम हो जाएगी ना।”
इस समस्या से निपटने की दिशा में पहला कदम किसी स्पेशलिस्ट से बात करना होगा। वह कहती हैं कि दूध की सप्लाई शारीरिक कारकों के साथ-साथ हॉर्मोनल स्टिम्युलेशन पर भी महत्वपूर्ण रूप से निर्भर करती है।
ज्यादा से ज्यादा ब्रेस्टफीड करें ताकि बच्चे का मुंह दूध के प्रवाह को स्टिम्युलेट कर सके या फीडिंग के बीच के अंतराल में ब्रेस्ट पंप का उपयोग करें। “एक बार उचित जांच करा लें ताकि किसी भी प्रकार के हॉर्मोनल असंतुलन का पता लग सके। क्या पता ऐसा पीसीओएस के कारण हो रहा हो जो आपको पहले था? कोई थायरॉइड समस्या, या दवाओं के कारण जो आप ले रहे हैं?”
ब्रेस्ट एन्गॉर्जमेन्ट
‘एन्गॉर्जमेन्ट’ – एक फैंसी शब्द, उस समय के लिए जब आपके ब्रेस्ट टीशू में अचानक बढ़ते हुए खून और दूध के प्रवाह के कारण आपके बूबी फ्रेंड्स का साइज़ बढ़ने लगता है, वे टेंडर महसूस करने लगते हैं। आप सोच रहे होंगे कि दूध की मात्रा का बढ़ना तो अच्छी बात है।
चाइल्ड बर्थ जैसी सुपर हीरो उपलब्धि से गुजरने के बाद, शरीर में बढ़ रहे हॉर्मोन्स और रक्त प्रवाह आपको सूजन दे सकते हैं, जैसे कि आप अपनी शर्ट के नीचे छुपा कर तरबूजों की तस्करी कर रहे हों। आपके निपल्स में दर्द होता है, फ्लैट या संकुचित निपल्स के कारण आपको लैचिंग की समस्या का सामना करना पड़ता है, और आपके ब्रेस्ट काफी सख्त, कठोर और दर्दनाक महसूस करते हैं।

समय पर दूध पिलाते रहने से और शुरू से ही उचित लैचिंग से इस समस्या से पूरी तरह बचा जा सकता है। लेकिन फिर भी यदि आप इससे गुजर रहे हैं, तो ब्रेस्टफीडिंग से पहले हल्की मालिश और गर्म सिकाई करने से दूध का प्रवाह आसान होता है और दर्द में आराम मिलता है।
लैचिंग की समस्या
ब्रेस्टफीडिंग में सफल होने के लिए उचित लैच सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है। यदि बच्चा ब्रेस्ट को मुंह में ठीक से नहीं पकड़ता है, तो इससे निपल्स पर घाव, दूध के अपर्याप्त ट्रांसफर जैसी तकलीफें हो सकती हैं और साथ ही मां और बच्चा दोनों हताश और चिड़चिड़े होने लगते हैं।
जादवानी बताती हैं कि महिलाओं के विभिन्न प्रकार के ब्रेस्ट के अनुसार ब्रेस्टफीडिंग के लिए विभिन्न पोज़िशन्स और तकनीके होती हैं। हॉस्पिटल से डिस्चार्ज होने से पहले, अपने डॉक्टर से पता लगाएं कि आपकी ब्रेस्ट टाइप के लिए क्या उपयुक्त है।
चेक कराएं कि बच्चे के मुंह में किसी प्रकार की कोई तकलीफ तो नहीं है जो उसे सही से लैच करने में बाधा पैदा कर रही है। यदि उसकी लैचिंग बहुत सतही है, जो केवल निपल को पकड़ती है, तो मां को दर्द होना स्वाभाविक है और शिशु को भी सही मात्रा में दूध नहीं मिल पाता है। यह बच्चे की जीभ सम्बंधित समस्या हो सकती है, जिसे अक्सर ‘टंग टाई’ कहा जाता है, जिसकी जांच डॉक्टर से कराई जानी चाहिए। और ऐसा शिशु के होठों के आकार पर भी लागू होता है। अत्यधिक भरे हुए ब्रेस्ट के कारण भी बच्चे ठीक से लैच नहीं कर पाते हैं।
पोजीशन में थोड़ा सा बदलाव इस समस्या का समाधान हो सकता है, और लैचिंग संबंधी किसी भी समस्या का समाधान ढूंढते समय किसी एक्सपर्ट की गाइडेंस लेने में समझदारी है।
मिल्क डक्ट्स (दूध की नलिकाएं) का जाम होना
आपकी मिल्क डक्ट्स आपके ब्रेस्ट के अंदर स्थित छोटे-छोटे हाईवे के समान हैं जो उस लिक्विड गोल्ड को आपके भूखे बच्चे तक ले जाने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं। लेकिन समय-समय पर, उनमें से कोई एक लेन स्वयं पर बैरिकेड लगाकर ट्रैफिक जाम का कारण बन जाती हैं। ऐसे में आपको अपने ब्रेस्ट पर एक कोमल गांठ या गर्म स्पॉट महसूस हो सकता है -जो उस रुकावट की उपस्थिति दर्शाती है।

ऐसे में एक मसाज आपके ब्रेस्ट को थोड़ा आराम पहुंचा सकता है और जाम हुई डक्ट को खोलने में मदद कर सकता है। तब तक दूध पिलाते रहें या दूध पंप करते रहें जब तक आपको असुविधा महसूस होनी बंद हो जाए। यदि सब कोशिशें विफल हो जाए, तो मदद मांगने से न घबराएं।
(मैस्टाइटिस) ब्रेस्ट की सूजन
आप अच्छी-खासी ब्रेस्टफीडिंग करने में लगे थे, और फिर अचानक बूम! आपके ब्रेस्ट ऐसा महसूस करने लगते हैं जैसे किसी ने उन्हें गुस्से से जकड़ लिया हो। लाल, गुस्से में आगबबूला और मानों जैसे आपका ध्यान आकर्षित करने के लिए चिल्ला रहे हों। यह मैस्टाइटिस का संकेत है – आपके ब्रेस्ट में पनपने वाला एक बैक्टीरियल इन्फेक्शन जो ‘तकलीफदेह बूब्स’ को एक अलग ही स्तर पर ले जाता है।
यह इन्फेक्शन केवल ब्रेस्ट तक ही सीमित नहीं है। इसमें दर्द के साथ फ्लू जैसे लक्षण भी होते हैं – ठंड लगना, बुखार और थकान। हालांकि यह बच्चे के जन्म के बाद पहले कुछ हफ्तों में आम है, यह कभी भी हो सकता है और ब्रेस्टफीडिंग संबंधी अन्य समस्याओं का कारण बन सकता है, जैसे जाम हुई डक्ट्स, एन्गॉर्जमेन्ट और निपल्स का कटना।
नर्सिंग करते रहना सहायक है – चाहे नेचुरल तरीके से या पंप की मदद से ब्रेस्ट को खाली करके – लेकिन ऐसे मामले में इन्फेक्शन से लड़ने के लिए डॉक्टर से कंसल्ट करके एंटीबायोटिक दवाएं लेने में ज्यादा समझदारी है।
फंगल इन्फेक्शन
आपके ब्रेस्ट, जो निरंतर दूध पिलाते रहने के कारण हमेशा हल्के गर्म और नम रहते हैं, कैंडिडा जैसे फंगस के लिए ब्रीडिंग ग्राउंड बन सकते हैं। इससे थ्रश और इच फेस्ट नामक कंडीशन उत्पन्न होती है जो बच्चे के मुंह से ब्रेस्ट तक और ब्रेस्ट से बच्चे के मुंह को बार-बार ट्रांसफर होकर एक कभी ना ख़त्म होने वाली तकलीफ बन जाती है। आपके निपल्स में भयंकर खुजली होती है और ऐसा महसूस होता है जैसे उन्होंने आग पकड़ ली हो। वे दर्द के कारण लाल और पपड़ीदार हो सकते हैं, और ऐसा महसूस होता है जैसे यह सतही ना होकर ब्रेस्ट के अंदर की कोई गहरी पीड़ा है।

इस तकलीफ के लिए आमतौर पर डॉक्टर आपके निपल और बच्चे के मुंह के लिए कुछ एंटीफंगल दवाएं लिखते हैं। अपने ब्रेस्ट पंप को अच्छी तरह से सैनिटाइज़ करें और दूध पिलाने के बाद अपने निपल और उसके आसपास की जगह की अच्छे से सफाई करें ताकि फंगल स्पोर्स से (बीजाणुओं) बचाव हो सके।
पीड़ादायक क्रैक्ड निपल्स
ब्रेस्टफीडिंग के दौरान, आपके निपल्स सबसे महत्वपूर्ण रोल निभा रहे होते हैं जिन्हें शायद ही कभी आराम मिलता है। इस ब्रेस्टफीडिंग समस्या के पीछे अनेक कारण हो सकते हैं – सही तरह से लैचिंग नहीं होना, ड्राई स्किन, फंगल इन्फेक्शन, हॉर्मोन्स संबंधी या फिर गलत तरीके से या जरूरत से ज्यादा पंप करना। किसी भी प्रकार का ट्रीटमेंट शुरू करने से पहले बेहतर होगा कि आप किसी अच्छे डॉक्टर या लैक्टेशन स्पेशलिस्ट की मदद से आपके फटे हुए निपल्स या निपल में दर्द का सही कारण जानने की कोशिश करें। इससे राहत के लिए निपल ओइंटमेंट्स, कूलिंग जेल पैड और माइल्ड पैन किलर उपलब्ध हैं लेकिन इन्हें किसी हेल्थकेयर प्रोफेशनल की सलाह से ही लें।
उन सभी मांओं के लिए एक सलाह, जो नींद से वंचित होने के बावजूद भी दृढ़ संकल्प के साथ मातृत्व की इस भूलभुलैया से गुज़र रही हैं। सही जानकारी के साथ इस राह में आने वाली बाधाओं पर काबू पाना आसान हो सकता है। ब्रेस्टफीडिंग कराना भले ही हमेशा आसान नहीं होगा, लेकिन अपने नन्हे-मुन्ने के लिए, उसके साथ यह सफर अवश्य ही अनुभव करने लायक है।
सावधानी: यह आर्टिकल ट्रेन्ड प्रोफेशनल्स की मदद से केवल शैक्षिक उद्देश्यों के लिए तैयार किया गया है। यह मेडिकल डायग्नोसिस की जगह नहीं ले सकता है। यदि आप या आपके प्रियजन ऐसी समस्याओं का सामना कर रहे हैं, तो कृपया अपनी आवश्यकताओं के अनुकूल ट्रीटमेंट प्राप्त करने के लिए अपने हेल्थ केयर प्रोवाइडर से संपर्क करें।




