पोस्टपार्टम के बाद, ऐसा महसूस हुआ जैसे मेरे पति और मेरे बीच प्यार खत्म होने लगा
बेबी होने के बाद अपने पार्टनर से दोबारा कनेक्ट करना कठिन हो सकता है – जानिए हमने यह कैसे किया
“जब तुम्हारी वाइफ प्रेग्नेंट होगी, तो वो तुमसे नफरत करेगी, और ऐसा बच्चा होने के कुछ समय बाद तक भी संभव है।”
मेरी प्रेगनेंसी की खबर सुनकर मेरे पति के दोस्त ने भले ही यह मजाक में कहा हो, लेकिन उस वक़्त उनकी इस बात को मैंने मुंह बनाकर हंसी में उड़ा दिया। लेकिन पोस्टपार्टम के आठ कठिन महीनें बाद, जब हमारे छोटे-मोटे मतभेद हर बार बड़े झगड़ों में बदलने लगे, और रोना-चिल्लाना रोज की बात हो गई (मेरे लिए, हमारे बच्चे से ज्यादा), ये शब्द एक बार फिर मेरे दिमाग में गूंज उठे। क्या मैं सचमुच अपने पति से नफरत करने लगी थी? बच्चा होने के बाद, मैं अपने पार्टनर से दोबारा कनेक्ट क्यों नहीं कर पा रही थी?
पर, मैं उससे नफरत कैसे कर सकती थी? भले ही मैंने उसे यह कभी कहा नहीं, लेकिन मेरा मिलेनिअल मैन सबसे अच्छा पिता/पार्टनर है। सहानुभूति में उसने भी वजन बढ़ा लिया, वह मुझसे ज्यादा बार डायपर बदलता और अचानक ही बिना कहे मेरे पैरों की मालिश भी कर देता। जब बेबी पहली बार घर आया, और उसे गलत तरीके से पोंछने जैसी छोटी-छोटी बातों के लिए मैं अपने पति पर चिल्लाई तो उसने कई बार बिना नाराज़ हुए अपनी गलती स्वीकार की और माफ़ी भी मांगी। इसके बावजूद, जैसे-जैसे हम एक रूटीन में बंधते गए, हम इमोशनली अलग होते गए, रोमांटिक पार्टनर के बजाय रूममेट में परिवर्तित होते चले गए।

हम दोनों के बीच दूरियां कम करने के लिए मैंने सेक्स का रुख किया। लेकिन बाद में, कुछ मेन्टल हेल्थ एक्सपर्ट्स से बात करते समय, मुझे पता चला कि मुझे इमोशनली अपने पार्टनर से दोबारा कनेक्ट करने की ज़रूरत है।
बीबीसी.कॉम के 2023 के एक आर्टिकल में इस बात को हाईलाइट किया गया है कि एक कपल के जितने अधिक बच्चे होंगे, उनका अपने रिश्ते से संतुष्ट होने की संभावना उतनी ही कम होगी। जब हम दोनों ने आत्मनिरीक्षण किया तो जाना कि कैसे हमारी नई भूमिकाएं हमारे रिश्ते को चुनौती दे रही थीं, और हमें फिर से जुड़ाव महसूस करने के पुन: शुरुआत करनी पड़ेगी।
बेबी होने के बाद अपने पार्टनर से दोबारा कनेक्ट कर पाना मुश्किल क्यों लगता है
नई मॉम्स के लिए: प्रत्यक्ष (और अप्रत्यक्ष) मेन्टल लोड

चाहे पिता कितने भी ‘हैंड्स-ऑन’ क्यों ना हों, नौ महीने तक हैवी लिफ्टिंग (अंदर और बाहर) तो नई माएं ही करती हैं।
क्लिनिकल साइकोलोजिस्ट, फिजियोथेरेपिस्ट और सर्टिफाइड क्लिनिकल ट्रॉमा प्रोफेशनल प्राची वैश एक नई मां होने के उत्साह और खौफ का बखूबी वर्णन करती हैं, “वह कई भावनाओं का एक साथ अनुभव कर रही होती है। प्यार (जो शिशु के साथ नेचुरल बॉन्डिंग बनाने के लिए उसके शरीर में बन रहे ऑक्सीटोसिन की बदौलत बहुतायत में होता है), सब कुछ सही करने को लेकर असुरक्षा, अलग-अलग लोगों की विभिन्न सलाहों से निपटने का रोष, सब को खुश रखने का प्रयास, और अपने पार्टनर के साथ अपनी मन:स्थिति शेयर करने की आशा।”

इन भावनाओं के साथ तीव्र हार्मोनल परिवर्तन और शारीरिक थकान भी जोड़ दें, और तब आप समझ सकेंगें कि वह केवल सपोर्ट की उम्मीद रखती है लेकिन बिना किसी शर्त या जजमेंट के। और यदि वह भी उसे नहीं मिलता, तो वह खुद को प्राथमिकता देकर अपना ध्यान स्वयं रखती है। यह अलगाव का कारण बन सकता है—”तुम मेरा ख्याल नहीं रखोगे, तो मैं अपना अपना ख्याल खुद रखूंगी, फिर भले ही इसके लिए मुझे तुम्हें कुछ समय के लिए अलग करना पड़े।”
रोज़ जब मैं वर्कआउट करती हूं तो मुझे मेरे पति का पूरा सपोर्ट रहता है, बेबी की नाईट-फीडिंग, उसे पार्क में घूमाने और प्ले-टाइम में भी वह बराबर का योगदान देता है। फिर भी, कभी कभी गुस्से में, एक प्राइमरी पैरेंट – जिसका शरीर तक बदल गया है – होने के इस भार को न समझने के लिए मैं उस पर नाराज़ हो जाती हूं।
अपनी पोस्टपार्टम बॉडी को एक्स्प्लोर करना और उसे स्वीकारना
साइकोलोजिस्ट और कॉउंसलर तनु चोकसी बताती हैं कि नई माओं को बॉडी इमेज और आत्मसम्मान जैसे मुद्दों का भी सामना करना पड़ता है। जितनी भी महिलाएं इस चाइल्ड बर्थ के प्रोसेस से गुजरी होंगी, वे इस बेडौल या अनाकर्षक दिखने वाले भाव को समझ सकती हैं। यह इंटिमेसी के दौरान आपकी सहजता और आत्मविश्वास को प्रभावित करता है, जो इमोशनल डिसकनेक्ट का कारण बनता है। अगर आपको लगता है कि आपका पार्टनर आपके शरीर से प्यार नहीं करता तो आपका प्यार भी कम होने लगता है।
मुझे तो, उसका प्यार से गले लगाना भी रुखा लगता था क्योंकि मेरा शरीर अब बिलकुल भी वैसा नहीं था जैसा मुझे, या उसे, याद था। हां, सैद्धांतिक रूप से मेरा मानना है कि औरतों का शरीर पूजनीय होता है, क्योंकि यह नया जीवन देने में सक्षम है। लेकिन इसे एक नई मां को समझाने की कोशिश करें, जिसे छह सप्ताह से ब्लीडिंग हो रही हो, पेट निकल गया हो और जिसके ब्रेस्ट दर्द के मारे सूज के कुप्पा हो गए हों। जब भी मेरा पार्टनर मुझे छूता था, तो सबसे पहला ख्याल मुझे यह आता कि क्या वह मेरी कमर के नए ‘टायर’ को महसूस कर सकता है?
इसलिए, मैं ज्यादा से ज्यादा समय अपने बढ़ते वजन की चिंता और उसे कम करने की कोशिश में बिताती। वर्कआउट करने से मुझे मानसिक रूप से बहुत खुशी मिलती थी, लेकिन मुझे अपने पति के साथ में वर्कआउट करने के बारे में सोचना चाहिए था।
नए डैड्स के लिए: ऐसा महसूस करना कि आपके पार्टनर की लाइफ में आपकी जगह किसी और ने ले ली हो
एक नवजात शिशु की देखभाल करने और अपने लिए कुछ समय निकालने में बिताए गए घंटों के बीच, मैं अपने पति को अनदेखा कर रही थी। हां, मैं उससे बात करती थी, लेकिन वे ज्यादातर हमारे बच्चे और मेरी ज़रूरतों के बारे में होती थी। मैं इस ‘नई मां की जरूरतें सबसे ऊपर होती हैं’ वाले भाव में बहने लगी थी। यह जायज़ है, लेकिन यही सबकुछ नहीं है।
मेरा पति भी तो अपने जीवन और खुद में आए बदलावों से जूझ रहा था।
वैश बताती हैं, “बहुत से पुरुषों को ऐसा महसूस होने लगता है जैसे उनके साथी के जीवन में उनकी जगह किसी और ने ले ली है। हालांकि यह सबकॉन्शियस लेवल पर होता है लेकिन उन्हें ऐसा लगता है कि उनकी ज़रूरतों को, बच्चे की ज़रूरतों के सामने, प्राथमिकता मिलनी बंद हो गई है। यह बात उन पुरुषों के लिए बिलकुल उपयुक्त है जो अपने पार्टनर पर इमोशनली निर्भर करते हैं। इससे रिजेक्शन और डिसकनेक्ट के भाव पैदा होते हैं।”
जब मैंने बड़ी सावधानी के साथ उससे यह पूछा कि क्या वह भी ऐसा महसूस करता है, तो उसकी बात सुनकर मेरा दिल टूट गया: “मुझे पता है कि तुम बहुत कठिन समय से गुजर रही हो, लेकिन मुझे नहीं लगता कि अब तुम्हारे पास मेरे लिए टाइम या ब्रेन-स्पेस है।” तब मुझे एहसास हुआ कि पेरेंटहुड के इस नए सफर के दौरान उसकी मांगें कितनी कम थी।
नई ज़िम्मेदारियों के बोझ तले दबा हुआ महसूस करना
जब मेरे पति ने अपनी भावनाएं मेरे साथ शेयर करना शुरू किया, मुझे चोकसी की नए पिताओं के सामने आने वाली चुनौतियों की लिस्ट याद आ गई। “नया पिता बनने का मानसिक बोझ, एक अत्यधिक इमोशनल जीवनसाथी, एक बच्चे की फाइनेंशियल और इमोशनल ज़िम्मेदारी और अपने पार्टनर द्वारा उपेक्षित महसूस करना जो पहले आपको बहुत प्यार करती थी।”
हालांकि हमने माना कि फाइनेंशियल दबाव, समय की कमी, एक नए इंसान को अच्छे से बड़ा करने की चिंता जैसे अन्य कई कारण थे जो हमारी फिज़िकल रिलेशनशिप के रास्ते में आ रहे थे, लेकिन साथ ही एक और बात जो मुझे कचोट रही थी वो यह थी कि मैं उससे दूर होती जा रही थी क्योंकि मैं केवल अपने बच्चे और खुद पर ध्यान दे रही थी।
बच्चे के जन्म के बाद अपने पार्टनर से दोबारा कनेक्ट करने के लिए कुछ टिप्स
हमारे लिए, एक दूसरे के प्रति ईमानदार होना हमारा पहला कदम था। यह स्वीकार करना कि हम एक दूसरे से असहमत हो सकते हैं, और अब हम वही पहले वाले इंसान नहीं हैं।
एक नए डैड के तौर पर, मेरे पार्टनर को यह समझने की जरूरत थी कि वह नई ज़िम्मेदारियों से जूझ रहा था, और इनके कारण वह अभिभूत, तनावग्रस्त और उपेक्षित महसूस कर रहा था। आत्मनिरीक्षण करने से, खुल कर बातचीत करने से हम फिर से एक दूसरे को प्यार करना शुरू कर सकते हैं।

एक नई मां होने के नाते, मेरी ज़रूरतें अलग थीं, और यह अपेक्षा करने के बजाय कि वह मेरे मन की बात पढ़े, मैंने उसके सामने अपनी जरूरतें रखना शुरू किया। मुझे उसके लिए भी समय निकालने और जगह बनाने की आवश्यकता थी। जब बेबी सो रहा होता या जब मैं उसे नहला रही होती या फीड कर रही होती तो मैंने उससे कुछ समय अपने साथ बैठने के लिए कहना शुरू किया। इस तरह से हम आपस में बात कर सकते थे और वह भी मेरे और बेबी के टाइम का हिस्सा बन सकता था।
मैंने सेक्स को भी एक नया रूप दिया। यह एक काम की तरह नहीं लगना चाहिए। वैश कहती हैं, “एक नई मां के रूप में, मुझे एहसास हुआ कि सेक्स की मदद से मैं अपनी बॉडी पर अपना चार्ज फिर से महसूस कर सकती हूं, यह मुझे खूबसूरत महसूस करा सकता है और मेरे अंदर अच्छा महसूस कराने वाले एंडोर्फिन में बढ़ोतरी कर सकता है।”
इस सलाह को मानते हुए, हमने बेबी को नानी और दादी के पास छोड़कर, घर पर डेट नाइट करना शुरू किया ताकि हम बातें कर सकें, फ़्लर्ट कर सकें और एक दूसरे के साथ कनेक्ट कर सकें। बाहर डेट नाइट्स के लिए जाने के बजाय यह हमारे लिए ज्यादा मददगार रहा। एक नियम? बच्चे के बारे में कोई बात नहीं होगी!
अपने पार्टनर के साथ इमोशनली जुड़ने के लिए वैश ने पुरुषों के लिए भी कुछ सलाहें शेयर की हैं। उनके अनुसार, “अगर आप उसकी प्रशंसा करेंगे, उसे महत्वपूर्ण महसूस कराएंगे, उसे सराहेंगें, तो वह खुद को आपके साथ फिज़िकली शेयर करने में सुरक्षित महसूस करेगी। अगर उसे लगेगा कि आप केवल सेक्स की चाह में उसके करीब आते हैं, तो वह आपकी निकटता को हमेशा उस गुप्त उद्देश्य से जोड़ना शुरू कर देगी और यह एक टर्न-ऑफ है।”
फिर से प्यार करें, कुछ अलग तरीके से
दस महीनें बीत गए, अब हम दोनों काफी बेहतर महसूस करते हैं, ऐसा लगता है जैसे हम एक नए मक़ाम पर पहुंच गए हैं। और यह इसलिए संभव हुआ क्योंकि हमने एक दूसरे को एक इंसान की तरह देखना शुरू किया नाकि केवल पेरेंट्स के रूप में। कल की ही बात है, रात में सोने से पहले उसने मुझे गले लगा लिया। मैं चौंक गई और जब मैंने उससे पूछा कि ऐसा क्यों, तो कोई कारण नहीं था।
यह भले ही छोटी सी बात थी, लेकिन मेरे लिए यह सब कुछ था। इसने मुझे फिर से अहसास दिलाया कि बच्चे के जन्म के बाद अपने पार्टनर से दोबारा कनेक्ट करने के लिए यह बहुत जरूरी है की आप हर दिन छोटे-छोटे कदम उठाएं।





